BNP NEWS DESK। Sharadiya Navratri 2025 आदिशक्ति की आराधना-साधना का महापर्व शारदीय नवरात्र इस बार दस दिनी होगा। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा 22 सितंबर से नवरात्रारंभ होगा और एक अक्टूबर को नवमी तक चलेगा।
Sharadiya Navratri 2025 अबकी आश्विन शुक्ल चतुर्थी तिथि की वृद्धि है तो महाअष्टमी व महानवमी व्रत 30 सितंबर को होगा। नवमी एक अक्टूबर को दोपहर 2.37 बजे तक है। इसमें 2.37 बजे से पूर्व नवमी का होमादि, नारियल बलि व देवी पूजन करना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार शास्त्रों में कहा गया है-‘महानवमी तू बलिदान व्यरिक्त विषये पूजोपोषणा दापष्टमी विद्धाग्राह्या महानवमी’ अर्थात पूजा तथा उपवास में अष्टमी विद्ध नवमी ग्राह्य है। नवमी युक्त दशमी बलिदान हेतु प्रशस्त है।
महानिशा पूजन 29-30 की रात सप्तमी युक्त अष्टमी में किया जाएगा। संधि पूजन 30 की मध्य रात्रि के बाद अष्टमी युक्त नवमी में होगा। एक अक्टूबर को महानवमी का व्रत होगा। उसी दिन कन्या पूजन, अपराजिता, शमी पूजन तथा हवन के साथ अनुष्ठानों की पूर्णाहुति होगी।
पारन विधान
महाअष्टमी व्रत का पारन एक अक्टूबर को दिन में 2.37 बजे के पूर्व कर लेना चाहिए। संपूर्ण नवरात्र व्रत का पारन दो अक्टूबर को हवन इत्यादि करने के बाद करना चाहिए।
विजय दशमी
एक अक्टूबर को दोपहर 2.37 बजे के बाद दशमी तिथि लग जाएगी। आश्विन शुक्ल दशमी तथा श्रवण नक्षत्र के संयोग से विजयदशमी पर्व दो अक्टूबर को मनाया जाएगा। साथ ही दुर्गा प्रतिमा विसर्जन किया जाएगा।
कलश स्थापन
आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 21 सितंबर की अर्धरात्रि के बाद रात 1:23 बजे लगेगी और 22 सितंबर की अर्धरात्रि के बाद रात के तीसरे प्रहर 2.55 बजे तक रहेगी। ऐसे में आश्विन शुक्ल प्रतिपदा 22 सितंबर को होगी और इसी दिन प्रात: छह बजे से 1.30 बजे तक कभी भी कलश स्थापन किया जा सकेगा। इसमें प्रात: छह से आठ बजे और फिर 8.30 से 10.30 बजे तक अतिशुभ मुहूर्त है। अभिजीत मुहूर्त 11.37 से 12.23 बजे तक है।
चतुर्थी वृद्धि से नवरात्र दस दिनी
बीएचयू ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय पांडेय बताते हैं कि ज्योतिषीय दृष्टि से नवरात्र के दिनों में वृद्धि शुभ मानी जाती है। इस बार चतुर्थी तिथि की वृद्धि के कारण नवरात्र दस दिनी होगा। चतुर्थी तिथि 25 सितंबर व 26 सितंबर को भी रहेगी। 26 सितंबर को प्रात: 6:48 बजे तक चतुर्थी होने से उदयातिथि में 26 को भी चतुर्थी का मान होगा। पंचमी तिथि 27 सितंबर को 8:46 बजे रहेगी, अतएव उदयातिथि में पंचमी 27 सितंबर को मिलने से पंचमी व्रत -दर्शन 27 सितंबर को होगा।
एक अक्टूबर को दोपहर 2:37 बजे तक हवन, अगले दिन प्रात: विसर्जन
मूल नक्षत्र में मां का आह्वान किया जाता है। श्रवण नक्षत्र में विसर्जन होता है। इस बार महानवमी व्रत उपरांत नौ दिवसीय व्रत करने वाले साधक एक अक्टूबर को यावेत् नवमी के सिद्धांत के चलते दोपहर 2:37 बजे तक पूर्णाहुति हवन कर लेंगे। दो अक्टूबर को प्रात: 6:18 बजे के बाद प्रतिमा विसर्जन किया जाएगा।
देवी दर्शन
22 सितंबर – प्रतिपदा – शैलपुत्री
23 – द्वितीया – ब्रह्मचारिणी
24 – तृतीया- चंद्रघंटा
25 – चतुर्थी – कूष्मांडा
26- चतुर्थी – कोई दर्शन नहीं
27- पंचमी – स्कंद माता दर्शन
28- षष्ठी- कात्यायिनी
29- सप्तमी – कालरात्रि
30- अष्टमी – महागौरी व सिद्धिदात्री
01 अक्टूबर – नवमी – 2.37 से पूर्व होम, बलि आदि, पारन
02 अक्टूबर – दशमी – विजय दशमी
















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