श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार पर आरती का स्थान बदला

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Ganga water level

BNP NEWS DESK।  Ganga water level गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि अब बाढ़ के खतरे में बदलने लगी है। नदी के बढ़ते जलस्तर और उफान के कारण तटीय इलाकों में इसका व्यापक असर दिखने लगा है। स्थिति को देखते हुए श्री काशी विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार (ललिता घाट) पर होने वाली आरती का स्थान बदलना पड़ा है। पहले यह आरती नीचे ललिता घाट के मुख्य प्लेटफार्म पर होती थी, लेकिन वहां पानी भर जाने के कारण अब सुरक्षा के लिहाज से आरती को ऊपर सेल्फी प्वाइंट वाले स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है।

जलस्तर बढ़ने से गंगा का पाट चौड़ा हो गया

Ganga water level  शुक्रवार को गंगा के जलस्तर में करीब तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद नदी का स्वरूप तेजी से बदल गया है। बढ़ते पानी के साथ पहाड़ों और मैदानी इलाकों से भारी मात्रा में जलकुंभी बहकर आ रही है, जिसने नदी की सतह को पूरी तरह पाट दिया है। जलस्तर बढ़ने से गंगा का पाट चौड़ा हो गया है, जिसके चलते उस पार का रेतीला (बालू वाला) क्षेत्र पूरी तरह पानी में समा चुका है। वहीं, अस्सी घाट के निचले हिस्सों में पहले से जमा मिट्टी भी अब पूरी तरह डूब गई है।

 

बाढ़ की आहट को देखते हुए जिला प्रशासन और जल पुलिस पूरी तरह सतर्क

 

घाटों की निचली सीढ़ियों और प्लेटफार्म्स के जलमग्न होने से तीर्थयात्रियों, स्थानीय दुकानदारों और घाट किनारे रहने वाले परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बाढ़ की आहट को देखते हुए जिला प्रशासन और जल पुलिस पूरी तरह सतर्क है।

बताते चलें कि शुक्रवार शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 60.53 मीटर दर्ज किया गया। चेतावनी स्तर 70.262 मीटर और खतरा बिंदु 71.262 मीटर है। वर्तमान में गंगा खतरे के निशान से करीब 10.73 मीटर नीचे बह रही हैं, जिससे फिलहाल बाढ़ का कोई तत्काल संकट नहीं है। अब तक का सर्वकालिक उच्चतम बाढ़ स्तर 73.901 मीटर रहा है, जो 9 सितंबर 1978 को दर्ज किया गया था।

 

घाट की सीढ़ियां चढ़ने लगीं गंगा

 

पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक मानसून अपनी पूरी धमक दिखा रहा है, जिसका असर अब काशी में भी दिखने लगा है। एक हफ्ते से गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ाव का रुख बना हुआ है और पानी धीरे-धीरे घाटों की सीढ़ियों की ओर बढ़ रहा है। लेकिन पिछले साल के मुकाबले अब भी करीब आठ मीटर का बड़ा ‘फासला’ बना हुआ है। एक साल पहले 17 जुलाई 2025 को सुबह आठ बजे जलस्तर 68.76 मीटर पर हिलोरें ले रहा था।

वहीं, शुक्रवार यानी 17 जुलाई 2026 को सुबह आठ बजे यह आंकड़ा सिमटकर महज 60.53 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर पिछले वर्ष के मुकाबले 8.23 मीटर नीचे चल रहा है, जो मानसून के इस सीजन के लिहाज से बड़ी गिरावट है। हालांकि, जुलाई के दूसरे हफ्ते की पारंपरिक बढ़त इस बार भी अपना असर दिखा रही है।

बीते 10 दिनों से गंगा में लगातार बढ़ाव दर्ज किया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों और मैदानी इलाकों में रुक-रुक कर हो रही भारी बारिश के चलते केवल पिछले चार दिनों के भीतर ही गंगा के जलस्तर में करीब 1.41 मीटर की तेजी से बढ़ोतरी हुई है। Ganga water level

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Author: BNPNEWS

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