BNP NEWS DESK। stock market शेयर बाजारों के लिहाज से कैलेंडर वर्ष 2026 की शुरुआत अच्छी नहीं रही है। विदेशी फंडों की लगातार निकासी, रुपये में कमजोरी, कारपोरेट आय में सुस्ती, भूराजनीतिक जोखिम और टैरिफ संबंधी नई चिंताओं के कारण पहले महीने में दोनों प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी चार प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क चुके हैं।
जनवरी में अब तक बीएसई का मानक सूचकांक सेंसेक्स 3,682.9 अंक या 4.32 प्रतिशत और एनएसई का निफ्टी 1,080 अंक या 4.13 प्रतिशत गिर चुके हैं।
स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के रिसर्च प्रमुख संतोष मीना का कहना है कि ऐतिहासिक रूप से जनवरी में बजट से पहले ऐसे रुझानों में तेज गिरावट देखी गई है, जिसमें गणतंत्र दिवस के बाद सुधार होता है।
stock market बाजार के प्रतिभागियों को इस बार भी इसी तरह के उलटफेर की उम्मीद है। जनवरी 2025 में भी बीएसई सेंसेक्स 638.44 अंक या 0.81 प्रतिशत गिर चुका था। इसके पहले जनवरी 2024, 2023, 2022, 2021 और 2020 में भी बीएसई बेंचमार्क में गिरावट आई थी।
भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और नए टैरिफ संबंधी चिंताएं
वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और नए टैरिफ संबंधी चिंताएं घरेलू शेयरों पर प्रभाव डाल रही हैं। वैश्विक जोखिम-नकारात्मक वातावरण ने इस महीने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा आक्रामक बिक्री को प्रेरित किया है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ा है, जो रिकार्ड निम्न स्तर पर पहुंच गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल के ऊंचे दाम और बढ़ते वैश्विक बांड यील्ड ने जोखिम-नकारात्मकता को और बढ़ा दिया है, जिससे निवेशक सतर्क बने हुए हैं। पोनमुडी के अनुसार, आइटी, बैंकिंग और उपभोक्ता से जुड़े क्षेत्रों में कुछ प्रमुख शेयरों से आय में निराशा ने निवेशक आशावाद को और कम किया है, जिससे वर्ष की शुरुआत निराशाजनक रही है। stock market
23 जनवरी को अमेरिकी डालर के मुकाबले भारतीय रुपया 92 के ऐतिहासिक निम्न स्तर पर पहुंच गया था। इस महीने अब तक स्थानीय मुद्रा दो प्रतिशत से अधिक गिर चुकी है। एक्सिस सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता, घरेलू विकास की मजबूती और वित्तीय अनुशासन के चलते केंद्रीय बजट 2026-27 में विकास समर्थन और व्यापक आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की उम्मीद है। stock market
पिछले सप्ताह दो प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट रही
बीते सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में दो प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान सेंसेक्स में 2,032.65 अंक और निफ्टी में 645.7 अंक की गिरावट रही। सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट का कारण वैश्विक और घरेलू चुनौतियों का संयोजन है।
कई कारपोरेट्स से निराशाजनक और सतर्क टिप्पणियां एक प्रमुख ट्रिगर के रूप में उभरी हैं, जिसने बाजार के विश्वास पर भारी दबाव डाला है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं खासतौर पर यूरोप के बीच व्यापार संबंधों में नवीनीकरण ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। stock market
















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