BNP NEWS DESK। Tatya Tope स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष की कई गाथाएं इतिहास के पन्नों में अमिट हैं। अब 169 वर्ष बाद ऐसा पन्ना सामने आया है, जो कुछ शब्दों में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की रणनीति बता रहा है। यह है संग्राम के महानायक तात्या टोपे का हुक्मनामा।
Tatya Tope बुंदेली भाषा में काली स्याही में लिखे इस दस्तावेज में तात्या टोपे समस्त सूबेदार, सरदार, सिपाही, पलटन और तोपखाना को संबोधित करते हुए कहते हैं, ‘राजा चरखारी ने एक मसविदा (प्रारूप) लिखकर भेजा है। अब आप सभी सिपाही और सरदार एकत्र होकर योजना तैयार करें, जो आप सबको स्वीकार होगा वह हमको (तात्या टोपे) को स्वीकार होगा।’
पत्र में पीछे की तरफ अंकित है मिति चैत्र, वदी सात, संवत 1914 यानी वर्ष 1857। सबसे ऊपर पूरे नाम वाला तात्या टोपे का हस्ताक्षर, सात पंक्तियों में भेजा गया यह संदेश क्रांति की रणनीति, तात्या का संगठन कौशल, निर्णय और नेतृत्व क्षमता को दिखाता है। इन दस्तावेजों को डिजिटाइज करने का कार्य ‘ज्ञान भारत मिशन’ के तहत किया जा रहा है।
बता दें, तात्या टोपे गुरिल्ला युद्ध में महारथी थे। उनकी निर्णय क्षमता को कई इतिहासकारों ने सराहा है। लेखक एंड्रयू वार्ड ने अपनी पुस्तक ‘कानपुर 1857’ में लिखा है कि 1857 के सभी विद्रोहियों में तात्या टोपे सबसे प्रतिभासंपन्न सिपहसालार थे। Tatya Tope
अब तात्या के हुक्मनामे ने इस धारणा को और पुष्ट कर दिया है। तात्या टोपे (रामचंद्र पांडुरंग टोपे) का जन्म 1814 में नासिक (महाराष्ट्र) में हुआ था। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में वह बुंदेलखंड और मध्य भारत में सक्रिय रहे। अंग्रेजों ने उन्हें शिवपुरी में गिरफ्तार कर लिया था, जहां उन्हें 18 अप्रैल, 1859 को फांसी दी गई थी।
तात्या ने परवाना में कहा, सिर्फ किराना आने-जाने में ‘हासिल’ लिया जाए
तात्या टोपे ने हुक्मनामा ही नहीं परवाना (पत्र) भी लिखे। स्वतंत्रता आंदोलन के समय धन का प्रबंध भी करना होता था। इसमें तात्या के निर्णय महत्वपूर्ण होते थे। वर्ष 1857 का (शुदि चार, संवत 1914) कालपी से उन्होंने बुंदेलखंड के दो कस्बों इटावा और आटा को लिखा कि किराना आने-जाने को छोड़कर अन्य किसी तरह का हासिल (हिस्सा या कर) नहीं लिया जाए।
पुरातत्व संचालनालय के आयुक्त मदन कुमार नागररोज ने बताया कि दस्तावेज को डिजिटाइज करने के दौरान तात्या टोपे से जुड़े पत्र मिले हैं, जो यह बताते हैं कि आंदोलन की योजना कितने सूक्ष्म तौर पर बनाई गई थी।
पुरातत्व अभिलेखागार तक ऐसे पहुंचा पत्र
रियासतों के विलय के बाद उनके यहां उपलब्ध ऐसे दस्तावेज को एकत्र किया गया था। वर्ष 1965 में इन दस्तावेज को भोपाल स्थित पुरातत्व अभिलेखागार में लाया गया। वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की गाथा बताने वाले ऐसे लगभग 250 दस्तावेज हैं। हुक्मनामा, परवाना, पत्र सहित 126 दस्तावेज तो तात्या टोपे से जुड़े हैं। Tatya Tope
















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