फरवरी में देखें अल्फा सेंटारिड्स उल्का वर्षा

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Alpha Centaurid

BNP NEWS DESK।  Alpha Centaurid फरवरी की शुरुआत आकर्षक चंद्र दर्शन से होने जा रही है। पहले दिन पूर्णिमा है। इस चंद्रमा को स्नो मून कहते हैं, वजह उत्तरी अमेरिका और कई अन्य देशों में बर्फबारी है। इन देशों में हर तरफ बर्फ की चादर सी बिछी नजर आती है।

Alpha Centaurid  समय की पहचान के लिए यह नाम दिया गया। पूरी रात स्नो मून देखा जा सकता है। वर्तमान में सिंह राशि में रेगुलस तारे के पास चंद्रमा नजर आएगा। फरवरी माह में पूर्णिमा के चांद को हंगर मून और बोन मून भी कहते हैं। इसकी वजह उत्तरी गोलार्द्ध में भीषण सर्दी और बर्फबारी के कारण भोजन की कमी होना है।

भोजन की तलाश में जंगली जानवर भी भटकते थे

यह समय कभी भुखमरी का समय माना जाता था। प्राचीन काल में भोजन की तलाश में जंगली जानवर भी भटकते थे। उन्हें शिकार नहीं मिलता था। इसी चांद को बियर मून भी कहते हैं, क्योंकि यह भालू के बच्चों के जन्म का समय होता है। कुछ लोग इसे भूखे भेड़ियों के साथ जोड़कर देखते हैं।

जवाहर तारामंडल की विज्ञानी सुरूर फातिमा कहती हैं कि उत्तरी अमेरिका की जनजातियां चंद्र चक्र के माध्यम से मौसम में बदलाव को समझती थीं। उसी के अनुरूप ये नामकरण किए गए हैं। 1760 में पहली बार स्नो मून का उल्लेख किया गया। Alpha Centaurid

इसके अतिरिक्त इस महीने अल्फा सेंटारिड्स उल्का वर्षा भी देखी जा सकेगी। इसमें बहुत अधिक टूटते तारे तो नहीं नजर आएंगे लेकिन पहले सप्ताह में कुछ टूटते तारे आसमान साफ रहने पर दिखाई देंगे। इन्हें देखने का सब से अच्छा समय भोर से ठीक पहले होगा अर्थात खगोलीय घटना में रुचि रखने वाले रात तीन बजे के आसपास आसमान को देखें तो ठीक रहेगा।
सबसे अधिक उल्का आठ फरवरी को नजर आएंगी। इस दौरान जब भी बौछार का केंद्र बिंदु सेंटारस तारामंडल में क्षितिज के ऊपर होगा तो सेंटारिड उल्काओं को देखने का मौका मिलेगा।
यदि पृथ्वी से तारामंडल को देखें तो सीरियस और कैनोपस के बाद सेंटारस तीसरा सबसे चमकीला तारा है। अल्फा सेंटारिड्स उल्का वर्षा को आधिकारिक रूप से 1980 में एम बुहागियार ने पश्चिमी आस्ट्रेलिया में देखा था। यह उल्का वर्षा 21 फरवरी तक सक्रिय रहती है। इसका नाम सेंटारस तारामंडल के अल्फा तारे के पास से निकलने के कारण पड़ा।

 

18 को सूर्य कुंभ राशि में जाएगा

जवाहर तारामंडल की विज्ञानी सुरूर फातिमा के अनुसार 16 फरवरी को चंद्रमा, मंगल ग्रह के निकट, 20 को शनि ग्रह, 27 को बृहस्पति के करीब दिखाई देगा। आसमान में इन दिनों मीन, मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क और सिंह राशियां (राशियां तारों का समूह होती हैं) देखी जा सकती हैं।
मृग, बृहल्लुब्धक, सारथी, महाश्व और वासुकी तारामंडल भी नजर आ रहे हैं। हमल, कृतिका, रोहणी, बह्महृदय, पुनर्वसु, मघा, काक्षी, राजन्य, व्याध, प्रश्वा और अगस्त्य तारे भी देखे जा सकते हैं। सूर्य, मकर राशि में है। 18 फरवरी को यह कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। बुध कुंभ राशि में, शुक्र मीन राशि, बृहस्पति मिथुन राशि, शनि मीन राशि में है। इसका अर्थ यह कि ये ग्रह संबंधित राशि के तारों के पास दिखाई देंगे। Alpha Centaurid

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Author: BNPNEWS

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