BNP NEWS DESK। home delivery tax एप से बुकिंग करके आपको गंतव्य तक पहुंचाने वाले दोपहिया वाहन, जोमैटो, स्वीगी, अमेजन जैसी कंपनियों के कार्य में लगी निजी मोटरसाइकिलों-स्कूटी पर शिकंजा कसने की तैयारी है। अब प्रदेशभर में व्यावसायिक कार्य करने वाले निजी वाहन स्वामियों को टैक्स देना होगा और परमिट लेकर आवागमन करना होगा।
उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने अपर पुलिस महानिदेशक यातायात, जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्तों से परिवहन विभाग के विशेष अभियान में सहयोग करने का निर्देश दिया है।
डिलीवरी कार्यों में निजी वाहनों का उपयोग बीमा, कर व पंजीकरण नियमों की अवहेलना
भूतल परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने सभी राज्यों के परिवहन आयुक्तों को लिखा कि ई-कामर्स व क्विक कामर्स कंपनियों में निजी वाहनों का व्यावसायिक उपयोग चिंताजनक है, निर्देश दिया कि इसके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाए। यह भी लिखा कि डिलीवरी कार्यों में निजी वाहनों का उपयोग बीमा, कर व पंजीकरण नियमों की अवहेलना है।
लखनऊ क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) ने 17 जनवरी को बैठक करके निर्णय लिया कि व्यावसायिक कार्य से आवागमन करने वाली बाइकों को टैक्सी के रूप में संचालित कराया जाएगा, एआरटीओ कार्यालय ने बाइक स्वामियों को इस कार्य के लिए पहली बार 4000 रुपये जमा करने फिर हर साल 2350 रुपये वार्षिक कर जमा करने के निर्देश दिया था। राजधानी लखनऊ में ऐसी बाइकों की संख्या करीब 15 हजार है। पहले चरण में 500 बाइक स्वामियों को टैक्सी का परमिट दिया जाना है। अब तक 262 बाइकों को परमिट दिया गया है।
बाइक स्वामी त्रैमासिक कर 660 रुपये भी जमा कर सकते हैं
आरटीओ कार्यालय में निजी बाइक को व्यावसायिक में बदलने के लिए आफलाइन आवेदन होता है, इस कार्य की फीस 300 रुपये है। परमिट फीस 1350 रुपये (इसमें 700 परमिट, 500 प्रार्थना पत्र व 100 रुपये कोर्ट फीस) है। कमर्शियल बाइक का वार्षिक कर 2350 रुपये तय किया गया है, बाइक स्वामी त्रैमासिक कर 660 रुपये भी जमा कर सकते हैं, ऐसे में उन्हें वर्ष में चार बार धन जमा करना होता है। बाइक के टैक्सी बनते ही उसके नंबर प्लेट का रंग सफेद से पीला हो जाएगा, जैसे चार पहिया व अन्य कमर्शियल वाहनों की नंबर प्लेट होती है।
परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने कहा कि जो निजी वाहन व्यावसायिक कार्य में चल रहे हैं उन्हें कमर्शियल वाहन के रूप में चलाया जाए, विभाग पंजीकरण व परमिट प्रक्रिया में तकनीकी सहयोग देगा। ऐसी कंपनियों व वाहन स्वामियों के साथ बैठक करके उन्हें नियमों की जानकारी दी जाए। सभी आरटीओ व एआरटीओ रिपोर्ट देंगे कि उनके यहां कितने वाहन ऐसा कर रहे हैं और उन्हें कमर्शियल करने के लिए क्या किया है।
















Discussion about this post