BNP NEWS DESK। i Jagannath औषधीय काढ़े की तासीर काम कर गई। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भक्तों के हाथों अतिशय स्नान से अस्वस्थ पुरीपुराधिपति भगवान जगन्नाथ पखवारे भर विश्राम के बाद स्वस्थ हो गए। बुधवार भोर नाड़ी परीक्षण के बाद मुख्य पुजारी ने उनके स्वस्थ होने की घोषणा की। स्नानादि, शृंगार, मंगला आरती के पश्चात मंदिर के पट खोल दिए गए। इसके साथ दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।
Jagannath भगवान जगन्नाथ ने बहन सुभद्रा, बड़े भैया बलभद्र संग भक्तों को मनोहारी छवि का दर्शन देकर कृतकृत्य कर दिया। दोपहर में काढ़े से कसैले हुए स्वाद को बनाने के लिए प्रभु को प्रथम पथ्य के रूप में जीरे की छौंक युक्त परवल का जूस दिया गया। यही जूस प्रसाद के रूप में भक्तों को वितरित किया गया।
एक पखवारे पश्चात प्रभु की प्रथम छवि भक्तों के समक्ष श्वेताभा लिए हुए आई। मंदिर के प्रधान पुजारी राधेश्याम पांडे ने प्रातः काल ही भगवान काे स्नान कराने के बाद श्वेत वस्त्र पहनाए, श्वेत पुष्पों से श्रृंगार और भव्य मंगला आरती की। इस दौरान पूरा मंदिर परिक्षेत्र प्रभु जगन्नाथ के जयकारों से गूंजता रहा।
डोली पर सवार हो आज निकलेंगे मनफेर यात्रा पर
भक्तों ने अतिशय प्रेम में पड़कर प्रभु को ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन गंगाजल से इतना स्नान कराया कि प्रभु बीमार पड़ गए। फिर तो वह 15 दिन के लिए पूर्ण विश्राम को चले गए थे। इस अवधि में मंदिर के पट बंद रहे। केवल पुजारी ही अंदर जाकर साज-श्रृंगार, आरती व भाेग लगाते रहे। प्रतिदिन प्रभु को पथ्य के रूप मेें काढ़े का भोग लगाया गया। एक पखवारे तक आराम करने के पश्चात व्याधि मुक्त हो चुके नाथों के नाथ अब गुरुवार की शाम को बहन सुभद्रा व बड़े भ्राता बलभद्र संग डोली में सवार होकर मनफेर यात्रा पर निकलेंगे।
इसके बाद गुरुवार की भोर की आरती के साथ काशी का तीन दिवसीय लक्खा रथयात्रा का मेला आरंभ हो जाएगा। फिर तीन दिन तक भगवान भक्तों के बीच होंगे और लोग बहन सुभद्रा, बड़े भाई बलदाऊ संग उनके नयनाभिराम छवि का दर्शन कर कृतकृत्य हो जाएंगे। भक्त अपने भगवान को नान खटाई का प्रसाद चढ़ाते हैं।
















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