BNP NEWS DESK। El Nino प्रारंभिक सुस्ती के बाद मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। गति में तेजी आई है, लेकिन बारिश की स्थिति अच्छी नहीं है। जून में अभी तक देश में औसतन 24 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस स्थिति को अलनीनो से जोड़कर देखा जा रहा है, जो प्रशांत महासागर में तेजी से उभर रहा है।
अलनीनो के संकेत बता रहे हैं कि आने वाले दिनों में चुनौती बढ़ सकती है। कृषि उत्पादन, जलाशयों का स्तर और खाद्य कीमतों की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि मानसून के दौरान अलनीनो कितना प्रभावी हो सकता है और बारिश की निरंतरता कितनी बनी रह सकती है।
El Nino मौसम विज्ञानियों के अनुसार, प्रशांत महासागर में तापमान सामान्य से लगभग 0.8 डिग्री सेल्सियस अधिक बना हुआ है। साथ ही अलनीनो के विकसित होने की स्थितियां भी मजबूत बनी हुई हैं। भारत में लगभग दो तिहाई बारिश मानसून से ही प्राप्त होती है। कृषि क्षेत्र का बड़ा हिस्सा अब भी वर्षा पर निर्भर है।
ऐसे में यदि मानसून के दौरान लंबा ‘ब्रेक पीरियड’ आता है या जुलाई-अगस्त में बारिश सामान्य से कम रहती है तो खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
यही कारण है कि केंद्र सरकार संभावित जोखिमों पर पहले से तैयारी कर रही है। कृषि मंत्रालय ने ऐसे 197 जिलों की पहचान की है जो अलनीनो की स्थिति में वर्षा की कमी से अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इन जिलों के लिए राज्यवार आकस्मिक योजनाएं तैयार की गई हैं। El Nino
इनमें कम अवधि वाली फसल किस्मों का उपयोग, वैकल्पिक फसलें, नमी संरक्षण तकनीक और सिंचाई प्रबंधन जैसे उपाय शामिल हैं। सरकार का प्रयास केवल सूखे से निपटना नहीं, बल्कि ऐसी स्थिति से भी बचाव करना है जब बुवाई के बाद लंबे समय तक बारिश न हो।
हिंद महासागर डाइपोल अभी तटस्थ अवस्था में
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आगे बढ़ रहे मानसून को प्रशांत महासागर का बढ़ता तापमान बाधित कर रहा है। इसलिए, मानसून की वर्तमान प्रगति को अंतिम तस्वीर नहीं माना जा सकता। फिर भी राहत की बात है कि हिंद महासागर डाइपोल अभी तटस्थ अवस्था में है, जो अगस्त-सितंबर में विकसित हो सकता है। ऐसी स्थिति में हिंद महासागर से भारत की ओर आने वाली नमी का प्रवाह बढ़ जाएगा, जो अलनीनो के प्रतिकूल प्रभाव को काफी हद तक संतुलित करेगा।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि केरलम में चार दिन की देरी से पहुंचने के बाद कुछ समय तक मानसून की प्रगति सुस्त रही थी, लेकिन अब बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों ओर से अनुकूल परिस्थितियां बनने लगी हैं।
स्काइमेट के अनुसार, मानसून ने गति पकड़ ली है और उत्तर-पूर्वी बिहार तक पहुंच गया है। पश्चिमी तट पर केरलम, कर्नाटक और गोवा में भारी बारिश दर्ज की जा रही है। उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से वर्षा और आंधी-तूफान की गतिविधियां बढ़ रही हैं। El Nino














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