BNP NEWS DESK। Kamrup Math मठ में गुरु के निर्वाण उत्सव (महाप्रयाण दिवस) पर धर्म सभा,भौतिक देह के विसर्जन और उनकी दिव्य चेतना (विदेह स्वरूप) के साथ एकाकार होने का महोत्सव है। यह दिन गुरु की शिक्षाओं को पुनः स्मरण करने, कृतज्ञता व्यक्त करने और आत्म-साधना में दृढ़ता लाने का अवसर होता है। निर्वाण का अर्थ मृत्यु नहीं,बल्कि ज्ञान की पूर्णता में विलीन होना है।
Kamrup Math उक्त बातें सोमवार को दशाश्वमेध स्थित 400 वर्षों से ज्यादा प्राचीन कामरूप मठ में पूर्व महंत द्वय स्वामी अच्युतानन्द तीर्थ व स्वामी बाणेश्वरानन्द तीर्थ महाराज के निर्वाण महोत्सव पर आयोजित धर्म सभा में श्री काशी विद्वत परिषद् के मंत्री व राष्ट्रपति पुरस्कृत पूर्व प्राचार्य डा.गणेश दत्त शास्त्री ने कही। इन्होनें मठ पर चर्चा करते हुए कहा कि मठ संप्रदाय के माध्यम से समाज को सामरिक,आर्थिक और सांस्कृतिक उन्नति की दिशा में प्रोत्साहित किया जाता है।
मठों के आयोजित सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम
मठों के आयोजित सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम, सभाएं और आयोजनों में लोगों को एक-दूसरे के साथ मिलने,ज्ञान विनिमय करने और सांस्कृतिक मूल्यों को संजोने का अवसर मिलता है अत: यह कामरूप मठ सनातन के लिए धार्मिक चेतना का केंद्र है। सभा को संबोधित करते हुए इन्होनें बतलाया कि पूर्व महंत स्वामी अच्युतानन्द तीर्थ महाराज को सभी जय जय बाबा के नाम से पुकारते थे ।
उन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवन काल में सनातनी परम्परा का अक्षरश: पालन करते हुए समाज को नयी दिशा प्रदान किया। इनके बाद इनके उत्तराधिकारी रहे स्वामी बाणेश्वरानन्द तीर्थ महाराज जी ने अपने गुरु के द्वारा बतलाए गए नियमों का पालन करते हुए मठ का विस्तार किया साथ ही ये दण्डी सन्यासी समाज के अध्यक्ष होने के नाते भी अपने समय में काशी ही नहीं अपितु बाहर के कई अन्य प्रान्तों में भी साधु व महात्माओं की सेवा के लिए अनेक बुनियादी कार्य किये जहां आज भी इनके नाम का स्मरण किया जाता है। Kamrup Math
इस धर्म सभा में काशी पण्डित सभा के मंत्री डा.विनोद राव पाठक भी उपस्थित थे इन्होनें अपने संस्मरण सुनाते हुए कहा काशी की पावन धरा पर सभ्यता और आध्यात्मिकता के केंद्र के रूप में यह मठ जाना जाता है । यह तीर्थ स्थानीय समुदायों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन, जीवन की सार्थकता का अनुभव और सभ्य संस्कृति को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।
मठ के वर्तमान महन्त स्वामी शुद्धानन्द तीर्थ महाराज ने विद्वानों का सम्मान किया व स्वामी जपेश्वरानन्द तीर्थ महाराज ने विषय प्रस्तावना रखा। धर्म सभा में व्याकरण शास्त्र के मूर्धन्य विद्वान् डा.शेषनारायण मिश्र,साहित्यशास्त्र के डा.पवन कुमार शुक्ल तथा ज्योतिष शास्त्र के मर्मज्ञ आचार्य संजय उपाध्याय ने भी अपने विचारों को प्रस्तुत किया।
सभा का कुशल संचालन वेदाचार्य डा.शम्भू लाल शर्मा ने किया। उत्सव के उपलक्ष्य में प्रात: 8 बजे मठ से एक विशाल शोभायात्रा निकाली गयी जो गंगा घाट पर एकत्रित होकर नाव से जलविहार करते व भगवत नाम जपते हुए हरिश्चंद्र घाट तक गयी। इसके बाद पुन: मठ पर वापस आकर गुरु पादुका पूजन,गीता पाठ,भजन व भंडारा का आयोजन किया गया।
निर्वाण महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को प्रात: 11:45 पर 108 सन्यासियों का पूजन व सम्मान किया जाएगा। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में शहर दक्षिणी के विधायक डा.नीलकंठ तिवारी जी होंगे। Kamrup Math















Discussion about this post