BNP NEWS DESK। Walk to Right देश में हमेशा यही कहा जाता रहा है कि हमेशा बाईं ओर चलना चाहिए, इससे हादसे होने का खतरा कम हो जाता है लेकिन सड़क सुरक्षा से जुड़े ताजा विश्लेषण बताते हैं कि यही आदत पैदल यात्रियों की जान के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती है। इसका बड़ा कारण यह है कि देश में वाहन लेफ्ट हैंड ड्राइव सिस्टम पर चलते हैं। ऐसे में पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित दिशा बाईं नहीं बल्कि दाईं है।
Walk to Right विशेषज्ञों का कहना है कि अब स्कूलों और घरों में दी जाने वाली पुरानी सीख बदलनी होगी। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि पैदल चलने वाला हमेशा ट्रैफिक के विपरीत दिशा में चले।
अर्थात अगर बाईं ओर ट्रैफिक चल रहा है तो आप दाईं ओर चलें ताकि वाहन चालक को आप साफ दिखाई दे सकें। सही दिशा अपनाकर ही पैदल यात्री सड़क हादसों से अपनी जान बचा सकते हैं।
लोगों को पैदल दाईं ओर चलने के लिए जागरूक करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने मुहिम शुरू कर दी है। पंजाब रोड सेफ्टी काउंसिल भी इसे लेकर जागरूकता अभियान शुरू कर रही है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, पैदल यात्रियों की मौत का सबसे बड़ा कारण यही ब्लाइंड एंगल है। जब कोई वाहन बाईं ओर चल रहा होता है तो चालक के लिए अपनी बाईं तरफ देखना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बाईं तरह चल रहा पैदल यात्री कई बार वाहन की चपेट में आ जाता है। इसके विपरीत दाईं तरफ चल रहा व्यक्ति चालक को साफ दिखाई देता है।
2023 में 35 हजार पैदल यात्रियों की हुई हादसों में मौत
बाईं ओर चलने के परिणाम कितने गंभीर निकल रहे हैं, इसका अंदाजा परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों को देखकर साफ तौर पर लगाया जा सकता है।
वर्ष 2023 में देश में सड़क हादसों में 35 हजार से ज्यादा पैदल यात्रियों की मौत हुई, जबकि 2022 में यह आंकड़ा 32 हजार से ऊपर था।
कुल सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में पैदल यात्रियों की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है। यह मामला सिर्फ जान तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक नुकसान से भी जुड़ा है। कई मामलों में बीमा कंपनियां पैदल यात्री की दिशा को लापरवाही मान लेती हैं। Walk to Right
















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