BNP NEWS DESK। Mahashivratri 2026 भगवान शिव व शक्ति स्वरूपा माता पार्वती के मिलन की रात्रि महाशिवरात्रि पर्व पर सर्वार्थसिद्ध योग बन रहा है। पर्व के दिन रविवार, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वनिज उपरांत शकुनी करण तथा मकर राशि का चंद्रमा रहेगा। पंचांग की यह स्थिति सर्वार्थसिद्धि योग का निर्माण करेगी। इसके साथ ही नौ वर्ष बाद एक बार फिर सूर्य, चंद्र, बुध, शुक्र, राहु, एक साथ कुंभ राशि पर पंचग्रही योग बना रहे हैं। इसके अतिरिक्त इस बार चार शक्तिशाली राजयोग भी निर्मित हो रहे हैं जो राष्ट्र, समाज व व्यक्ति को उन्नति की ओर ले जाएंगे।
Mahashivratri 2026 महाशिवरात्रि पर्व फाल्गुन कृष्ण पक्ष की रात्रिव्यापिनी चतुर्दशी में मनाया जाता है। चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी रविवार को शाम 4:23 बजे से आरंभ होकर अगले दिन 16 फरवरी को सायंकाल 5:10 बजे तक रहेगी। इस पर्व पर भगवान शिव को श्रद्धापूर्वक बिल्वपत्र, धतूरा, जल व दूध का अर्पण कर पंचाक्षरी मंत्र का जाप करना चाहिए।
ज्योतिर्विद पं. दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि सूर्य व बुध की युति से इस बार बनने वाला बुधादित्य राजयोग मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करेगा, वहीं शुक्र व बुध की युति से बनने वाला लक्ष्मी नारायण राजयोग धन, समृद्धि लाएगा व व्यापार में लाभ पहुंचाने वाला सिद्ध होगा। सूर्य व शुक्र के साथ बन रहा शुक्रादित्य योग कलात्मक सफलता दिलाएगा और सामाजिक वर्चस्व में वृद्धि का कारक बनेगा।
शनि देव अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान
शनि देव अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान हैं, इसलिए इस महाशिवरात्रि पर ‘शश’ नामक महापुरुष राजयोग का प्रभाव रहेगा जो देश में न्याय व्यवस्था को और मजबूत बनाएगा। शनि चूंकि मकर व कुंभ राशि का स्वामी हैं, इसलिए इस राशि के जातकों लिए यह राजयोग अधिक लाभकारी सिद्ध होगा। मिथुन, कुंभ, कन्या, मकर राशि वालों के लिए अत्युत्तम, मेष, वृश्चिक व सिंह को मध्यम लाभ देने वाला है। शुक्र की युति वृषभ और तुला राशि वालों के लिए उत्तम लाभ प्रदान करेगी। Mahashivratri 2026
















Discussion about this post