BNP NEWS DESK । Indias economy प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य नीलेश शाह ने कहा कि भारत का चौथी सबसे बड़ी इकोनमी से छठे स्थान पर आना एक अस्थायी झटका है और अपने से ऊपर वाली अर्थव्यवस्था के साथ इस अंतर को आसानी से पूरा किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि देश आने वाले वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनमी बनने की राह पर है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कुछ दिनों पहले आंकड़े जारी किए थे, जिसमें आर्थिकी के नजरिये से भारत चौथे से छठे नंबर पर आ गया है।
ढांचागत कमजोरी के बजाय तकनीकी और मुद्रा से जुड़े कारक वजह
कोटक म्यूचुअल फंड के एमडी नीलेश शाह ने आर्थिकी में आए इस बदलाव को किसी ढांचागत कमजोरी के बजाय तकनीकी और मुद्रा से जुड़े कारकों की वजह बताया। एक साक्षात्कार में शाह ने कहा, “दो चीजें हुईं हैं।
एक हमने जीडीपी गणना के लिए आधार वर्ष में बदलाव किया और दूसरा पिछले साल रुपये में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट आई। इन दोनों चीजों ने मिलकर हमारी जीडीपी को चार ट्रिलियन डालर से नीचे ला दिया।” शाह ने कहा, “क्या यह ऐसी चीज है, जिसके बारे में हमें परेशान होने की जरूरत है! इसका जवाब हां में है।
हालांकि, क्या हमें इस बात की चिंता करनी चाहिए कि अब हमारी गाड़ी उल्टी दिशा में जा रही है तो इसका उत्तर है ऐसा कुछ नहीं है।” शाह ने कहा कि देश ने पिछले एक दशक में काफी तरक्की की है। उन्होंने कहा, “हम 2014 में 10वीं सबसे बड़ी इकोनमी थे। आज हम छठी सबसे बड़ी इकोनमी हैं। यह अभी भी 12 साल से भी कम समय में चार पायदान की छलांग है।”
उन्होंने कहा, ज्यादा जरूरी बात है कि नंबर-पांच और नंबर चार के मुकाबले अंतर क्या है। यह अंतर बहुत कम है और इसे आसानी से पूरा किया जा सकता है। हम बाकी दुनिया से ज्यादा तेजी से बढ़ेंगे।’ शाह ने कहा, “आइएमएफ के अनुमान के मुताबिक भी 2031 तक हम तीसरी सबसे बड़ी इकोनमी बन जाएंगे। हालांकि, पहले यह 2027 या 28 में होने वाला था। तो इस तरह हम दो से तीन साल पीछे हो गए हैं।”
घर की तिजोरी में बंद पड़ा वृद्धि के लिए बन सकता है पावरफुल इंजन
नीलेश शाह ने कहा कि भारतीय घरों में बेकार पड़ा करीब 700 अरब डालर का सोना देश की वृद्धि के लिए एक पावरफुल इंजन बन सकता है। उन्होंने घरेलू सोने के मोनेटाइजेशन की तरफ और जोर देने की अपील की। शाह ने कहा कि सोने को तिजोरी में रखने की परंपरागत पसंद ने अनजाने में औपचारिक अर्थव्यवस्था के बाहर पड़ी हुई बहुत सारी कैपिटल को फंसा दिया है।
शाह ने बताया कि भारत हर साल लगभग 1,000 टन सोना आयात करता है, जिसमें से सिर्फ 300 टन ही ज्वेलरी के तौर पर निर्यात किया जाता है। इस तरह ज्यादातर सोना देश में ही जमा होता जाता है। अगर हम इसे औपचारिक अर्थव्यवस्था में ला सकें तो हमारे पास प्रतिभा, पूंजी और इन्फ्रास्ट्रक्चर का संगम होगा और आर्थिक वृद्धि अपने आप आ जाएगी। Indias economy
















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