BNP NEWS DESK। Government Banks भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की प्रमुख इकोनमी में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है। यह स्थिति आने वाले वर्षों में भी बने रहने की पूरी उम्मीद है। हालांकि 7-8 प्रतिशत या इससे तेज गति की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने के लिए देश में सरकारी बैंकों को और मजबूत बनाए जाने की जरूरत है।
यह बात देश के बैंकिंग, बीमा, गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र (एनबीएफसी) व अन्य वित्तीय क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बजट पूर्व बैठक में उठी। कुछ प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया है कि सरकारी क्षेत्र के बैंकों का एक बार फिर से विलय (मर्जर) करना चाहिए ताकि कुछ बैंकों के आकार को मजबूत किया जा सके। बता दें कि केंद्र सरकार इस तरह की मंशा पहले ही जता चुकी है।
Government Banks वित्त मंत्री की अध्यक्षता में हुई बजट पूर्व इस बैठक में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, भारत सरकार के प्रमुख आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन और वित्त मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा बैंकिंग, वित्तीय और बीमा सेक्टर (बीएफएसआइ) के कई दिग्गज प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में एनबीएफसी की स्थिति पर खासतौर पर चर्चा हुई है। सभी पक्षों का यह मानना है कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए इस सेक्टर की भूमिका अहम होगी।
इसके लिए नेशनल हाउसिंग बैंक (एनएचबी) की तरह ही एक नई व्यवस्था बनाए जाने की जरूरत बताई गई ताकि एनबीएफसी के लिए फंडिंग की जरूरत को पूरा किया जा सके। वित्त मंत्रालय ने आरबीआइ की मदद से पिछले एक वर्ष में एनबीएफसी की फंडिंग की जरूरत को पूरा करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं लेकिन उसे नाकाफी माना जा रहा है।
कुल कर्ज में एनबीएफसी का हिस्सा 22 प्रतिशत
दरअसल, एनबीएफसी को वित्त बैंक उपलब्ध कराते हैं और इसके बाद वह इसे दूसरे ग्राहकों के बीच वितरित करती हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 से वर्ष 2027 के बीच एनबीएफसी को कुल 10.2 लाख करोड़ रुपये की फंडिंग की जरूरत होगी।
वर्ष 2024-25 में देश में दिए गए कुल कर्ज में एनबीएफसी का हिस्सा 22 प्रतिशत था। छोटे और मझोले उद्योगों व उपभोक्ता वर्ग के कर्ज में इनकी हिस्सेदारी ज्यादा है।
कुछ एनबीएफसी के प्रतिनिधियों से सरकार ने यह भी आग्रह किया है कि उनके लिए भी प्रतिभूति कानून (सरफेसी) में कुछ बदलाव करना चाहिए ताकि कर्ज वसूली के लिए हर तरह के एनबीएफसी इस कानून का फायदा उठा सके। इस कानून के तहत वित्तीय संस्थान कर्ज नहीं चुकाने वाले ग्राहकों के खिलाफ कठोर कदम उठा सकते हैं। अभी इसके तहत एनबीएफसी के लिए 20 लाख रुपये कर्ज की सीमा तय है। इससे कम कर्ज वाले ग्राहकों के खिलाफ प्रतिभूति कानून इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। Government Banks
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा कर्ज बांटने के लिए बनाई जाए बेहतर व्यवस्था
बैठक में कुछ प्रतिनिधियों ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा कर्ज वितरित करने के लिए उचित व्यवस्था करने के साथ अर्द्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में बीमा और म्यूचुअल फंड के निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कदम उठाए जाने चाहिए।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को अपना लगातार नौवां बजट पेश करेंगी। उनके बजट में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और भारत से आयातित वस्तुओं पर अमेरिका के 50 प्रतिशत शुल्क की पृष्ठभूमि में वार्षिक लेखा-जोखा पेश करेंगी।
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में मांग बढ़ाने, रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था को आठ प्रतिशत से अधिक की निरंतर वृद्धि दर पर लाने के मुद्दों पर ध्यान दिए जाने की संभावना है। सरकार का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था 6.3-6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। Government Banks
















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