BNP NEWS DESK। kerosene केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के चलते एलपीजी आपूर्ति पर दबाव बढ़ने के बाद खाना पकाने के लिए वैकल्पिक ईंधन के रूप में केरोसिन की आपूर्ति तेज करने के लिए पेट्रोलियम सुरक्षा और लाइसेंसिंग नियमों में 60 दिन के लिए ढील दी है।
kerosene अब राशन की दुकानों के साथ-साथ जिले में दो चयनित पेट्रोल पंप पर भी केरोसिन मिलेगा यानी सरकारी तेल कंपनियां तय किए गए पेट्रोल पंपों पर केरोसिन रख सकेंगी और वितरित कर सकेंगी। इन पेट्रोल पंपों पर अधिकतम पांच हजार लीटर तक केरोसिन रखने की अनुमति दी गई है।
सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन भी आवंटित किया है। यह नियमित मासिक कोटे (लगभग एक लाख किलोलीटर) से अतिरिक्त है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि वे जिलों में वितरण के लिए स्थानों की पहचान करें और इसे मुख्य रूप से राशन दुकानों या निर्दिष्ट स्थानों पर बांटें। हालांकि राज्यों की तरफ से इस योजना को लेकर खास उत्साह नहीं दिख रहा है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अभी तक सिर्फ 17 राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों ने एसकेओ (सुपीरियर केरोसिन आयल) आवंटन के आदेश जारी किए हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख ने स्पष्ट रूप से बता दिया है कि उनके यहां केरोसिन की कोई आवश्यकता नहीं है। कई अन्य राज्य अभी भी आदेश जारी करने में हिचकिचा रहे हैं। kerosene
बहुत कम लोगों के पास केरोसिन पर चलने वाले स्टोव या चूल्हे
विशेषज्ञों और राज्य प्रशासन के सूत्रों के अनुसार सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि अब बहुत कम लोगों के पास केरोसिन पर चलने वाले स्टोव या चूल्हे बचे हैं। कई राज्यों जैसे राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश आदि में 2017 के आसपास ही पीडीएस के जरिए केरोसिन का वितरण बंद कर दिया गया था।
नतीजन, लोगों के पास केरोसिन इस्तेमाल का कोई साधन नहीं है। दूसरा, यह अतिरिक्त आवंटन काफी कम माना जा रहा है। तीसरा, केंद्र ने निर्देश दिया है कि हर जिले में सिर्फ दो स्थानों पर ही इसका वितरण हो। kerosene
राज्य प्रशासन का कहना है कि एक बार लोग बाजार से स्टोव खरीदकर केरोसिन इस्तेमाल शुरू कर दें तो बाद में अगर नियमित सप्लाई न मिली तो स्थिति और खराब हो सकती है। यह लोकप्रिय फैसला नहीं होगा। हिमाचल प्रदेश और लद्दाख ने स्पष्ट कह दिया है कि उन्हें केरोसिन की आवश्यकता नहीं है।
दरअसल, केंद्र सरकार पिछले एक दशक से केरोसिन को धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की नीति पर चल रही थी। स्वच्छ ईंधन (एलपीजी) को बढ़ावा देने और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटीके) योजना के तहत कई राज्यों को केरोसिन का कोटा सौंपने के बदले नकद प्रोत्साहन दिया गया। kerosene
नतीजा यह है कि 21 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अब पीडीएस केरोसिन मुक्त हो चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में पीडीएस के जरिए सिर्फ 10,60,524 किलोलीटर का केरोसिन आवंटन था। सबसे ज्यादा 66 प्रतिशत अकेले बंगाल को (7,04,016 किलोलीटर) मिला था। जबकि दस साल पहले (2015-16) यह आंकड़ा 86 लाख किलोलीटर के करीब था। अब नियमित मासिक कोटा भी करीब एक लाख किलोलीटर है, जो पहले के मुकाबले बहुत कम है।
पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि यह अतिरिक्त आवंटन अस्थायी है और पश्चिम एशिया संकट के चलते एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए किया गया है। लेकिन राज्य स्तर पर वितरण व्यवस्था, स्टोव की उपलब्धता और भविष्य की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के कारण योजना पर अमल में देरी हो रही है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि केरोसिन मुख्य रूप से राशन कार्डधारकों को खाना पकाने और रोशनी के लिए दिया जाएगा, लेकिन फिलहाल कई राज्यों में तैयारियां पूरी नहीं हो पाई हैं। kerosene
















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