BNP NEWS DESK। Indian Constitution भारतीय संविधान को छंदबद्ध कर इसे काव्य शैली में प्रस्तुत करने की अनूठी पहल हुई है। उसमें भी अनोखा यह कि भारत की 142 करोड़ जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए देश और विदेश में रहने वाले 142 रचनाकारों से छंद लिखवाए गए। 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू हुआ था, इसलिए 512 पृष्ठों के संकलन में कुल 26 तरह के छंदों का प्रयोग किया गया।
खास बात है कि संविधान के सभी कानूनी और विधिक पक्षों को उनके मूल रूप में रखते हुए काव्यात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, उसे मुक्तकंठ से गाकर भी सुनाया जा सकता है।
छंदबद्ध भारत का संविधान’ को गोल्डेन बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड के रूप में शामिल किया गया है। इसे 2024 में ही मान्यता मिल गई थी। समिति ने इसे फर्स्ट पोएट्री बुक आन कांस्टिट्यूशन आफ इंडिया शीर्षक से रिकार्ड की सूची में दर्ज किया है।
संविधान को समझ पाना आम आदमी के वश की बात नहीं
संविधान को समझ पाना आम आदमी के वश की बात नहीं। जबकि भारत की सामाजिक व्यवस्था हो, न्याय व्यवस्था, राजनीतिक और कार्यपालिका ही क्यों न हो। सभी के नियम कायदे संविधान पर आधारित हैं।
इसे जन-जन तक पहुंचाने की कल्पना तब हुई जब छत्तीसगढ़ के रामनाथ साहू ने कुछ साहित्यकारों, शिक्षकों, विधि विशेषज्ञों को जोड़कर महालय ग्रुप बनाया। 2022 में इसी ग्रुप पर संविधान को लेकर चर्चा हुई और विचारों की एक ज्योति जली कि संविधान को छंदबद्ध किया जाए।
‘छंदबद्ध भारत का संविधान’ बनाने को भारत, इंडोनेशिया, कुवैत, सिंगापुर और नेपाल के रचनाकार स्वयं को मिली जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए जुट गए। एक साल तक इसकी गहरी साहित्यिक प्रक्रिया चली और अंत में जून 2024 में पुस्तक तैयार हो गई।
इसे छत्तीसगढ़ के ओमप्रकाश साहू ‘मृदुल’ ने संपादित किया। जबकि पीडीए कालोनी नैनी (प्रयागराज) में रहने वाली डा. मधु शंखधर ‘स्वतंत्र’ तथा दिल्ली निवासी सपना दत्ता ने सह संपादन किया।
पूर्व मंत्री मीनाक्षी लेखी ने किया था विमोचन
पूर्व मंत्री मीनाक्षी लेखी ने ‘छंदबद्ध भारत का संविधान’ का विमोचन नई दिल्ली में जून 2024 में किया था। यह पुस्तक फिलहाल इंस्टा प्रकाशन की ओर से प्रकाशित है, कुछ मामूली त्रुटियों के चलते संशोधन करते हुए इसे पुन: प्रकाशन के लिए संपादक मंडल की ओर से भेजा गया है।
दोहा, रोला, सरसी, दिग्पाल जैसे छंदों का हुआ उपयोग
सहायक संपादक डा. मधु शंखधर सिद्धार्थनगर में एक प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका हैं। साहित्यिक रचनाओं में उनकी खासी रुचि है। महालय ग्रुप से जुड़ीं डा. मधु शंखधर बताती हैं कि संविधान के अनुच्छेद को दोहा, रोला आदि छंदों में रचा गया है। संविधान संशोधन को चौपाइयों में, सरसी, दिग्पाल, सार, लावणी, मधुमालती और माधव मालती आदि 26 छंदों का प्रयोग रचनाकारों ने किया है। 142 रचनाकारों को इसके लिए अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी। Indian Constitution
















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