BNP NEWS DESK । Glacial Lakes जलवायु परिवर्तन का सीधा असर उच्च हिमालयी क्षेत्रों पर भी नजर आ रहा है। यहां तक कि जिन ग्लेशियर क्षेत्रों में मानव की आवाजाही बेहद सीमित है, वहां भी अब मौसम का मिजाज खतरे की घंटी बजा रहा है। ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं और ग्लेशियर झीलें अपना आकार बढ़ा रही हैं।
130 ऐसी झीलें चिह्नित की गई हैं, जो क्षमता से अधिक आकार बढ़ने पर बेहद खतरनाक हो सकती हैं। ये झीलें कभी भी बम की तरह फट सकती हैं। ऐसे में आबादी वाले निचले क्षेत्रों में तबाही का खतरा भी बढ़ गया है। ग्लेशियर झीलों के अनियंत्रित ढंग से आकार बढ़ाने की यह हकीकत इसरो के सेटेलाइट अध्ययन में सामने आने के बाद विज्ञानियों की चिंता बढ़ गई है।
Glacial Lakes हिंदुकुश क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन पर काम कर रहे वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के पूर्व वरिष्ठ विज्ञानी डा पीएस नेगी ने बताया कि इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। रिपोर्ट साफ बताती है कि वर्ष 1984 से 2023 तक किए गए सेटेलाइट अध्ययन के अनुसार 2431 बड़ी झीलें चिह्नित की गई हैं।
जिनका आकार 10 हेक्टेयर से अधिक है। इनमें से 676 झीलों के अपना आकार 27 प्रतिशत से अधिक बढ़ाया है। इसमें 130 सर्वाधिक संवेदनशील हैं।
छोटी झीलों को मिलाकर संख्या आठ हजार
इसरो ने बड़ी झीलों पर अध्ययन किया है, लेकिन विभिन्न संस्थानों के विज्ञानियों की स्टडी के अनुसार हिमालय में छोटी-बड़ी सभी तरह की झीलों की संख्या आठ हजार से अधिक है। वहीं, वर्ष 1990 के बाद कम से कम 1000 नई ग्लेशियर झीलें अस्तित्व में आई हैं।
हिंदुकुश क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कार्यों से जुड़े वरिष्ठ विज्ञानी डा पीएस नेगी के अनुसार गर्मियों में यदि कम बर्फ गिरी तो ग्लेशियर झीलों का आकार बढ़ने के साथ ही इनके फटने का खतरा भी बढ़ गया है। लिहाजा, इनकी निरंतर निगरानी आवश्यक है। Glacial Lakes
हाई रिस्क वाली 130 झीलें
सिंधु बेसिन, 65
ब्रह्मपुत्र बेसिन, 58
गंगा बेसिन, 07
ग्लेशियर झीलों से जुड़े अहम तथ्य
हिमाचल प्रदेश की गेफांग घाट झील का आकार सर्वाधिक 178 प्रतिशत बढ़ा। इसका कुल आकार 101.3 हेक्टेयर पाया गया। हिमालयी क्षेत्र में 10 लाख लोग ग्लेशियर झीलों के 10 किमी के दायरे में रहते हैं। Glacial Lakes
















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