सिम बाइंडिंग से बढ़ेगी सुरक्षा, ग्राहकों पर असर नहीं: सीओएआइ

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BNP NEWS DESK। sim Binding केंद्र सरकार ने एप आधारित मैसेजिंग और कालिंग सेवाओं (जैसे वाट्सएप और टेलिग्राम, सिग्नल आदि) को भारतीय सिम से बाइंड (संबद्ध) करने की अनिवार्यता लागू कर दी है। सरकार का तर्क है कि इससे साइबर फ्राड रोकने में मदद मिलेगी। हालांकि, इस बारे में इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर यह बात फैलाई जा रही है कि इससे आम ग्राहकों की निजता भंग होगी।

sim Binding  इस पर मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियों के संगठन सेलुलर आपरेटर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (सीओएआइ) ने इस तरह की बातों को अफवाह बताया है और सिम बाइंडिंग को राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के हित में जरूरी कदम बताया है।

सभी एप आधारित मैसेजिंग सिस्टम को सिम के साथ संबद्ध

बुधवार को सीओएआइ ने इस बारे में विस्तृत सूचना जारी कर निर्धारित अवधि 26 फरवरी, 2026 तक सभी एप आधारित मैसेजिंग सिस्टम को सिम के साथ संबद्ध करने को कहा है। सीओएआइ ने मोबाइल कंपनियों की तरफ से यह भी दावा किया है कि सिम बाइंडिंग से विदेश यात्रा करने वालों को कोई परेशानी नहीं होगी।

जिस तरह यूपीआइ, बैंकिंग एप और पेमेंट वालेट में सिम उसी डिवाइस में एक्टिव रहना जरूरी है, ठीक उसी माडल का यहां लागू किया जा रहा है। विदेश में रहने वाला भारतीय नागरिक वाई-फाई या विदेशी सिम से एप इस्तेमाल करता रहेगा, बस उसका भारतीय सिम सेकंडरी स्लाट में होना चाहिए। sim Binding

सिंगल-सिम फोन वालों के लिए यह जानबूझकर रखी गई सुरक्षा व्यवस्था है ताकि देश के बाहर से फर्जी अकाउंट बनाकर धोखाधड़ी, स्पैल काल और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियां नहीं की जा सकें। सीओएआइ ने यह भी कहा है कि विदेश से कोई व्यक्ति भारतीय नंबर पर मैसेज या काल कर सकेगा, लेकिन प्राप्तकर्ता का अकाउंट भारतीय सिम से बंधा रहेगा।

 

इससे भारतीय यूजर की सुरक्षा बढ़ेगी, जबकि भेजने वाले पर उसके देश के नियम लागू होंगे। समय-समय पर री-आथेंटिकेशन (हर 6 घंटे में लागआउट) की बात पर सीओएआइ ने कहा कि बैंकिंग, डिजिलाकर, आधार और वीपीएन जैसे संवेदनशील प्लेटफार्म में इससे कहीं सख्त नियम पहले से हैं। फोन में ‘क्रिप्टोग्राफिक’ होने से आटो लागिन रहता है। sim Binding

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Author: BNPNEWS

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