नौ माह बनारस के गलियों में भी रहें क्रांतिकारी रासबिहारी बोस

SHARE:

Rashbehari Bose

BNP NEWS DESK।  Rashbehari Bose वाराणसी में महान क्रांतिकारी रासबिहारी बोस की 139 वीं जयंती देवनाथपुरा स्थित पंडित नीलकंठ शास्त्री सभागार में आयोजित हुई। जिसका आयोजन ‘रासबिहारी बोस विचार व प्रचार मंच’, वाराणसी के तत्वावधान में हुआ। जिसमें वक्ताओं ने कहा—रासबिहारी बोस ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सन 1915 में ही सम्पूर्ण देश व्यापी एक साथ सशस्त्र विद्रोह करना चाहते थे, ब्रिटिश वायसराय लार्ड हार्डिग्सं पर दिल्ली में चाँदनी चौक पर जो बम फेंका गया था उसका नेतृत्व रासबिहारी बोस ही किये थे। भूमिगत होने की कलां के वे माहिर थे।

Rashbehari Bose करीब नौ माह बनारस के गलियों में भी रहें और जब चारों ओर पिंगले से लेकर शचीन्द्रनाथ सान्याल तक सभी की घटनाएं तत्कालीन रासबिहारी बोस के नेतृत्व में ही हो रहा था। तमाम उनके सहयोगी देश मातृका की बन्धन मुक्ति के लिए फाँसी के फंदे चुम रहे थे। और ब्रिटिश हुकूमत द्वारा उनके ऊपर लाखों रूपयों कि इनाम रखे हुए थे। फिर भी अंग्रेजो की आँखों में धूल झोंककर जापान चले गये ओर वहा इण्डियन इण्डिपेडेंस लीग का गठन किए।

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को नेतृत्व सौंपे। वे दक्षिण पूर्वी एशियाके हिन्दू महासभा के अध्यक्ष भी रहें। उन्हें जापान की सरकार द्वारा वहां के सर्वोच्च सम्मान ‘सेकेण्ड आर्डर आफ द मैरिट आफ द राईसिंग सन’ पुरस्कार से भी नवाजे गये। परन्तु आज तक भारत सरकार द्वारा कोई सम्मान नहीं प्रदान किया गया।

इस गोष्ठी में महान क्रांतिकारी रासबिहारी बोस जी को भारत रत्न दिये जाने की मांग भी उठाई गई। गोष्ठी में सर्व श्री तपोती कु. लाहिड़ी, प्रो. सुब्रत भट्टाचार्य, सौरभ चक्रवर्ती, आवेश बनर्जी, संजय अधिकारी, श्रीमती तपोती मित्रा, सुश्री सोनिया कपुर, सजल चक्रवर्ती, डा. समीर भट्टाचार्य, हनुमान प्रसाद, विश्वजीत शास्त्री थे।अध्यक्षता डा. आनन्द प्रकाश तिवारी तथा संचालन मंच के संयोजक संजय भट्टाचार्य ने किया।

BNPNEWS
Author: BNPNEWS

[ays_poll id=1]
सबसे ज्यादा पढ़ी गई

Horoscope

Weather