BNP NEWS DESK। Washroom in Gyanvapi ज्ञानवापी स्थित मां श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की मांग समेत सात मुकदमों की सुनवाई शुक्रवार को जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत में हुई। जिला जज ने अदालत में उपस्थित सभी पक्षों से मुकदमे की पत्रावलियों व लंबित प्रार्थना पत्रों के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही ज्ञानवापी के मुकदमों सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने के वकील विष्णु शंकर जैन की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र की वस्तु स्थिति के बारे में भी जाना।
ज्ञानवापी के तालाब वजूखाना को सील करने में लगे ताले पर लगे कपड़े को बदलने की मांग के लंबित प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करने की अपील मुकदमे की वादी चार महिलाओं के वकील सुधीर त्रिपाठी, सुभाष नंदन चतुर्वेदी, दीपक सिंह ने की।
Washroom in Gyanvapi अदालत में मौजूद अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद की ओर से वकील एखलाक अहमद, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील तौहीद खान ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। दलील दिया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही तालाब को सील किया गया है। शासन की ओर से नियुक्त विशेष वकील राजेश मिश्र ने अदालत को बताया कि ज्ञानवापी की संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर ताले पर लगा सीलबंद कपड़ा बदलना जरूरी है। इस पर अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश व सभी पक्षों को विचारों को जानने के बाद आम सहमति बनाने की बात कही। इस मामले में सुनवाई के लिए अगली तिथि 29 अक्टूबर की तिथि तय की है।
16 मई 2022 को किया थ सील
एडवोकेट कमिश्नर की कार्रवाई के दौरान 16 मई 2022 में सिविल जज (सीनियर डिविजन) के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की पुष्टि के बाद ज्ञानवापी परिसर के तालाब को सीलबंद करने के लिए ताला लगाने के बाद उस पर कपड़ा लपेटकर सीलबंद किया गया था।
बीते आठ अगस्त को राज्य सरकार की ओर से नियुक्त विशेष वकील राजेश मिश्रा ने तालाब को शील करने में लगे कपड़े के नष्ट होने के कारण बदलकर नए कपड़े से पुनःशील करने का प्रार्थना पत्र पर दिया है। इस पर अंजुमन इंतेजामिया मसाजित ने आपत्ति की है। वहीं, वकील अनुष्का तिवारी ने उनकी ओर से दाखिल ज्ञानवापी से संबंधित प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की मांग करते अपना पक्ष रखा।
वहीं, ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ करने का अधिकार देने को लेकर स्वयंभू विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग की ओर से पं. सोमनाथ व्यास, डा. रामरंग शर्मा व पं. हरिहर नाथ पांडेय द्वारा 1991 में दाखिल मुकदमे में पक्षकार बनने की मांग की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के लिए अदालत ने एक नवंबर की तिथि तय की है। पुनरीक्षण याचिका पं. हरिहर नाथ पांडेय की बेटियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा व रेणु पांडेय के वकील आशीष कुमार श्रीवास्तव ने दाखिल की है।
















Discussion about this post