BNP NEWS DESK। Morari Bapu भारत को आध्यात्मिक, दार्शनिक और सनातनी रूप से एक सूत्र में पिरोने वाले 12 ज्योतिर्लिंगों पर करीब 2 वर्ष पूर्व राम कथा करने वाले राम कथा वक्ता मोरारी बापू 25 अक्टूबर से 4 नवंबर तक एक और विशेष राम कथा करने जा रहे हैं।
Morari Bapu राम यात्रा पथ यानी वो मार्ग जिस पर चलकर भगवान राम 14 वर्ष का वनवास मिलने पर अयोध्या से चल कर वनों तक पहुंचे और मां सीता का हरण होने के बाद उन्हें ढूंढते हुए श्रीलंका तक गए। चित्रकूट, मध्य प्रदेश से श्रीलंका और वापसी में अयोध्या तक के 9 महत्वपूर्ण स्थानों पर होने वाली ये राम कथा प्रत्येक दिन नए स्थान पर होगी। इन स्थानों में ऐतिहासिक और पौराणिक रूप से महत्वपूर्ण अत्रि मुनि आश्रम, चित्रकूट… अगस्तय मुनि आश्रम, सतना, मध्य प्रदेश… पंचवटी, महाराष्ट्र.. शबरी आश्रम, सुरिबाना, कर्नाटक… ऋषिमुख पर्वत, हम्पी, कर्नाटक… प्रवर्शण पर्वत, कर्नाटक… रामेश्वरम, तमिलनाडु और कोलंबो, श्रीलंका शामिल हैं।
भगवान राम अत्रि मुनि के आश्रम और अगस्तय मुनि के आश्रम होते हुए पंचवटी पहुंचे
14 वर्ष के वनवास के लिए अयोध्या से निकलने के बाद भगवान राम अत्रि मुनि के आश्रम और अगस्तय मुनि के आश्रम होते हुए पंचवटी पहुंचे थे। जहां वनवास का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने व्यतीत किया था। वहाँ से मां सीता का हरण होने के बाद उनकी खोज में भगवान राम शबरी आश्रम, ऋषिमुख पर्वत, प्रवर्शण पर्वत होते हुए रामेश्वरम पहुंचे थे और वहां से श्रीलंका पर चढ़ाई की गई थी। Morari Bapu
मोरारी बापू की राम कथा से देश दुनिया के लाखों करोड़ों लोग एक बार फिर से विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे
मोरारी बापू की राम कथा से इन सभी ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व के तीर्थों के बारे में देश दुनिया के लाखों करोड़ों लोग एक बार फिर से विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे जो की सनातनी प्रचार-प्रसार और भाव-प्रभाव के लिए इस समय बहुत ही महत्वपूर्ण प्रतीत हो रहा है।
बापू अकसर कहते हैं कि कथा कब और किस स्थान पर होगी, ये अस्तित्व तय करता है। हां, उसके लिए वो किसी न किसी को निमित्र अवश्य बनाता है। इस कथा के आयोजन में निमित्त मात्र बने हैं मिराज ग्रुप के मदन पालीवाल और रुपेश व्यास। इस तरह के आयोजन के लिए भक्ति भाव और फंड्स के साथ-साथ एक अलग तरह के जुनून की भी आवश्यकता होती है।
राम यात्रा पथ के प्रत्येक नए स्थान पर समय से पहुंचा जा सके और सुबह 10:00 बजे से कथा शुरू हो सके, इसके लिए एक विशेष ट्रेन की व्यवस्था की गई है।
12 ज्योतिर्लिंग की राम कथा के दौरान 1008 श्रद्धालुओं के लिए दो स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था की गई थी। राम यात्रा पथ पर होने वाली इस विशेष राम कथा में प्रतिदिन शामिल होने के लिए लगभग साढ़े तीन सौ श्रद्धालुओं के लिए एक स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था की गई है। Morari Bapu
26 अक्टूबर को अगस्त मुनि आश्रम में कथा होगी
24 अक्टूबर की शाम 8:00 बजे दिल्ली के सफदरजंग स्टेशन से ये स्पेशल ट्रेन चलेगी और अगले दिन सुबह चित्रकूट, मध्य प्रदेश पहुंचेगी। पहले दिन की कथा बाबू अपराह्न 4:00 बजे से लगभग 7:00 बजे तक करते हैं। उसके बाद ये ट्रेन सतना, मध्य प्रदेश पहुंचेगी जहां 26 अक्टूबर को अगस्त मुनि आश्रम में कथा होगी। 27 अक्टूबर को पंचवटी, महाराष्ट्र, 28 को शबरी आश्रम, कर्नाटक, 29 को ऋषिमुख पर्वत, हम्पी, करनाटक और 30 अक्टूबर को प्रवरशण पर्वत, कर्नाटक कथा होगी।
1 नवंबर को रामेश्वर के बाद 3 नवंबर को कोलंबो श्रीलंका में कथा होगी और 4 नवंबर को अयोध्या में कथा विराम लेगी। उसके बाद स्पेशल ट्रेन अयोध्या से चलकर अगले दिन सुबह 8:00 बजे दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन पर सभी श्रद्धालुओं को उतारेगी। स्पेशल ट्रेन के लगभग 350 श्रोताओं के अलावा प्रत्येक स्थान पर आसपास के हजारों श्रोता कथा श्रवण का लाभ ले सकेंगे।
मोरारी बापू की सभी कथाओं में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं
हजार लोगों के अनुसार ही विशाल पंडाल आदि व्यवस्थाएं की जा रही हैं। वैसे भी मोरारी बापू की सभी कथाओं में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई बार तो ये संख्या लाखों में पहुंच जाती है। मोरारी बापू जो राम कथा कहते हैं, उसकी एक बड़ी विशेषता ये है कि रामचरितमानस के तमाम घटनाक्रमों को तो वो बताते ही हैं, साथ ही उसकी तात्विक और सात्विक व्याख्या भी करते रहते हैं। अक्सर बापू व्यास पीठ से ऐसी बातें भी बोल देते हैं जो पहले कभी ना सुनी गई हों।
हाल ही में बापू की कथा की एक क्लिप मैंने सुनी है। दान को लेकर हमारे शास्त्रों में बहुत सी बातें की गई हैं। धन के दान के साथ-साथ विद्या का दान या जो भी कला हममें है, उसका दान भी करना चाहिए, ये सब बातें कहीं जाती हैं लेकिन इस वीडियो मैं मैंने सुना कि बापू ने अपने नसीब के दान की अदभुत बात की है। यानी जो बहुत खुशनसीब हैं, उन्हें दूसरों लोगों को अपनी खुशनसीबी का अंश दान करना चाहिए।
सनातन धर्म और परंपराओं को मानने के वालों के लिए सर्वाधिक पूजनीय चार धाम
भारतवर्ष को अखंड और अक्षुण्ण रखने के लिए आध्यात्मिक जगत की विभूतियों ने समय-समय पर बड़े-बड़े प्रयास किए हैं। जिस समय ये प्रयास हो रहे होते हैं, भले ही उस समय उनका प्रभाव और उनका महत्व बहुत ज्यादा समझ में ना आता हो लेकिन शनै शनै हम महसूस करने लगते हैं कि वो प्रयास कितने महत्वपूर्ण थे। जगदगुरु आदि शंकराचार्य ने उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में चार पीठों की स्थापना कर भारत को अखंड रखा।
ये पीठ सनातन धर्म और परंपराओं को मानने के वालों के लिए सर्वाधिक पूजनीय चार धाम हैं जिन्हें हम केदारनाथ, रामेश्वरम, द्वारिका और जगन्नाथ पुरी के नाम से जानते हैं। कुछ ऐसे ही भौगोलिक रूप से देखें तो 12 ज्योतिर्लिंग भी भारत को आध्यात्मिक, दार्शनिक और सनातनी रूप से एक सूत्र में पिरोये रखने का अहम कार्य कर रहे हैं। इन सभी 12 ज्योतिर्लिंग पर मोरारी बापू राम कथा कर चुके हैं।
आज के समय में ईर्ष्या, निंदा और द्वेष से मुक्त हो जाना ही मोक्ष
हमारे ग्रंथो में मोक्ष का जिक्र किया गया है। लगभग प्रत्येक व्यक्ति मोक्ष के बारे में जानना चाहता है। 12 ज्योतिर्लिंग कथा के दौरान केदारनाथ में बापू ने मोक्ष संबंधी सवाल का जो जवाब दिया, वो हम सबके लिए बहुत उपयोगी है। बापू कहते हैं कि आज के समय में ईर्ष्या, निंदा और द्वेष से मुक्त हो जाना ही मोक्ष है। आज के दौर में हम देख रहे हैं कि एक दूसरे से ईर्ष्या, द्वेष और निंदा पहले की अपेक्षा बहुत बढ़ गए हैं। इनसे मुक्ति पाकर हम भी मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं, ऐसा मोरारी बापू मानते हैं। Morari Bapu
भगवान श्री राम ने लंका पर चढ़ाई के लिए यहीं से सेतु का निर्माण शुरू किया था
25 अक्टूबर से 4 नवंबर तक की राम यात्रा पथ पर मोरारी बापू की राम कथा का प्रत्येक पड़ाव बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसमें रामेश्वरम ऐसा स्थान है जहां मैं पहले भी कई बार जा चुका हूं। तीन बार तो बापू की राम कथा में एक श्रोता के रूप में शामिल होने का अक्सर मुझे मिला है। लंका पर चढ़ाई से पूर्व भगवान राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना कर पूजा अर्चना की थी। रामेश्वरम से आगे धनुष्कोटी है। भगवान श्री राम ने लंका पर चढ़ाई के लिए यहीं से सेतु का निर्माण शुरू किया था।
मोरारी बापू अपनी कथाओं में सेतुबंध का प्रसंग आने पर अकसर आज के समय में सभी विचारधाराओं के बीच, सभी व्यक्तियों और समूहों के बीच सेतु बनाए जाने की आवश्यकता पर जोर देते हैं, इसलिए भी ये स्थान मुझे बहुत महत्वपूर्ण दिखाई देता है। 12 ज्योतिर्लिंग की राम कथा के दौरान बाबू से एक सवाल इस विषय में भी किया गया था। बापू से पूछा गया था कि आप जिस सेतुबंध और एकता की बात कर रहे हैं, क्या इसके लिए सब लोग तैयार हैं, इस प्रश्न के जवाब में बापू ने कहा था कि … “तैयार होना ही पड़ेगा।”
दूर से या ऊपर से देखने पर शिवलिंग जैसा प्रतीत होता है
रामचरितमानस और रामायण के प्रसंगों में जिन स्थानों को बचपन से सुनते आ रहे हैं, उन्हें रूबरू अपनी आंखों से देखना एक अलग तरह का आनंद प्रदान करता है। ग्रंथों में दिए गए सभी स्थान महत्वपूर्ण हैं लेकिन धनुष्कोटी का स्थान और ज्यादा महत्व का इसलिए हो जाता है क्योंकि इस की भौगोलिक स्थिति आज भी वैसी ही दिखाई देती है जैसे कि ग्रंथों में बताई गई है। दोनों तरफ समुद्र के बीच से गुजरती कई किलोमीटर लंबी सड़क का जब आखिरी सिरा आ जाता है तो उसको इस तरह चौड़ाई दी गई है कि दूर से या ऊपर से देखने पर शिवलिंग जैसा प्रतीत होता है। दूर-दूर तक यहां आबादी के दर्शन नहीं होते। Morari Bapu
धनुष्कोटी से लेकर श्रीलंका के तलेमन्नार इलाके तक समुद्र के नीचे पुल के अवशेष मौजूद
यहां से श्रीलंका की दूरी महज 18 किलोमीटर है। यूपीए सरकार के दौरान तो रामसेतु के अवशेषों को भी तोड़ने के लिए सेतु और राम, दोनों को काल्पनिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दे दिया गया था। नासा ने पुष्टि की है कि धनुष्कोटी से लेकर श्रीलंका के तलेमन्नार इलाके तक समुद्र के नीचे पुल के अवशेष मौजूद हैं और सबसे बड़ी बात ये है कि ये पुल मानव निर्मित है। अभी भी भारत और श्रीलंका के बीच कई स्थानों पर द्वीपों के रूप में समुद्र के ऊपर सेतु आ जाता है। रामायण काल का ये सेतु संदेश दे रहा है कि जहां भी जरूरी हो सेतु अवश्य बनाना चाहिए। तभी सत्य, शक्ति और भक्ति रूपी सीता का मिलना संभव है। तभी बुराइयों के प्रतीक रावण का संहार मुमकिन है।
समुद्र के ऊपर सेतु कैसे बना होगा
धनुष्कोटी की तस्वीर से भी आप अंदाजा लगा सकते हैं कि समुद्र के ऊपर सेतु कैसे बना होगा। भारत और श्रीलंका के बीच समुद्र के बीच ऐसे 12 द्वीप लंबाई में नजर आते हैं। इन्हें जोड़ दिया जाए तो भारत श्रीलंका के बीच रामायण कालीन सेतु आज भी बन सकता है। धनुष्कोटी के इस अंतिम सिरे पर ही कुछ वर्ष पूर्व मोरारी बापू की रामकथा हुई थी। बापू ने व्यासपीठ से निवेदन भी किया था कि भारत और श्रीलंका के बीच ये सेतु किसी तरह से बना दिया जाए तो दोनों देशों के लोग रामायण कालीन स्थलों के दर्शन के लिए एक दूसरे की तरफ आ जा सकेंगे। दोनों देशों के बीच इस तरह का सेतु तो फिलहाल नहीं बना है लेकिन बापू की ये विशेष राम कथा एक तरह से सेतु का ही काम करेगी।
बापू की दृष्टि में ये सनातन की वैदिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वास्तविक यात्रा है। वास्तविकता को केंद्र में रखते हुए सात्विक, तात्विक और परमार्थिक अर्थ खोजने की चेष्टा की जाएगी। Morari Bapu
















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