BNP NEWS DESK। Arya Mahila PG College आर्य महिला पीजी कॉलेज के संस्कृतविभाग एवं विश्वमांग्ल्य छात्र सभा, काशी प्रान्त के संयुक्त तत्त्वावधान में “नवयुवतियों का सर्वांगीण विकास : परिवार, समाज और राष्ट्र के सन्दर्भ में” विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन प्राचार्या प्रो. रचना दूबे के संरक्षकत्व में किया गया।
कार्यक्रम में सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. अलका दूबे ने कहा कि नवयुवतियों से ही परिवार, समाज और राष्ट्र का निर्माण होता है इसलिए नवयुवतियों को आत्मकेन्द्रित रहने की आवश्यकता है। जब हम अपनी आत्मशक्ति एवं आत्मा ऊर्जा से प्रेरित रहते हुए अपनी सभ्यता संस्कृति एवं समाज पर गर्वित रहते हैं तब हमारा जन्मभूमि एवं राष्ट्र हमें स्वयं ही वरण करता है।

Arya Mahila PG College अध्यक्षीय उद्बोधन क्रम में संस्कृतविभाग काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की पूर्व अध्यक्षा प्रो० मनुलता शर्मा ने कहा कि जब हम नवयुवतियों के सर्वांगीण विकास की बात करते हैं तो इस सर्वांगीण में युवा अवस्था के बहुत सारे आयाम है। इसका प्रथम बिन्दु है शारीरिक विकास।
शरीर ही सभी धर्मों के साध्य का प्रथम सोपान
कालिदास ने भी कहा है कि शरीर ही सभी धर्मों के साध्य का प्रथम सोपान है। आज के युवा शरीर की स्वस्थ्यता के बारे में थोड़ा कम सोचते हैं, किन्तु शरीर के समुन्नत विकास के लिए योगाभ्यास, अच्छा खान-पान अति-आवश्यक है।
नवयुवतियों के विकास के लिए दूसरा सोपान है शैक्षिक विकास। इसमें भी सबसे जरूरी है मानसिक विकास। आज हम सब अनेक डिग्रियां बटोरने में लगे हैं किन्तु क्या इन डिग्रियों से मानसिक विकास और उन्नति हुई या नहीं यह समझना बहुत जरूरी है।

क्योंकि हमें उन्नत होने के लिए समसामयिक होना होगा और साथ ही यह भी जानना होना की विश्व में क्या घटित हो रहा है, हमारे समाज व राष्ट्र में क्या घटित हो रहा है, हमें, हमारे परिवार, समाज आदि को क्या चीजें प्रभावित कर रही हैं, कहीं राजनीति हमारे देश को खोखला तो नहीं कर रही है। इन सभी का हमारे देश पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, इसके लिए आप सभी युवाओं का सजग रहना बहुत जरूरी है। Arya Mahila PG College
भारतीय संस्कृति और सभ्यताओं से नवयुवतियों को परिचित कराया
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रुति देशपाण्डेय ने भारत माता के उद्घोष के साथ अपने वक्तव्य का प्रारम्भ करके युवाओं से सम्वाद करना प्रारम्भ किया। युवाओं को भारत के सभ्यता एवं संस्कृति से परिचय कराया। साथ ही अमेरिका, जपान, चीन आदि देशों की विशेषताओं को बताया तथा भारतीय संस्कृति और सभ्यताओं को नवयुवतियों से परिचित कराया ।
चैट जीपीटी तथा AI के इस दौर में 75 साल बाद भारत की क्या स्थिति होगी ऐसी जिज्ञासा उत्पन्न की तथा एक लघु कहानी के माध्यम से भारतीय संस्कृति से सम्बन्ध स्थापित किया। जिसका तात्पर्य यह है कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में युवा आत्मप्रशंसा के लिए अपने मूल्यों तथा संस्कारों का हनन करता जा रहा है।
पड़ोसी देशों की वर्तमान स्थिति से भी अवगत कराया। इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्वीटर आदि से सम्बन्धित विषयों के उपयोग तथा दुरुपयोग के बारे में भी बताया। युवतियों को भारत एवं भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूक करते हुए परिवार, समाज एवं राष्ट्र के प्रति उनके अधिकारों दायित्वों एवं कर्तव्यों का बोध कराया। भारतीय संस्कृति के प्रति जो झिझक है उसको दूर करने हेतु विभिन्न उपायों को बताया तथा राष्ट्र के प्रति आत्मविश्लेषण हेतु प्रेरित किया। Arya Mahila PG College
नारी सशक्तिकरण
नारी सशक्तिकरण के बारे में बताते हुए आहिल्याबाई होल्कर, रानी लक्ष्मीबाई आदि के कार्यों- प्रशासन, राजनीतिक, औद्योगिक, धार्मिक एवं आर्थिक पक्षों को बताते हुए अन्य गतिविधियों से परिचित कराया।
हम देखते कुछ और हैं और मन में चल कुछ और रहा होता है
इस कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि प्रो० चन्द्रकान्ता राय ने कहा कि आज का यह विषय अति महत्त्वपूर्ण इसलिए है कि यह जो यौवनावस्था है उसे कालिदास ने ‘प्रमादावस्था’ कहा है।
इसमें मद इतना बढ़ जाता है कि कुछ देखते हुए भी दिखाई नहीं देता, सुनते हुए भी सुनाई नहीं देता। हम देखते कुछ और हैं और मन में चल कुछ और रहा होता है ।
यहाँ विद्यार्थियों, नवयुवतियों को सचेत और सावधान रहना अति आवश्यक है। नवयुवतियों की भूमिका जन्म से ही आरम्भ हो जाती है। संतान यदि कन्या हो तो अपने छोटे भाई बहनों को संस्कारित करने की जिम्मेदारी उसी के ऊपर आ जाती है। Arya Mahila PG College

अब एआई का समय है, बौद्धिक कृत्रिमता का समय है जो अनिश्चितता से भरा हुआ है। इसकी परख करने के लिए भी अपनी बौद्धिकता को तरासने की आवश्यकता है और इसके लिए शास्त्र रूपी ज्ञान सम्पदा की आवश्यकता है। वेद की मंत्रद्रष्टा ऋषिकाएं भी हैं।
वाक् सूक्त में जिन्होंने बताया है कि मैं सम्पूर्ण राष्ट्र की शक्ति हूँ। जहाँ भी राष्ट्र की बात आती है वहां महिलाओं में जैसे- शिवा जी की धायी, अहिल्या बाई होलकर,रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती आदि ने अपने को देश के लिए समर्पित कर दिया।
वन्देमातरम् गान के साथ कार्यक्रम का समापन
विभाग की अध्यक्षा प्रोफेसर जया मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रस्तावना प्रस्तुत की, संचालन डॉ. ऋतु कयाल ने, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पुष्पा त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम के संयोजन में डॉ. नागमणि त्रिपाठी, डॉ. अरिमा त्रिपाठी, डॉ. शिवांगी मिश्रा का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम में प्राध्यापक-प्राध्यापिकाओं सहित स्नातक एवं स्नातकोत्तर की लगभग 300 छात्राओं की उपस्थिति रही। संस्कृतविभाग की छात्राओं द्वारा वन्देमातरम् गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
















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