BNP NEWS DESK़। CBI पूर्वोत्तर रेल के बनारस रेल मंडल मुख्यालय (डीआरएम आफिस) में वरिष्ठ मंडल सामग्री प्रबंधक (सीनियर डीएमएम) नितेश अग्रवाल के आवास और दफ्तर में गुरुवार देर शाम सीबीआई की टीम धमक पड़ी। आवास पर परिवारीजन तो दफ्तर में कर्मचारियों से पूछताछ की बात सामने आई है। सीबीआई की छापेमारी क्यों हुई, इस बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है।
वरिष्ठ मंडल सामग्री प्रबंधक का परिवार बीएलडब्ल्यू में रहता है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई टीम पहले उनके आवास पर पहुंची। वहां जांच-पड़ताल के बाद देर शाम डीआरएम कार्यालय स्थित उनके आफिस पहुंची। शाम छह बजे डीआरएम आफिस बंद हो जाने के कारण सीनियर डीएमएम समेत कुछ कर्मचारी ही बचे थे जिनसे पूछताछ की गई।
रेल मंडल में वरिष्ठ सामग्री प्रबंधक की जिम्मेदारी रेलवे के विभिन्न विभागों के लिए आवश्यक सामान की उपलब्धता सुनिश्चित कराना होता है। ऐसे में कयास लगाया जा रहा कि खरीद-फरोख्त से जुड़ी किसी गड़बड़ी की पुख्ता सूचना पर ही केंद्रीय जांच ब्यूरो की टीम धमकी होगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से रेलवे सुरक्षा बल के जवानों को जरूर मौके पर बुलाया गया था।
रेल अधिकारी के परिजन अधिकारियों की पूछताछ से परेशान हुए तो विभाग के कुछ कर्मचारियों को बुला लिया, जहां पहुंचने पर उन्हें भी सीबीआइ टीम ने रोक लिया। छापेमारी के बारे में डीआरएम आशीष जैन से बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन उनसे किसी कारणवश संपर्क नहीं हो सका।
सिलसिलेवार पड़ रहे छापे, फिर भी ढिठाई दिखा रहे
वर्ष 2024 के अक्टूबर माह में सीबीआइ ने इंजीनियरिंग विभाग में तैनात तत्कालीन वरिष्ठ मंडल अभियंता सत्यम कुमार सिंह को गिरफ्तार कर दो लाख रुपये बरामद किए थे। पुख्ता सूचना पर पहुंची सीबीआइ टीम ने दिन में ही सत्यम के चैंबर में पहुंच कर आपरेशन को अंजाम दिया था। आपरेशन में कोई बाधा न आए, इसलिए छापामार दल ने लंच का समय चुना था। कार्रवाई महेंद्र सिंह नामक ठेकेदार की शिकायत पर हुई थी।
उसके बाद 16 जुलाई 2026 को गतिशक्ति योजना में बनारस रेल मंडल के सीनियर डीइएन कोआर्डिनेशन राकेश रंजन, एसएसई अभिषेक गुप्ता व तीन रेल कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत छह धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
लखनऊ से आए सीबीआई लखनऊ इकाई की एंटी करप्शन टीम ने राकेश रंजन को उनके सरकारी आवास (बंगला नंबर तीन) में रात नौ बजे नजरबंद कर पांच घंटे (रात दो बजे तक) तो मंगलवार को चार अन्य से दिन में डीआरएम कार्यालय में पूछताछ की।
वर्ष 2026 में ही नार्दन रेलवे लखनऊ मंडल में सीबीआइ की छापेमारी हुई थी जिसमें वाराणसी जंक्शन पर लगे एटीवीएम मशीन से जुड़ी शिकायत सामने आई थी।












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