BNP NEWS DESK। Railway Coaches भारतीय रेलवे ने छोटे-मध्यम व्यापारियों के लिए पार्सल कारोबार का दरवाजा पूरी तरह खोल दिया है। पहले इसके लिए करोड़ों का कारोबार और उतनी ही बैंक गारंटी दिखानी पड़ती थी, अब वो सारी शर्तें खत्म कर दी गई हैं। अब सिर्फ दस हजार रुपये का मामूली रजिस्ट्रेशन शुल्क देकर कोई भी व्यापारी टेंडर में हिस्सा ले सकता है।
रेलवे बोर्ड ने 28 नवंबर को उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह समेत सभी जोन के महाप्रबंधक को पत्र भेजकर साफ कर दिया कि पुरानी सख्त शर्तें अब नहीं रहेंगी। दिसंबर से हर जोन में व्यापारियों की बैठकें शुरू हो जाएंगी, ताकि उन्हें नई सुविधा की पूरी जानकारी मिल सके।
पूरी पार्सल कार्गो एक्सप्रेस ट्रेन चलाने का मौका
Railway Coaches यह बदलाव सिर्फ कोच लीजिंग तक सीमित नहीं है। अब जेपीपी-आरसीएस स्कीम में एग्रीगेटर बनने की फीस 20 हजार से घटकर 10 हजार रुपये हो गई और 50 लाख टर्नओवर की शर्त भी खत्म।
यानी अब छोटी कूरियर कंपनियां, ई-कामर्स या लोकल व्यापारी भी रेलवे के साथ पार्टनरशिप कर पार्सल बुकिंग, पिकअप और डोर-टू-डोर डिलीवरी का काम कर सकेंगे।
सबसे बड़ा फायदा उन व्यापारियों को मिला जो पूरी पार्सल कार्गो एक्सप्रेस ट्रेन चलाना चाहते हैं। पहले इसके लिए 10 करोड़ सालाना टर्नओवर जरूरी था। अब सिर्फ रजिस्टर्ड लीज होल्डर होना काफी है, सालाना टर्नओवर का नियम खत्म।
अपना माल, अपना कोच और अपना कारोबार
अब छोटा व्यापारी भी बड़ा सपना देख सकता है। अपना माल, अपना कोच और अपना कारोबार, दरवाजा खुला है। सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि इस कदम से पार्सल कारोबार कई गुना बढ़ेगा। सड़कों पर ट्रकों का बोझ कम होगा, छोटे व्यापारियों को सस्ता और तेज परिवहन मिलेगा और रेलवे की कमाई में भी भारी इजाफा होगा। Railway Coaches
















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