BNP NEWS DESK। Ram Mandir यह जन्मभूमि पर राम मंदिर की पूर्णता के उद्घोष में सनातन का जयघोष था… पांच दिवसीय अनुष्ठान की पूर्णाहुति के रूप में धर्मध्वजा शिखर पर थी और विह्वलता में कंपकंपाते हाथों से उसे प्रणाम करते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आंखें सजल। मंगलवार को अभिजित मुहूर्त में वह चिर अभिलाषित क्षण आया जब सनातन की धर्मध्वजा शिखर पर थी।
Ram Mandir इस क्षण को शब्दों में बांधना उतना ही कठिन है, जितनी कठिन यात्रा इस आंदोलन के शिखर तक पहुंचने की। प्रधानमंत्री के शब्दों में ‘आज अयोध्या नगरी सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष बिंदु की साक्षी बन रही है। सदियों के घाव भर रहे हैं। सदियों की वेदना विराम पा रही है। सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है। आज संपूर्ण भारत और विश्व राममय है और हर राम भक्त के हृदय में अपार अलौकिक आनंद है।’
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी और संघ प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में बटन दबाकर 18 फीट की लंबाई और नौ फीट की चौड़ाई वाली ध्वजा फहराने के बाद प्रधानमंत्री जैसे ही मंच पर आए…दीर्घा से गूंजे जयघोष का उत्तर उन्होंने सियावर रामचंद्र की जय से दिया।

सदियों लंबे एक ऐसे यज्ञ की पूर्णाहुति हुई
32 मिनट के संबोधन में उन्होंने सामाजिक समरसता, सहभागिता का भान कराते हुए कहा कि आज सदियों लंबे एक ऐसे यज्ञ की पूर्णाहुति हुई है, जिसकी पवित्र अग्नि 500 वर्षों तक प्रज्वलित रही। यह धर्मध्वजा भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है।
इसका भगवा रंग, ॐ शब्द और कोविदार वृक्ष रामराज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करता है। यह ध्वज…संकल्प है, सफलता है। यह ध्वज…संघर्ष से सृजन की गाथा है, सदियों से चले आ रहे स्वप्नों का साकार स्वरूप है।
पीएम मोदी ने भगवान राम के चरित्र में सामूहिकता और सहभागिता की व्याख्या करते हुए कहा, विकसित भारत बनाने के लिए भी समाज की सामूहिक शक्ति की आवश्यकता है। राम मंदिर परिसर में बने माता शबरी, वाल्मीकि, विश्वामित्र के मंदिर सर्वसमाज के प्रेमभाव का प्रतीक हैं। निषादराज मित्रता तो जटायु और गिलहरीजी बड़े संकल्प के लिए छोटे प्रयास का प्रतीक हैं। हर देशवासी राम मंदिर आने पर सप्तऋषियों के भी दर्शन करें।
भारत के हर घर में और हर भारतीय में राम
इन सबके योगदान ने एक राजकुमार को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाया। उन्होंने कहा कि हमने सहभागिता की भावना से पिछले 11 वर्षों में महिला, दलित, पिछड़े, अति-पिछड़े, आदिवासी, वंचित, किसान, श्रमिक, युवा हर वर्ग को विकास के केंद्र में रखा है। जब देश का हर व्यक्ति, वर्ग, हर क्षेत्र सशक्त होगा, तब संकल्प की सिद्धि में सबका प्रयास लगेगा।
सबके प्रयास से ही 2047 में जब देश आजादी के 100 साल मनाएगा, तब तक हमें विकसित भारत का निर्माण करना ही होगा। मोदी ने कहा, भारत के हर घर में और हर भारतीय में राम हैं। गुलामी की मानसिकता इतनी हावी हो गई कि प्रभु राम को भी काल्पनिक घोषित किया जाने लगा।
अगर हम ठान लें तो मानसिक गुलामी से मुक्ति पा लेंगे। तब 2047 तक विकसित भारत का सपना पूरा होने से कोई रोक नहीं पाएगा। संबोधन के बाद प्रधानमंत्री ने मंदिर निर्माण से जुड़े श्रमवीरों और वंचित वर्ग के लोगों से भी संवाद किया।
राष्ट्रीय एकता के नए अध्याय का उद्घोष
अयोध्या के पावन धाम में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए अत्यंत भावविभोर करने वाला अनुभव रहा। शुभ मुहूर्त में संपन्न हुआ यह अनुष्ठान हमारे सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता के नए अध्याय का उद्घोष है।
राम मंदिर का गौरवशाली ध्वज, विकसित भारत के नवजागरण की संस्थापना है। ये ध्वज नीति और न्याय का प्रतीक हो, ये ध्वज सुशासन से समृद्धि का पथ प्रदर्शक हो और ये ध्वज विकसित भारत की ऊर्जा बनकर इसी रूप में सदा आरोहित रहे…..भगवान श्री राम से यही कामना है। जय जय सियाराम।
एक्स पर पीएम नरेन्द्र मोदी का पोस्ट
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राममंदिर पर लहराता यह केसरिया ध्वज धर्म, मर्यादा, सत्य, न्याय और राष्ट्र धर्म का प्रतीक है। अब यहां हर दिन एक पर्व है और हर दिशा में राम राज्य की अनुभूति हो रही है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि धर्मध्वज पर कोविदार वृक्ष रघुकुल की सत्ता का प्रतीक है। आज ध्वज पर उसका अंकन हमारी अस्मिता की वापसी का प्रतीक है। अशोक सिंहल, रामचंद्र दास परमहंस और विष्णुहरि डालमिया का स्मरण करते हुए कहा कि जिन लोगों ने इस काम के लिए प्राण दिए, उनकी आत्मा आज तृप्त हुई होगी।
इससे पहले सुबह 9: 35 बजे एयरपोर्ट पर उतरने के बाद मोदी साकेत महाविद्यालय पहुंचे। वहां से राममंदिर के आदि शंकराचार्य द्वार तक दोनों तरफ जुटे रामभक्तों का अभिवादन करते हुए वह राममंदिर पहुंचे। सभी ने रामलला के साथ ही सप्तषि मंडप और उप मंदिरों में दर्शन पूजन किया।
















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