जैन धर्म का प्रमुख पर्व पर्युषण पर्व का शुभारंभ

SHARE:

paryushan festival

BNP NEWS DESK। paryushan festival भाद्र शुक्ल पंचमी पंचमी दिन गुरुवार से जैन धर्म का प्रमुख पर्व पर्युषण पर्व का शुभारंभ हो चुका है। पंचमी सेअनंत चतुर्दशी तक यह पर्व मनाया जाता है।
जैन धर्म के सप्तम तीर्थंकर 1008 भगवान सुपार्श्व नाथ की जन्मस्थली स्थित श्री भदैनी जी दिगंबर जैन क्षेत्र में पर्युषण पर्व के अवसर पर प्रतिदिन प्रात 7 बजे अभिषेक शांति धारा 10 लक्षण पर पूजा आदि होंगे। सायंकाल कल 7 बजे आरती और शास्त्रप्रवचन होगा।

आज पर्युषण पर्व का प्रथम दिन उत्तम क्षमा

paryushan festival  प्रथम दिवस पर जैन धर्म सप्तम तीर्थंकर भगवान सुपार्श्व नाथ की जन्मस्थली स्थित श्री भदैनी जी दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र पर प्रातः 7 बजे भगवान जलाभिषेक के बाद देश में जो प्राकृतिक आपदाएं आ रहीं है उनसे शांति हेतु बृहद शांतिधारा की गई उसके बाद विनय पाठ, देव शास्त्र गुरु पूजा भगवान सुपार्श्व नाथ पूजा 24 तीर्थंकर पूजा 16 कारण पूजा नंदीश्वर दीप पूजा पंचमेर पूजा और 10 लक्षण पर्व की पूजा के साथ स्वयंभू स्तोत्र का पाठ किया गया।

सायंकाल 7 बजे भव्य आरती एवं शास्त्रप्रवचन हुआ

इस अवसर पर पंचायती दिगंबर जैन मंदिर वाराणसी में सुरेंद्र कुमार जैन आचार्य ने अपने प्रवचन में कहा कि क्रोध का कारण उपस्थित होने पर भी क्रोध न करना क्षमा है समर्थ रहने पर भी क्रोध उत्पादक निंदा अपमान गाली गलौज आदि प्रतिकूल व्यवहार होने पर भी व्यवहार होने पर मन मेंकलुषता न आने देना उत्तम क्षमा धर्म है। क्षमा वीरस्य भूषणम।

क्रोध धर्म को नष्ट कर देता है जैसे अग्नि ईंधन को नष्ट कर देती है। वैसे क्रोध भयंकर पापों को भी करता है ऐसा मानकर क्रोध करना छोड़ देना चाहिए।
क्रोध बैरी का जीतना वही उत्तम क्षमा है उत्तम क्षमा तीन लोक मैं सार है। क्षमा की आधारशिला विनम्रता है क्षमा स्वम मैं एक मौन प्रार्थना है। क्षमा पृथ्वी का पर्याय है। paryushan festival

BNPNEWS
Author: BNPNEWS

[ays_poll id=1]
सबसे ज्यादा पढ़ी गई

Horoscope

Weather