BNP NEWS DESK। Shree Ganeshotsav नगर के मध्य अगस्त्यकुंड गोदौलिया स्थित सुप्रसिद्ध शारदा भवन का 97वाँ गणेश उत्सव 27 अगस्त बुधवार से 31अगस्त रविवार तक समारोह के साथ मनाया जाएगा। इस उत्सव की स्थापना आज से 97 वर्ष पूर्व संस्कृत पत्रकारिता के अग्रणी विद्वान तथा अनेक ग्रंथों के रचयिता, व्याख्याता स्व. पंडित गौरीनाथ पाठक ने किया था। यह उत्सव अपने विशिष्ट कार्यों के कारण सदैव बुद्धिजीवी वर्ग में श्रेष्ठ रहा है।
Shree Ganeshotsav इस वर्ष 27 अगस्त बुधवार को मध्यान्ह भगवान श्री गणेश जी के मूर्ति की सविधि प्राण प्रतिष्ठा पूर्वक स्थापना होगी। दोपहर 3:00 से महिला कार्यक्रम व सायं 7:00 बजे से हास्य कवि सम्मेलन होगा। 28 अगस्त गुरुवार को दिन में 11:00 बजे से साहित्य,व्याकरण दर्शन,ज्योतिष आदि विषयों में शलाका परीक्षा तथा 2:00 बजे से साहित्य,व्याकरण विषयों में व्याख्यान प्रतियोगिता होगा। इसमें प्रथम स्थान प्राप्तकर्ता को पंडित गौरी नाथ पाठक श्रीमती इंदिरा बाई पाठक रजत पदक तथा व्याकरण में श्री शिव कुमार शिव आचार्य मा स्वामी रजत पदक प्रदान किया जाएगा। इसके बाद न्याय,व्याकरण,वेदांत विषय में शास्त्रार्थ होगा, तत्पश्चात विद्वत सभा होना सुनिश्चित है।
संगीत के कार्यक्रम का शुभारंभ श्री प्रियांशु घोष के गायन से
29 अगस्त शुक्रवार को संगीत के कार्यक्रम का शुभारंभ श्री प्रियांशु घोष के गायन से होगा। पदमश्री पंडित शिवनाथ मिश्रा एवं पंडित देवव्रत मिश्रा का युगल सितार वादन प्रस्तुत करेंगे। संगत प्रशांत मिश्रा करेंगे। 30 अगस्त शनिवार को डॉक्टर अर्चना मस्कर का गायन होगा। इसके अनंतर सुखदेव मिश्र का वायलिन होगा। संगत श्री किशोर मिश्रा करेंगे।
31 अगस्त रविवार को प्रातः 10:00 बजे से पंडित देवाशीश डे का गायन होगा। सायं 4:00 बजे से भगवान श्री गणेश जी की शोभायात्रा शारदा भवन से निकलकर बालमुकुंद चौहाटा,गणेश महाल,जगमबाड़ी, गोदौलिया,नीची ब्रह्मपुरी,साक्षी विनायक,दशाश्वमेध से होती हुई उत्सव भवन में आएगी तत्पश्चात समृद्धि उत्तर पूजन के बाद मूर्ति संग्रहित गंगाजल में विसर्जित होगी। इसके बाद उत्सव स्थान में शहनाई वादन प्रसाद वितरण एवं आभार प्रदर्शन के साथ 97वें उत्सव को विराम दिया जाएगा।
Shree Ganeshotsav शारदा भवन का श्रीगणेशोत्सव अपने विशिष्ट मानदण्डों के अनुपालन के कारण गौरवान्वित है। उत्सव के समस्त क्षेत्रों में शास्त्रीय परम्परा ही उसका मेरुदण्ड है। चारों वेद और उसकी समस्त शाखाओं के वैदिक विद्वानों द्वारा वेदघोष से क्षेत्र का वातावरण पवित्र हो जाता है जो अगले वर्ष के पूर्व तक प्रभावपूर्ण रहता है। शास्त्रीय प्रस्तुतियों के अनन्तर संगीतांजलि की श्रृंखला में भी अनेक कलाकार विद्वानों ने कीर्तिमान स्थापित किये हैं। कार्यक्रम प्रस्तुतियों में भी उन दिनों प्रतिस्पर्धा होती थी।
आगरा से मुक्ति का मंचन इसी शारदा भवन में हुआ
Shree Ganeshotsav शारदा भवन के श्रीगणेशोत्सव में युवा वर्ग अपनी अभिनय कला को भी प्रदर्शित करते थे। ‘आग्र्याहून सुटका’ अर्थात् आगरा से मुक्ति का मंचन इसी शारदा भवन में हुआ था, जो पूरे देश में चर्चा का केन्द्र रहा। विगत २५-३० वर्षों के अन्तराल में नवोदित बाल कलाकारों द्वारा समस्या प्रधान विषयों में प्रस्तुतियाँ हुआ करती थीं।
संगीत के मूर्धन्य कलाकार अपनी-अपनी प्रस्तुति से उत्सव की शोभा बढ़ाते थे। पं० अमरनाथ मिश्र (पूर्व महन्थ संकटमोचन मन्दिर) एवं पं० जोतीन भट्टाचार्य के सरोद वाद्ययन्त्र की एक रजत वर्ष (लगातार पच्चीस वर्ष) तक प्रस्तुति का कीर्तिमान यही स्थापित हुआ रहा। इसी प्रकार पं० गायनाचार्य जी के साथ भी अनेक वर्षों तक स्वर्गीय महन्थजी ने संगत की रहीं। एवमेव अपने-अपने काल के मूर्धन्य कलाकार अपनी-अपनी प्रस्तुति से भगवान् का आशीष ले चुके हैं। Shree Ganeshotsav
पं० बद्रीप्रसाद मिश्र एवं पं० महादेवप्रसाद मिश्र की जोड़ी, पं० अमरनाथ मिश्र, पं० पशुपतिनाथ मिश्र का युगल गायन, पं० राजन मिश्र एवं पं० साजन मिश्र सहित इन श्रेष्ठ कलाकारों का गायन की अविस्मरणीय प्रस्तुतियाँ रही है। इसी प्रकार प्राचीन मूर्धन्य कलाकारों में बड़े रामदासजी, छोटे रामदासजी, कण्ठे महाराज, पं० अनोखे लाल, पं० श्रीचन्द्रजी सदृश महान् कलाकारों की स्मृतियाँ आज भी जीवन्त है। पं० लालमणि मिश्र, ठा० राजमान सिंह, पं० हनुमानू प्रसाद मिश्र, आदि कलाकारों ने शारदा भवन के सभाकक्ष को सिद्धपीठ की संज्ञा दी रही।
वर्तमान काल में पद्मश्री श्री शिवनाथ मिश्र, पद्मश्री ऋत्विक् सान्याल, पं० देवाशीष डे, पं० वीरेन्द्रनाथ मिश्र सहित शीर्षस्थ विद्वानों की भी प्रस्तुतियाँ प्रतिवर्ष देखी जाती है। सौभाग्य से वही परम्परा आज भी कमोबेश रूप में ‘शारदा भवन’ में दिखाई देती है। Shree Ganeshotsav
















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