BNP NEWS DESK। Ganesh Chaturthi उत्सव के अलग-अलग रंग बाबा विश्वनाथ के शहर बनारस में भी देखने को मिलता है। भोले की नगरी में गणपति बप्पा की जयकार भी सुनाई देती है। गणेश चतुर्थी पर जहाँ एक ओर मुंबई जैसे महानगर में गणेश पूजन की परम्परा चली आ रही हैं वहीं सात वार नौ त्यौहार का शहर बनारस भी गणपति पूजन से अछूता नहीं रहा।
शहर के कई इलाकों में छोटी से बड़ी मूर्ति स्थापित कर एक दिन से लेकर सप्ताहव्यापी पूजन अर्चन व संस्कृतिक कार्यक्रम हो रहा है। इसी कड़ी में अगस्त कुंडा इलाके के शारदा भवन में आज से 96 वर्ष पहले गणपति उत्सव की शुरुआत हुई।
अमरुद के लकड़ी से बने पालकी पर गणेश ज़ी विराजमान
Ganesh Chaturthi साल 1929 में पंडित गौरीनाथ पाठक ने इसकी शुरुआत की थी। आज भी यहाँ अमरुद के लकड़ी से बने पालकी पर गणेश ज़ी विराजमान होते हैं। बुधवार को मध्यान में संजय चाण्देकर के आचार्यत्व में पाँच वैदिक विद्वानों द्वारा पूजन के उपरान्त मुंबई के सिद्धि विनायक की प्रतिकीर्ति प्रतिमा स्थापित हुई।
दोपहर बाद से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रारम्भ हो गए। दोपहर 3 बजे से महिलाओं द्वारा भजन,गीत व नृत्य की प्रस्तुति की गयी। जिसमें कुमारी आर्या ने भरत नातत्यम के माध्यम से गणेश वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद समृद्धि ने अपने मनमोहक कथक नृत्य से उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया। इसके साथ ही मूक अभिनय का भी आयोजन हुआ जिसमें तीन दर्जन से ज्यादा महिलाओं ने हिस्सा लिया।
आपरेशन सिंदूर पर नाटक का भी मंचन
आपरेशन सिंदूर पर नाटक का भी मंचन किया गया। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का सफल संचालन समीक्षा दूबे व महुआ पाठक ने किया। संयोजन स्मिता वी. पाठक ने व धन्यवाद ज्ञापन मनीषा पाठक ने दिया।
सायं काल दूसरी निशा में भव्य कवि सम्मलेन आयोजित हुआ। जिसमें प्रयागराज अखिलेश दूबे,सोनभद्र से मनमोहन मिश्रा ने खूब तालियाँ बटोरी।
स्थानीय कवियों में बृजेश पाण्डेय,उमाशंकर कंचन,विंध्याचल पाण्डेय,अतुल अंजान सहित दर्जनों कवियों ने अपनी कविता गणपति दरबार में सुनाई। कवियों ने गणेश उत्सव में भाग लेकर अपने सुमधुर रचनाओं से सभी को ओत-प्रोत कर दिया। कवि सम्मलेन का संचालन दमदार बनारसी ने किया। अतिथियों का स्वागत यादव राव पाठक ने व संयोजन डा.विनोद राव पाठक ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में महापौर अशोक तिवारी उपस्थित थे। पुरस्कार वितरण श्रीमती कामना दूबे ने किया।
















Discussion about this post