कठपुतली कला अभिव्यक्ति का माध्‍यम

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BNP NEWS DESK।  puppetry वाराणसी के चौरामाता मंदिर प्रांगण में 22 मई से प्रारंभ हुई सात दिवसीय कठपुतली कार्यशाला का समापन समारोह 28 मई को अत्यंत हर्षोल्लास और गरिमामयी वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस विशेष कार्यशाला का आयोजन ‘क्रिएटिव पपेट थियेटर ट्रस्ट, वाराणसी’ के तत्वावधान में किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले बच्चों को लोककला विशेषकर कठपुतली कला –से जोड़ते हुए संविधानिक मूल्यों, सामाजिक सरोकारों और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से उन्हें जागरूक बनाना था।

puppetry कार्यशाला की खास बात यह रही कि इसमें भाग लेने वाले सभी प्रतिभागी ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए हुए बच्चे थे, जिन्होंने न केवल कठपुतली कला के तकनीकी पहलुओं को सीखा बल्कि उसे सामाजिक और संवैधानिक विषयों पर प्रस्तुत करने की कला में भी दक्षता प्राप्त की। बच्चों ने अपने हाथों से कठपुतलियां बनाईं, संवाद तैयार किए, मंच सजाया और अंत में जो प्रस्तुतियां दीं, उन्होंने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।

संविधान के मूलभूत अधिकारों और कर्तव्यों, पर्यावरण संरक्षण, बाल अधिकार, शिक्षा का अधिकार, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता अभियान, भ्रूण हत्या जैसी ज्वलंत सामाजिक समस्याओं पर आधारित

समापन समारोह में दर्शकों को संविधान के मूलभूत अधिकारों और कर्तव्यों, पर्यावरण संरक्षण, बाल अधिकार, शिक्षा का अधिकार, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता अभियान, भ्रूण हत्या जैसी ज्वलंत सामाजिक समस्याओं पर आधारित कठपुतली नाटकों की झलक देखने को मिली। इन प्रस्तुतियों की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि वे बाल सुलभ भाषा में थीं, लेकिन उनमें विषय की गंभीरता और संदेश की गहराई भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही थी। puppetry

सात दिवसीय कार्यशाला के चौथे दिन प्रतिभागियों ने विभिन्न जानवरों और मनुष्यों की कठपुतलियों का निर्माण किया। वहीं पांचवें दिन चरित्र अनुरूप वस्त्र विन्यास, वेशभूषा इत्यादि के गुण भी सीखे। कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों को पारंपरिक भारतीय कठपुतली कला से परिचित कराना और उनकी रचनात्मक क्षमताओं को विकसित करना है। प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को कठपुतली निर्माण की तकनीकों, रंग संयोजन और विभिन्न सामग्री के उपयोग की जानकारी दी।

कार्यशाला में प्रतिभागियों को कठपुतली अभिनय, संवाद और प्रस्तुति की विधाओं से भी परिचित कराया गया। समारोह की अध्यक्षता स्थानीय ग्राम प्रधान ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार और लोक कला विशेषज्ञ मंचासीन रहे। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा, “आज के समय में जब आधुनिकता और तकनीक की दौड़ में हमारी लोक कलाएं पीछे छूट रही हैं, ऐसे आयोजन न केवल बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं बल्कि उनमें आत्मगौरव और सामाजिक चेतना भी जाग्रत करते हैं। यह कार्यशाला वास्तव में एक सामाजिक सांस्कृतिक नवजागरण का प्रतीक है।”

बच्चों के साथ व्यक्तिगत रूप से जुड़कर उन्हें मार्गदर्शन भी प्रदान किया

कार्यक्रम के सफल संचालन और समन्वयन के लिए विशेष रूप से मिथि‍लेश दूबे का उल्लेख किया गया, जिन्होंने पूरी टीम के साथ मिलकर आयोजन को न केवल योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया बल्कि बच्चों के साथ व्यक्तिगत रूप से जुड़कर उन्हें मार्गदर्शन भी प्रदान किया। दूबे ने कहा, “हमारा उद्देश्य बच्चों को मंच देना ही नहीं, बल्कि उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संवैधानिक समझ और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। बच्चों ने बहुत कम समय में जिस तरह से जटिल विषयों को सहज रूप से प्रस्तुत किया, वह उनके उज्जवल भविष्य की ओर संकेत करता है।”

कार्यशाला में प्रशिक्षकों ने कठपुतली निर्माण, चरित्र विकास, संवाद लेखन, मंच संचालन और प्रस्तुति की बारीकियों पर गहन प्रशिक्षण दिया। बच्चों ने समूहों में कार्य करते हुए सहयोग, संवाद, नेतृत्व और रचनात्मकता जैसे गुणों का भी अभ्यास किया। puppetry

समापन समारोह में प्रस्तुति देने वाले बच्चों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अभिभावकों ने भी मंच पर आकर अपने बच्चों की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया और आयोजकों का आभार जताया कि उन्होंने गांव के बच्चों को ऐसा मंच प्रदान किया जहां वे अपनी प्रतिभा को पहचान सकें और आगे बढ़ा सकें।

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Author: BNPNEWS

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