BNP NEWS DESK। caste discrimination पुलिस की लिखापढ़ी में अब किसी आरोपित की जाति का कालम नहीं भरा जाएगा। आरोपपत्र दाखिल करने के दौरान भी अब इसे रिक्त छोड़ दिया जाएगा, जबकि एससी-एसटी एक्ट के मुकदमों में आरोपित की जाति का जिक्र होगा।
गिरफ्तारी मेमो में भी आरोपित की जाति नहीं लिखी जाएगी। डीजीपी राजीव कृष्ण का कहना है कि सीसीटीएनएस के तहत आनलाइन प्रोफार्मा से जाति का कालम हटाए जाने के लिए एनसीआरबी को पत्र लिखा गया है।
caste discrimination पुलिस दस्तावेजों में जहां जाति दर्ज किए जाने का कालम था, वहां अब जाति का उल्लेख न किए जाने का निर्देश है। आरोपपत्र दाखिल करने के दौरान आरोपित की जाति का कालम भी भरा जाता है, जबकि एफआइआर में आरोपित की श्रेणी (एससी-एसटी/पिछड़ा वर्ग/सामान्य) का जिक्र होता है।
एफआइआर व अन्य दस्तावेजों में अब माता-पिता दोनों के नामों का उल्लेख करना होगा। सीसीटीएनएस में माता के नाम का कालम भी बढ़ेगा। सीसीटीएनएस में बदलाव किए जाने तक जाति भरने से जुड़े गैर अनिवार्य कालम रिक्त छोड़ दिए जाएंगे।
वाहनों पर जाति आधारित स्लोगन व स्टीकर लगाने पर चालान
अब वाहनों पर भी जाति नहीं लिखी जा सकेगी। वाहनों पर जाति आधारित स्लोगन व स्टीकर लगाने पर केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान का निर्देश दिया गया है।
नंबर प्लेट पर ऐसा लिखने पर पांच हजार रुपये तथा शीशे अथवा अन्य स्थान पर लिखने पर दो हजार रुपये का चालान होगा। प्रदेश में अब जाति आधारित रैलियां भी नहीं होंगी। शासन ने प्रदेश में जातिगत भेदभाव खत्म करने के लिए पुलिस अभिलेखों के साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर जाति के उल्लेख पर रोक लगाई है।
मुख्य सचिव दीपक कुमार ने रविवार को इसे लेकर शासनादेश जारी किया था जिसके अनुसार जाति का नाम न दर्ज किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार थानों पर अपराधियों की जानकारी रखने के लिए रजिस्टर नंबर चार में आरोपितों की जाति दर्ज की जाती है।
इसके अलावा थानों से वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाने वाली मुकदमों व अपराधों से जुड़ी रिपोर्ट में भी जाति का उल्लेख रहता है। ऐसे सभी दस्तावेजों में अब जाति का उल्लेख नहीं किया जाएगा।
थानों पर हिस्ट्रीशीटर के बोर्ड पर भी उनके नाम के आगे जाति नहीं लिखी जाएगी। इसे लेकर लिखित रूप से भी जल्द विस्तृत निर्देश जारी किए जाएंगे। शासनादेश के अनुसार इंटरनेट मीडिया पर भी जाति आधारित कंटेंट नहीं दिए जा सकेंगे। इसकी मानिटरिंग भी कराई जाएगी। पुलिस थानों के नोटिस बोर्ड, वाहनों व साइन बोर्ड से जातीय संकेत और जातीय नारे हटाए जाएंगे।
यह भी निर्देश
– जातिगत कारण अथवा अभिमान के चलते जाति का महिमा मंडन करने वाले तथा भौगोलिक क्षेत्रों को जातिगत या जागीर घोषित करने वाले साइनबोर्ड भी हटेंगे। ऐसे बोर्ड भविष्य में न लगें, इसके प्रबंध भी किए जाएंगे।
– थाने के नोटिस बोर्ड पर भी किसी आरोपित की जाति नहीं लिखी जाएगी।
– इंटरनेट मीडिया के माध्यम से जातिगत द्वेष फैलाने अथवा जातिगत भावनाओं को भड़काने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी।








