Banke Bihari Corridor याचिका की अगली सुनवाई तीन जुलाई को होगी। कोर्ट ने कहा कि इसी मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है, इसलिए इस केस की सुनवाई स्थगित कर रहे हैं। तब तक राज्य सरकार अपना जवाब दाखिल करें। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की खंडपीठ ने पंकज सारस्वत की याचिका पर दिया है।
याचिका में कुंज गली सहित लगभग 50 पौराणिक मंदिरों, हरिदास संप्रदाय के पूजा स्थल ध्वस्त न करने की मांग की गई है। याची का कहना है कि ऐसा करने से न केवल प्लेसेस आफ वर्शिप एक्ट-1991, अपितु अनुच्छेद 25, 26 व 49 का उल्लंघन किया जा रहा है।
यह भी कहा गया है कि बलपूर्वक नहीं, बल्कि सहमति से नए अधिग्रहण कानून के तहत अधिग्रहण किया जाए। मुख्य स्थायी अधिवक्ता कुणाल रवि ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कोरिडोर योजना की अनुमति दे दी है।
ठाकुर श्रीबांके बिहारी मंदिर के फंड का इस्तेमाल अधिग्रहण के लिए करने की अनुमति दे दी है। सरकार मंदिर के चारों ओर पांच एकड़ में पार्किंग व्यवस्था, शौचालय, विश्राम घर जैसी सुविधाएं देना चाहती है।
जो आधार इस याचिका में लिए गए हैं, उन्हीं आधारों पर देवेंद्रनाथ गोस्वामी व रसिकराज गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट के 15 मई, 2025 के आदेश को संशोधित करने की अर्जी दी है। इसमें कहा गया है कि योजना लागू की गई तो धार्मिक स्थल की अपूरणीय क्षति होगी। वृंदावन का धार्मिक स्वरूप बदल जाएगा।








