BNP NEWS DESK। Varanasi Court कचहरी परिसर में दारोगा मिथिलेश प्रजापति को पीटे जाने की घटना चाहे जितनी बड़ी हो, लेकिन उसके जड़ में मामूली जमीन विवाद है। पुलिस बड़ी घटना को रोकने के लिए दोनों पक्षों को शांतिभंग में निरुद्ध करते हुए हवालात में डाल दिया था। जिसके बाद दोनों पक्ष मजिस्ट्रेट के यहां से जमानत पाए थे। इतनी सी बात को वकील इस कदर दिल पर ले लिए, जो जांच का विषय हो सकता है।
Varanasi Court कचहरी में मंगलवार को वकीलों ने बड़ागांव थाने के दारोगा मिथिलेश प्रजापति को बंद कमरे से निकालकर बेरहमी से पीटा। उनकी वर्दी फाड़ दी। दारोगा को गंभीर हालत में पं. दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया गया, जहां से बीएचयू ट्रामा सेंटर रेफर किया गया। दारोगा के सिर और शरीर पर 13 से अधिक गंभीर चोटें आईं हैं। डीसीपी आकाश पटेल ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हमलावरों को चिह्नित कर लिया गया है।
बड़ागांव थाना क्षेत्र के ग्राम पुआरी खुर्द गांव का मोहित कुमार सिंह उर्फ मोहित मौर्या (वकील) का अपने चाचा प्रेमचंद्र मौर्या भूमि विवाद है। बीते 28 जून को प्रेमचंद्र मौर्य मकान का निर्माण करा रहे थे, जिसे रोकने पर मोहित से विवाद हुआ तो प्रेमचंद के भाई अशोक कुमार मौर्या से मारपीट हो गई।
मारपीट में अशोक के हाथ की हड्डी टूट गई तो इलाज कराने के बाद उन्होंने मोहित के खिलाफ केस दर्ज कराया था। जिसके बाद 13 सितंबर को मोहित प्रार्थना पत्र लेकर समाधान दिवस पहुंच आया, जहां उनके चाचा प्रेमचंद्र मौर्या के द्वारा भी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया।
बड़ागांव थाना में ही मोहित और प्रेमचंद्र मौर्य में विवाद हो गया। पुलिस के समझाने पर भी बात नहीं बनी तो पुलिस ने शांति व्यवस्था के दृष्टिगत मोहित कुमार और प्रेमचंद्र का चालान कर दिया। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बताया कि पुलिस ने नियम संगत कार्यवाही की है, लेकिन उसके बावजूद इस तरह का रिजल्ट कहीं से उचित नहीं है।
भारी पुलिस फोर्स देखकर कचहरी परिसर में मची अफरा-तफरी
कचहरी परिसर में दारोगा की पिटाई के बाद भारी संख्या में पुलिस बल पहुंचा। पुलिस लाइन के जवानों के साथ छह थाने की पुलिस, आरएएफ व पीएसी भी आ गई थी। सभी आपात स्थिति से निबटने के लिए तैयारी के साथ थे। पुलिस ने कुछ वक्त के लिए कचहरी के सभी दरवाजे भी बंद कर दिए थे। इससे वकील आशंकित हो गए। मारपीट से बिगड़े माहौल के बाद इतनी भारी फोर्स देखकर कचहरी परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति रही।
इसी दौरान एडिशनल पुलिस कमिश्नर शिवहरि मीणा पहुंचे। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के साथ जिला जज के साथ बैठक की जिसके बाद कचहरी के दरवाजों को खोला गया और वकील परिसर से बाहर जाने लगे। शाम पांच बजे तक लगभग पूरी कचहरी खाली हो गई। वहीं फोर्स देर तक कचहरी चौकी पर जमी रही। देर शाम वहां से जवानों को वापस किया गया।
















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