चंद्रयान-3 ने खोजे सात तरह के खनिज : डा. वी. नारायणन

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IIT BHU

BNP NEWS DESK।  IIT BHU इसरो के अध्यक्ष डा. वी. नारायणन ने कहा कि चंद्रयान-3 ने चंद्रमा पर सात तरह के खनिज खोजे हैं, इनमें आयरन, मैंगनीज और सिलिकान आदि शामिल हैं। चंद्रमा की भूकंपीय गतिविधियों का भी अध्ययन हुआ है और कई स्थानों पर कंपन की गतिविधि मिली है, इसके लिए चंद्रमा में ‘इलेक्ट्रान क्लाउड’ भी खोजा गया है।
चंद्रयान-3 से हुई महत्वपूर्ण खोजें वैज्ञानिक समुदाय के लिए बेहद लाभप्रद हैं। वह गुरुवार को आइआइटी बीएचयू के दीक्षा समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे,
समारोह में उनके हाथों मेधावी छात्रों को मेडल दिए गए।

IIT BHU  1,995 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। डा. नारायणन ने कहा कि आने वाले समय में कई नए सहयोग और विकास के अवसर मिलेंगे। चाहे वह भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन हों या फिर अन्य तकनीकी प्रगति, इन सब में कई संस्थानों के साथ मिलकर काम करना फायदेमंद रहेगा। शीघ्र ही चंद्रयान-4 साफ्ट लैंडिंग करेंगे, वहां से नमूने एकत्र करेंगे और उन्हें पृथ्वी पर वापस लाएंगे। यह एक सैंपल रिटर्न मिशन होगा जबकि चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 कक्षीय मिशन थे।

चंद्रयान-5 जापान और भारत का संयुक्त मिशन

इसी तरह चंद्रयान-5 जापान और भारत का संयुक्त मिशन है। चंद्रयान-3 का लैंडर 1600 किलोग्राम का था, वहीं चंद्रयान-4 का लैंडर करीब 6800 किग्रा का होगा। चंद्रयान-3 का रोवर 25 किलोग्राम का था लेकिन चंद्रयान-4 में रोवर 350 किलोग्राम का रहेगा। चंद्रयान-3 का लैंडर केवल 14 चंद्र दिवसों (लगभग 14 पृथ्वी दिनों) तक सक्रिय था लेकिन चंद्रयान-4 की आयु 100 दिनों की होगी। इस मिशन में कई वैज्ञानिक प्रयोग किए जाएंगे और मूल्यवान वैज्ञानिक डाटा एकत्र करेंगे।

भविष्य की अंतरिक्ष योजनाएं साझा करते हुए उन्होंने कहा कि नवंबर में संचार उपग्रह (कम्युनिकेशन सेटेलाइट) का प्रक्षेपण होगा और यह उपग्रह देश की आवश्यकताओं को पूरा करेगा। इसी वर्ष अमेरिका के लिए वाणिज्यिक संचार उपग्रह प्रक्षेपण की भी योजना है।

पहला मानव रहित मिशन का भी लक्ष्य निर्धारित

इसी वर्ष पहला मानव रहित मिशन का भी लक्ष्य निर्धारित है। प्रधानमंत्री द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों के अंतर्गत ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के निर्माण के लिए निजी उद्योगों को जिम्मेदारी है। एलएंडटी और हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के प्रयास से बनने वाला पहला राकेट इसी वित्तीय वर्ष के अंत तक प्रक्षेपित किया जाएगा।

इसके अलावा प्रौद्योगिकी प्रदर्शन उपग्रह भी विकसित कर रहे हैं, जिसमें लगभग 30 से 35 नई प्रौद्योगिकियां शामिल होंगी, जैसे इलेक्ट्रिक प्रणोदन, क्वांटम संचार और कई अन्य उन्नत तकनीकें। इसरो के पास कई दायित्व हैं, इनमें से प्रमुख देश के आम नागरिक तक उन्नत प्रौद्योगिकी को पहुंचाना है ताकि खाद्य सुरक्षा, जल सुरक्षा, संचार, टेलीमेडिसिन, टेली शिक्षा, आपदा चेतावनी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में योगदान दिया जा सके। सुरक्षा के लिए जो भी आवश्यक होगा, हम पूरी निष्ठा के साथ कर रहे हैं। IIT BHU

 

शीघ्र मिलेेगा खुद का सिग्नल, 2035 तक होगा अपना अंतरिक्ष स्टेशन

डा. नारायणन ने कहा कि इस समय हमारे पास अंतरिक्ष कक्षा में चार सैटेलाइट हैं और सही सिग्नल के लिए सात सैटेलाइट की जरूरत होती है। अभी तीन और सैटेलाइट निर्माणाधीन हैं, डेढ़ साल में उन्हें कक्षा में स्थापित किया जाएगा, इसके बाद देश के पास अपना खुद का सिग्नल मिल जाएगा।
वर्ष 2035 तक भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन शुरू हो जाएगा। ‘गगनयान-3’ मिशन पर भी तेजी से काम हो रहा है ताकि छात्र भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में योगदान दें और नवाचार के माध्यम से राष्ट्र की प्रगति में भागीदार बनें।

 

लैंडफाल के पहले बेहतर तरीके से तैयारी कर सकता है प्रशासन

 

इसरो अध्यक्ष ने कहा कि जब हम सैटेलाइट से डेटा प्राप्त करते हैं तो हम उसे मौसम विभाग को सौंपते हैं और उनके साफ्टवेयर की मदद से माडलिंग के जरिए यह समझा जा सकता है कि वह कोई साधारण तरंग है या नहीं।
जब कभी चक्रवात आता है तो पहले ऐसा होता था कि हमें यह स्पष्ट नहीं होता था कि लैंडफाल कहां होगा, इसके कारण जहां लैंडफाल होता था वहां भारी नुकसान होता था। मुझे याद है कि एक बार लैंडफाल के समय खुद देखा कि कैसे एक सौ फीट ऊंचा पेड़ इधर-उधर हिल रहा था और कितना नुकसान हुआ, लेकिन आजकल, हमारे पास सही तरह से जानकारी होती है कि लैंडफाल कहां होगा, जिससे प्रशासन बेहतर तरीके से तैयार हो सकता है। IIT BHU

 

आकाशीय बिजली का पूर्वानुमान लगाने की कोशिश, बना रहे नेविगेशन सिस्टम

जब भी कोई आपदा आती है, तो नुकसान का आकलन करना भी जरूरी होता है और मौसम पूर्वानुमान भी इसी में मददगार होता है। 35 साल पहले भारतीय मौसम विभाग की क्षमताएं उतनी विकसित नहीं थीं, लेकिन आजकल हमारे सैटेलाइट डेटा से मौसम पूर्वानुमान में काफी सुधार हुआ है। यह सब मिलकर आपदा की समझ और प्रबंधन में मदद करते हैं। आकाशीय बिजली (लाइटनिंग) का पूर्वानुमान लगाने की कोशिश भी कर रहे हैं, इसके लिए अभी नेविगेशन सिस्टम पर काम हो रहा है।

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Author: BNPNEWS

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