BNP NEWS DESK। Dadasaheb Phalke Award केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंगलवार को कहा कि दिग्गज अभिनेत्री आशा पारेख को 2020 के दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा आशा पारेख को भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। मंगलवार दोपहर यह घोषणा की गई। 2 अक्टूबर को 80 साल की होने जा रहीं आशा को यह पुरस्कार साल 2020 के लिए दिया जाएगा। इसके पहले वाले संस्करण में सुपरस्टार रजनीकांत को इस सम्मान से विभूषित किया गया था। अवॉर्ड के विजेता क स्वर्ण कलश के साथ शॉल और एक लाख रुपए की नगद राशि दी जाती है।
बतौर चाइल्ड एक्ट्रेस फिल्मों में आई थीं आशा पारेख
आशा पारेख ने 1959 में आई फिल्म ‘दिल देके देखो’ से बॉलीवुड में कदम रखा था, जिसके लीड एक्टर शम्मी कपूर थे। हालांकि, इससे पहले वे बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम कर चुकी थीं। उन्हें 1952 में आई फिल्म ‘मां’ और 1954 में रिलीज हुई ‘बाप बेटी’ में चाइल्ड एक्टर के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते देखा गया था। लीड एक्ट्रेस के रूप में बॉलीवुड डेब्यू करने के बाद उन्होंने ‘जब प्यार किसी से होता है’ (1961), ‘तीसरी मंजिल’ (1966), ‘कटी पतंग’ (1970), ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ (1978), ‘भाग्यवान (1993), ‘घर की इज्जत’ (1994) और ‘आंदोलन’ (1995) जैसी फिल्मों में देखा गया।
कई भाषाओं की फिल्मों में कर चुकी हैं काम
आशा पारेख अपने दौर की हाइएस्ट पेड ऐक्ट्रेसेज में से एक रही हैं। उन्होंने पंजाबी, गुजराती और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया। उन्होंने अपनी खुद की प्रोडक्शन कंपनी भी लॉन्च की थी और टीवी शोज भी बनाए। उन्हें साल 1992 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। अनुराग ठाकुर ने आशा के बारे में कहा, ‘उन्होंने 95 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और 1998 से 2001 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की अध्यक्ष रहीं।’
मां के कारण कला के क्षेत्र में आईं आशा पारेख
आशा पारेख का जन्म 2 अक्टूबर 1942 को एक गुजराती परिवार में हुआ था। उनकी मां सुधा बोहरा मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखती थीं और उनका असली नाम सलमा था। जबकि आशा के पिता बच्चूभाई पारेख गुजराती हिंदू कम्युनिटी से बिलॉन्ग करते थे। आशा मां के कारण कला के क्षेत्र में आईं। उनकी मां ने उनका दाखिला भारतीय शास्त्रीय नृत्य की क्लासेस में करा दिया था, जहां से उन्होंने पंडित बंसीलाल भारती जैसे गुरुओं के सानिध्य में शिक्षा प्राप्त की।
90 के दशक में एक्टिंग से दूर हुईं आशा
90 के दशक में आशा पारेख ने एक्टिंग से दूरी बना ली। उन्होंने ‘आंदोलन’ के बाद उन्होंने 1999 में आई फिल्म ‘सर आंखों पर’ में कैमियो किया था। एक्टिंग छोड़ने के बाद आशा टीवी डायरेक्टर बन गईं और उन्होंने ‘ज्योति’ जैसे गुजराती शोज का निर्माण किया।उनके प्रोडक्शन हाउस का नाम आकृति आशा है, जिसके बैनर तले उन्होंने ‘पलाश के फूल’, ‘बाजे पायल’, ‘कोरा कागज़’ और ‘दाल में काला’ जैसे सीरियल्स बनाए हैं।आशा ‘त्यौहार धमाका’ जिसे रियलिटी शो की जज भी रही हैं।
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Dadasaheb Phalke Award
केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंगलवार को कहा कि दिग्गज अभिनेत्री आशा पारेख को 2020 के दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा आशा पारेख को भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।
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