BNP NEWS DESK। India Afghanistan ऐसे समय जब अफगानिस्तान एक बार फिर वैश्विक शक्तियों के आकर्षण का केंद्र बनता दिख रहा है, तब भारत ने काबुल स्थित दूतावास फिर खोलने का एलान किया है। साथ ही अफगानिस्तान को पड़ोसी देश बताकर भारत सरकार ने पाकिस्तान को साफ संकेत दिया है कि गुलाम कश्मीर को लेकर वह अपनी नीति पर अडिग है। शुक्रवार को तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी के साथ बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तकनीकी मिशन को पूर्णकालिक दूतावास में बदलने की घोषणा की।
2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान की अस्थिर स्थिति को देखकर भारत ने दूतावास बंद कर दिया था
India Afghanistan अगस्त, 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान की अस्थिर स्थिति को देखकर भारत ने दूतावास बंद कर दिया था। हालांकि भारत ने तालिबान सरकार को अभी मान्यता नहीं दी है। यहां बैठक में अफगानिस्तान को 20 एंबुलेंस देने समेत वहां की आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए भारत ने कई मदद की घोषणा कीं। अफगानी विदेश मंत्री ने भारत को आश्वस्त किया कि उनके देश की जमीन का कभी भी भारत के हितों के विरुद्ध इस्तेमाल नहीं होगा।
अफगानिस्तान ने भारतीय कंपनियों को अपने खनन क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया
साथ ही दाएश आतंकी समूह (आइएस) को क्षेत्र के लिए प्रमुख चुनौती बताया। अफगानिस्तान ने भारतीय कंपनियों को अपने खनन क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया है, जबकि उस पर अमेरिका और चीन की भी नजरें हैं।भारत और अफगानिस्तान के विदेश मंत्रियों की इस बैठक में पाकिस्तान को कई तरह से संदेश दिया गया। पहले जयशंकर ने अपने भाषण में कहा, ‘एक पड़ोसी और अफगान लोगों के शुभचिंतक के रूप में भारत को आपके विकास और प्रगति में गहरी रुचि है। हमारी लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को फिर शुरू किया जाएगा। इनमें अफगानिस्तान में कई भारतीय परियोजनाएं शामिल हैं।
अफगानिस्तान डूरंड रेखा को सही नहीं मानता
यहां जयशंकर ने अफगानिस्तान को भारत का पड़ोसी बताया है। वर्ष 1947 तक भारत और अफगानिस्तान के बीच लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा थी, जिसका एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान की सीमा बनी। लेकिन जम्मू-कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा अफगानिस्तान से सटा था, जिस पर बाद में पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया। काबुल में भारत के तकनीकी मिशन को दूतावास के रूप में उन्नत करने की घोषणा करते हुए जयशंकर ने फिर कहा, ‘भारत, अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।’ यह बयान इस संदर्भ में अहम है कि पाकिस्तान और तालिबान सरकार के बीच सीमा विवाद हाल ही में काफी बढ़ गया है। अफगानिस्तान डूरंड रेखा (पाकिस्तान को बांटने वाली सीमा रेखा) को सही नहीं मानता।
दोनों देशों ने की आतंकवाद की निंदा
मुत्तकी के साथ बैठक में जयशंकर ने आपरेशन सिंदूर के दौरान अफगानिस्तान से मिले सहयोग के लिए उसका धन्यवाद किया। बाद में जारी संयुक्त बयान में पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा गया, ‘दोनों देश इस क्षेत्र के देशों की तरफ से पैदा होने वाले हर तरह के आतंकवाद की निंदा करते हैं। इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और परस्पर भरोसे की अहमियत को समझते हैं। दोनों देश एक दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का आदर करते हैं। भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं को समझने के लिए अफगानिस्तान की प्रशंसा करता है।’ India Afghanistan
अफगानिस्तान के किसी भी झंडे का इस्तेमाल नहीं
आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर साथ होने के बावजूद भारत ने तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है। यही वजह है कि दोनों विदेश मंत्रियों की बैठक में अफगानिस्तान के किसी भी झंडे का इस्तेमाल नहीं किया गया। दोनों विदेश मंत्रियों का जो फोटो आधिकारिक तौर पर जारी किया गया उसमें न तो भारत का झंडा है और न ही अफगानिस्तान का। बाद में अफगानिस्तान के दूतावास भवन के अंदर मुत्तकी की प्रेसवार्ता में तालिबान का झंडा लगा था, हालांकि भवन के बाहर पूर्व अफगानी सरकार के कार्यकाल वाला झंडा ही लगा रहा।
अफगानिस्तान को मदद की घोषण
जयशंकर ने कहा कि भारत अब अफगानिस्तान में छह नई परियोजनाओं के लिए प्रतिबद्ध है, जिनके विवरण की घोषणा शीघ्र की जाएगी। भारत ने इसके अलावा काबुल स्थित इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट आफ चाइल्ड हेल्थ में एक थैलीसिमिया केंद्र, एक आधुनिक डायग्नोस्टिक केंद्र, हीटिंग सिस्टम लगाने के अलावा बगरामी जिले में 30 बिस्तरों वाला एक अस्पताल, काबुल में एक आन्कोलाजी केंद्र और एक ट्रामा केंद्र, तीन अन्य प्रांतों में पांच मातृ स्वास्थ्य क्लीनिकों के निर्माण का एलान किया है। 20 एंबुलेंस भी दी गई हैं, जिनमें से पांच जयशंकर ने तत्काल मुत्तकी को सौंप दीं। भारत एमआरआइ व सीटी स्कैन मशीनें भी उपलब्ध कराएगा। भारत ने अफगानी क्रिकेट को और बढ़ावा देने की बात कही। भारत की मदद से पहले से चलाई जा रही परियोजनाओं को भी तेजी से शुरू किए जाने पर सहमति बनी है। India Afghanistan
अफगान शरणार्थियों पर जताई चिंता
जयशंकर ने जबरन वापस भेजे गए अफगान शरणार्थियों की दुर्दशा पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि उनकी गरिमा व आजीविका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत उनके लिए आवास निर्माण में मदद करने और उनके जीवन के पुनर्निर्माण के लिए सहायता जारी रखने को तैयार है। साथ ही भूकंप प्रभावित कुनार व ननगाहर इलाकों में आवासों के पुनर्निर्माण में मदद की पेशकश भी की। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान दोनों को व्यापार और वाणिज्य बढ़ाने में रुचि है और उन्होंने काबुल व नई दिल्ली के बीच अतिरिक्त उड़ानें शुरू होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। वार्ता में भी दोनों पक्षों ने भारत-अफगानिस्तान हवाई माल ढुलाई गलियारे के शुरू होने का स्वागत किया। जयशंकर ने साथ ही घोषणा की कि भारत अफगान छात्रों के लिए भारतीय विश्वविद्यालयों में अध्ययन के अवसर बढ़ाएगा। India Afghanistan
अफगानिस्तान भी भारत में भेजेगा अपने राजनयिक
मुत्तकी ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए चरणबद्ध प्रयासों के तहत अफगानिस्तान भी अपने राजनयिक भारत में भेजेगा। उन्होंने कहा कि वह वापस जाकर लोगों का चयन करेंगे। अभी अफगानी दूतावास में पूर्ववर्ती अशरफ घनी सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी कार्यरत हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अफगानिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा समेत किसी भी आतंकी समूह की मौजूदगी नहीं है। कहा, “इस्लामिक अमीरात के अलावा किसी और के नियंत्रण में एक इंच भी जमीन नहीं है।
ये समूह और तंजीम अफगानिस्तान में मौजूद नहीं हैं, ये पिछले चार वर्षों में अफगानिस्तान छोड़ चुके हैं। हमने जिनके विरुद्ध आपरेशन चलाए, उन्हें खत्म कर दिया।” मुत्तकी ने भारत को इस क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण देश बताया और कहा कि भारत और अफगानिस्तान को चाबहार बंदरगाह के विकास में आ रही बाधाओं से निपटने के लिए अमेरिका से मिलकर बात करनी चाहिए। उन्होंने वाघा सीमा के जरिये दोनों देशों के बीच व्यापार की भी पैरवी की। India Afghanistan
अफगानिस्तान में हैं दर्जनभर देशों के दूतावास
काबुल में चीन, रूस, ईरान, पाकिस्तान और तुर्किये सहित लगभग एक दर्जन देशों के दूतावास कार्यरत हैं। हालांकि रूस एकमात्र ऐसा देश है जिसने औपचारिक रूप से तालिबान प्रशासन को मान्यता दी है।
















Discussion about this post