अनंत चतुर्दशी से शुरू होगी रामनगर की रामलीला

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Ramnagar Ramlila

 BNP NEWS DESK।    Ramnagar Ramlila  लीला प्रेमियों के इंतजार की घड़ियां खत्म हुई। शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी की पावन तिथि से विश्वप्रसिद्ध रामलीला का मंचन शुरू होगा। शुरूआत रावण के जन्म, दिग्विजय, क्षीर सागर की झांकी, देव स्तुति और आकाशवाणी के मंचन से होगी। 200 साल पुरानी इस परंपरा के निर्वहन के लिए उत्साह संग तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

इस बार पांचों प्रमुख पात्र पहली बार करेंगे रामलीला का मंचन

 

इस वर्ष की रामलीला के पांच प्रमुख पात्र पहली बार मंचन करेंगे।  इस बार श्रीराम की भूमिका में मिर्जापुर के कक्षा-आठ के छात्र अंश पाण्डेय नजर आएंगे, जबकि जानकी का स्वरूप पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर के कक्षा-सात के छात्र रुद्र उपाध्याय धारण करेंगे।

वहीं, भरत की भूमिका वाराणसी के श्रेयांश उपाध्याय, लक्ष्मण की भूमिका महमूरगंज के सूरज पाठक और शत्रुघ्न की भूमिका मिर्जापुर के शिवांशु उपाध्याय निभाएंगे। संस्कृत के श्लोकों के स्पष्ट उच्चारण और रामचरितमानस की चौपाइयों के संबोधन के आधार पर इन बालकों का चयन किया गया। इन चयनित बालकों को दो महीनों से बलुआ घाट धर्मशाला और काली मंदिर प्रांगण में कठिन अनुशासन और व्यास जी के निर्देशन में गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

रामनगर के चार किलोमीटर के दायरे में होगा 31 प्रसंगों का मंचन

88 दिनों तक इन स्वरूपों को इसी धार्मिक मर्यादा के साथ जीवन-व्यापन करना होता है। यह घुमंतू रामलीला किसी एक मंच तक सीमित न होकर पूरे रामनगर में लगभग चार किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है। जनकपुर, पंचवटी, अयोध्या से लेकर लंका तक के स्थल अलग-अलग जगहों पर स्थापित हैं।

कुल 31 प्रसंगों का मंचन

भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी से शुरू होकर आश्विन शुक्ल चतुर्दशी तक चलने वाली इस लीला में कुल 31 प्रसंगों का मंचन होगा। लीला के दौरान सोहर गायन, राम बारात, विवाह और खिचड़ी जैसे प्रसंगों में समाज की पारंपरिक लोक-रीतियों और महिलाओं के गीतों को विशेष स्थान दिया जाएगा।

 

इस ऐतिहासिक आयोजन की निर्विघ्न समाप्ति के लिए पूरे एक माह तक दुर्गा मंदिर में देवी सप्तशती का पाठ भी होगा।
ट्रस्ट के विशेष कार्याधिकारी डा. जयप्रकाश पाठक ने बताया कि वर्षा या अन्य किसी विशेष कारण जिस दिन की लीला संपन्न नहीं होगी, उसे अगले एक या दो दिनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

 

मूल और प्राचीन स्वरूप अभी भी बरकरार

उन्नीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में तत्कालीन काशिराज महाराज उदित नारायण सिंह द्वारा शुरू कराई गई यह लीला आज भी अपने मूल और प्राचीन स्वरूप में जीवित है। बाद में महाराज ईश्वरी नारायण सिंह ने संत काष्ठ जिह्वा स्वामी से शोधन कराकर गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस के आधार पर इसके संवादों को वर्तमान स्वरूप दिया।

बिन माइक हजारों की भीड़ में गूंजेंगे संवाद

आधुनिकता के दौर में भी यह लीला पूरी तरह से कृत्रिमता से मुक्त है। यहां न तो बिजली की चकाचौंध रोशनी का प्रयोग होता है और न ही संवादों के लिए लाउडस्पीकर का। मशालों और पेट्रोमैक्स की रोशनी में बिना किसी माइक के बोले जाने वाले संवाद हजारों की भीड़ में गूंजते हैं और श्रद्धालुओं के दिलों में उतर जाते हैं। यही कारण है कि इसे महज एक अभिनय नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुष्ठान माना जाता है।

चल रहा दोहों का पाठ

दो अगस्त को प्रथम गणेश पूजन के साथ ही चयनित पंचस्वरूपों का प्रशिक्षण आरंभ हुआ। द्वितीय गणेश पूजन 14 सितंबर को हुआ। इसके बाद से चौराहे स्थित पक्की पर दस दिनों तक 175 दोहों का पाठ किया जा रहा है।

प्रथम सात दिनों का कार्यक्रम

25 सितंबर- रावण का जन्म, दिग्विजय, क्षीर सागर की झांकी, देव स्तुति और आकाशवाणी का मंचन किया जाएगा।
26 सितंबर- श्री अवध में शृङ्गीऋषिकृत यज्ञ, श्रीरामजी आदि का जन्म, विराट दर्शन, बाललीला और यज्ञोपवीत मृगया का आयोजन होगा।
27 सितंबर- विश्वामित्र-आगमन, ताड़का-सुबाहु वध, मारीच निरसन, अहिल्या तारण, गंगा-दर्शन और मिथिला प्रवेश तथा श्रीजनक-मिलन का मंचन किया जाएगा।
28 सितंबर- श्री जनकपुर-दर्शन और अष्ट सखी-संवाद ‘फुलवारी’ के दृश्य की प्रस्तुति।
29 सितंबर- धनुष यज्ञ और परशुराम संवाद का भावपूर्ण मंचन होगा।
30 सितंबर- श्री अवध से बारात का प्रस्थान और जनकपुर में विवाह संपन्न कराया जाएगा।
01 अक्टूबर- जनकपुर से बारात की विदाई, अवध में परिछन तथा शयन की झांकी दिखाई जाएगी। Ramnagar Ramlila

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Author: BNPNEWS

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