BNP NEWS DESK। Green Firecrackers बाजार में ग्रीन पटाखे को लेकर बड़े- बड़े दावे किए जा रहे हैं। इसको लेकर ज्ञान गंगा भी खूब बह रही है लेकिन हकीकत कुछ अलग की कहानी सुना रही है। ग्रीन पटाखे के चक्कर में पटाखा पूरी तरह रेड बाजार में तब्दील है।ग्राहक की शिकायत है कि ग्रीन पटाखे महंगे दाम पर मिल रहे हैं लेकिन इसके ज्वलनशीलता व धुएं सामान्य पटाखों से ज्यादा तकलीफ दे रहा है। यही आलम पिछली बार भी रहा।
Green Firecrackers दीपावली पर आतिशबाजी के इस असर को कम करने के लिए ग्रीन पटाखों का विकल्प सामने आया, लेकिन वाराणसी के बाजार में आज भी इसकी उपलब्धता और पहचान दोनों सवालों के घेरे में हैं।
ग्रीन पटाखे डेढ़ से दोगुने महंगे, बाजार में उपलब्धता कम
ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों से डेढ़ से दो गुना तक महंगे हैं। स्थानीय स्तर पर इनका निर्माण नहीं होने और सीमित आपूर्ति के कारण बाजार में उपलब्धता भी कम है।
कुछ दुकानदार सामान्य पटाखों को ग्रीन बताकर बेच रहे हैं। ऐसे में ग्राहकों के लिए असली और नकली की पहचान करना आसान नहीं है।
30 प्रतिशत तक कम उत्सर्जन, फिर भी धुआं
ग्रीन पटाखों की रासायनिक संरचना में बदलाव कर सूक्ष्म कणों और कुछ गैसों का उत्सर्जन घटाया जाता है। सीएसआइआर-नीरी के मानकों के अनुसार पारंपरिक पटाखों की तुलना में पीएम उत्सर्जन में कम से कम 30 प्रतिशत कमी का मानक है।
स्वास, स्टार और सफल इसकी प्रमुख श्रेणियां हैं। हालांकि ग्रीन का अर्थ प्रदूषण मुक्त होना नहीं है। इनके जलने पर भी धुआं और आवाज निकलती है। पटाखों से पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कणों के साथ सल्फर डाइआक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड और कार्बन मोनोआक्साइड जैसी गैसें भी निकल सकती हैं। इनकी मात्रा पटाखे के प्रकार और रासायनिक संरचना पर निर्भर करती है। Green Firecrackers
प्रदूषक हवा से कहां जाते
पटाखों से निकली गैसें हमेशा हवा में नहीं रहतीं। सल्फर डाइआक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड रासायनिक प्रतिक्रियाओं से दूसरे कणों में बदल जाते हैं। कुछ कण बारिश और नमी के साथ जमीन व जलस्रोतों तक पहुंचते हैं। धातुओं के कण मिट्टी और पानी में जमा हो सकते हैं। पेड़ कुछ धूल और प्रदूषक कणों को पत्तियों पर रोकते हैं, लेकिन सभी जहरीली गैसों को सोखकर खत्म नहीं कर सकते। Green Firecrackers







