कामकाज पर चुनाव आयोग में बढ़ी खींचतान

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Election Commission

 BNP NEWS DESK।   Election Commission  अब तक विपक्ष के निशाने पर रहे चुनाव आयोग में भीतर से ही सवाल उठने लगे हैं। चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर आयोग में अंदरूनी खींचतान इस कदर बढ़ गई है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 से ज्यादा बार (एक ही दिन में चार बार) फैसलों और आदेशों पर लिखित में आपत्ति दर्ज कराई है।

 

10 महीने में 14 से ज्यादा बार दोनों चुनाव आयुक्तों ने दर्ज कराईं आपत्तियां

 

संधू व जोशी के मुताबिक उनकी जानकारी के बिना ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कई फैसले लिए और आदेश जारी किए गए। इनमें मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने, फार्म-छह में बदलाव तथा मतदाता सूची के डाटाबेस पर नियंत्रण को केंद्रीयकृत करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। जुलाई 2026 में विवाद ज्यादा बढ़ा तो दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र भी लिखा था। एक प्रकाशित रिपोर्ट में यह राजफाश होने के बाद सियासी तूफान भी खड़ा हो गया है। सत्ता व विपक्ष एक-दूसरे पर हमलावर हैं।

टकराव मुख्य रूप से एसआईआर के फार्म-6 को लेकर था। इसमें नए वोटर के लिए भी अपने पिता और दादा की मतदाता सूची की जानकारी मांगी गई थी। आयुक्तों की आपत्ति थी कि ऐसा बदलाव तभी किया जा सकता है जब कानून मंत्रालय की ओर से गजट में ऐसा संशोधन किया जाए। जोशी ने फार्म-6 में बगैर सरकार की मंजूरी के बदलाव पर आपत्ति जताई थी।

संधू ने भी इसका समर्थन किया था। हालांकि आयोग के सूत्रों का कहना है कि यह आरोप ही गलत है क्योंकि फार्म-6 में संशोधन किया ही नहीं गया। हां, उसके साथ एक घोषणापत्र संलग्न किया गया।

 

दूसरा बड़ा सवाल नए एकीकृत वन स्टाप डिजिटल प्लेटफार्म यानी ईसीआइनेट, जिसमें ईआरओ नेट शामिल है, को केंद्रीकृत करके उससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले ईआरओ (मतदाता पंजीकरण अधिकारी) और एईआरओ (सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी ) जैसे अधिकारियों को दूर कर दिया गया या फिर उनके अधिकारों को सीमित कर दिया गया।

 

जबकि आयोग की सफाई है कि ईसीआइनेट अनधिकृत छेड़छाड़ रोकने के लिए साइबर सुरक्षा प्रोटोकाल के तहत काम करता है। इसलिए राष्ट्रीय डाटाबेस में मानक साइबर सुरक्षा उपाय किए गए हैं। अधिकृत अधिकारियों को शक्ति प्रदान है। गोवा में जो व्यवधान आया था, वह तकनीकी खामियों के कारण था।

जानकारी के मुताबिक चुनाव आयुक्त संधू व जोशी ने काम-काज के बंटवारे से जुड़े विवाद पर कैबिनेट सचिव से अपने अधिकारी मनीष गर्ग की शिकायत भी की।

चुनाव आयोग ने कहा- एसआइआर समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से

अंदरूनी मतभिन्नता ही नहीं, अनभिज्ञता और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तरफ से एकतरफा कुछ फैसले लिए जाने की खबरों के बाद चुनाव आयोग ने विज्ञप्ति जारी कर सफाई दी और अंदरूनी मतभेदों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ विषयों पर विचारों में मतभिन्नता होना गलत नहीं है लेकिन हाल के महीनों में देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) समेत 40 नई पहल शुरू हुईं और सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। यह और बात है कि देर रात तक दोनों चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी की ओर से कोई व्यक्तिगत सफाई नहीं आई।

संस्थागत परंपराओं के तहत काम

आयोग ने कहा कि वह एक संवैधानिक संस्था है और संविधान के अनुच्छेद 324, वैधानिक नियमों तथा स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करता है। उसने कहा कि आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक निकाय के रूप में कार्य करता है। आयोग के सभी कार्य कानूनों और आयोग के निर्देशों के अनुरूप किए गए हैं। आयोग ने कहा कि केवल तीनों निर्वाचन आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी चुनाव प्रणाली में सुधार के लिए अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह अधिकृत है।

 

आयोग के सूत्रों का कहना है कि कई मुद्दों पर चर्चा के दौरान मतभिन्नता हो सकती है। लेकिन अधिकतर मुद्दों पर अंतिम निर्णय में सर्वसम्मति थी। यह और बात है कि आयोग की ओर से इसके साक्ष्य के तौर पर कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। सूत्रों ने कहा कि एसआइआर की पारदर्शिता पर कोई सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी मई 2026 के निर्णय में एसआईआर की प्रक्रिया को जांचा था और सही पाया था। वहीं एसआइआर पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले भी नौ बार हो चुका है। Election Commission

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Author: BNPNEWS

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