BNP NEWS DESK। US-Iran Peace Talks करीब छह सप्ताह से जारी युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों के बीच अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेताओं के बीच शनिवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू हुई ऐतिहासिक सीधी शांति वार्ता होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर अटक गई।
US-Iran Peace Talks रायटर के अनुसार, ईरान ने कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर जरूरत से ज्यादा अपेक्षाएं कर रहा है, जो तेहरान को स्वीकार्य नहीं है। ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना नियंत्रण बनाए रखने और जहाजों से शुल्क वसूलने पर अड़ा है, जबकि अमेरिकी पक्ष इसके लिए तैयार नहीं है।
बताया गया कि ईरानी वार्ताकार “संयुक्त नियंत्रण” जैसे प्रस्तावों को भी खारिज कर रहे हैं। हालांकि, 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच पहली बार हो रही आमने-सामने की बातचीत में कुछ शुरुआती प्रगति के संकेत भी मिले हैं।
लेबनान को लेकर आंशिक सहमति बनती दिखी, जिसमें इजरायली सैन्य कार्रवाई को दक्षिणी लेबनान तक सीमित करने और बेरूत पर हमले रोकने की संभावना जताई गई है। ईरान की फ्रीज संपत्तियों को मुक्त करने पर भी आगे बढ़ने के संकेत मिले हैं। US-Iran Peace Talks
दोनों पक्षों के बीच तकनीकी स्तर पर भी बातचीत आगे बढ़ी है। विशेषज्ञों ने लंबी चर्चा के बाद लिखित प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया। ईरानी सरकार के अनुसार, आर्थिक, सैन्य, कानूनी और परमाणु मामलों से जुड़ी समितियां वार्ता में शामिल हैं और तकनीकी विवरणों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
ईरान के साथ युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत जारी है
व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत जारी है। वहीं, कतर के परिवहन मंत्रालय ने कहा है कि रविवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक सभी प्रकार के समुद्री जहाजों और पोतों के लिए समुद्री आवाजाही फिर से शुरू कर दी जाएगी। US-Iran Peace Talks
शांति वार्ता में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकाफ और जेरेड कुशनर की टीम ने ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची से पहले दौर में देर रात तक सकारात्मक माहौल में चर्चा की। पाकिस्तान की ओर से उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इशाक डार, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी शामिल हुए।
ईरान व उसकी प्राक्सी ताकतों के साथ संघर्ष जारी रहेगा
एपी के अनुसार, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि वह लेबनान के साथ शांति समझौता चाहते हैं, लेकिन ईरान व उसकी प्राक्सी ताकतों के साथ संघर्ष जारी रहेगा। इस बीच, अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसके दो डेस्ट्रायर युद्धपोत, यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन और यूएसएस माइकल मर्फी, पहली बार होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरे हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ये जहाज वहां बिछी बारूदी सुरंगों का पता लगाकर उन्हें नष्ट करने की तैयारी में हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही दावा कर चुके हैं कि ईरान के 28 माइन बिछाने वाले जहाजों को नष्ट किया जा चुका है। हालांकि ईरान ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि उसने एक अमेरिकी युद्धपोत को चेतावनी देकर वापस लौटने पर मजबूर किया।
एएनआइ के अनुसार, ईरान ने वार्ता से पहले स्पष्ट किया था कि होर्मुज पर नियंत्रण, फ्रीज संपत्तियों की रिहाई, युद्ध क्षति का मुआवजा और क्षेत्रीय युद्धविराम उसकी प्राथमिकताएं हैं। लेबनान में युद्धविराम उसकी प्रमुख मांगों में शामिल है, जहां इजरायली हमले जारी हैं। जमीनी स्तर पर तनाव बरकरार है।
बेरूत के ऊपर ड्रोन और लड़ाकू विमानों की गतिविधियां देखी गईं, जबकि हिज़्बुल्ला ने जवाबी हमलों का दावा किया। इस्लामाबाद में वार्ता के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और शहर में आंशिक लाकडाउन जैसे हालात हैं। अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच पहुंचे थे और उनका स्वागत उप प्रधानमंत्री इशाक डार, सेना प्रमुख आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने किया।
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के प्रमुख बिंदु
– लेबनान में युद्धविराम- ईरान की मांग, लेबनान में युद्धविराम हो। वह इसे शांति वार्ता का हिस्सा बता रहा, जबकि अमेरिका-इजरायल इसे अलग मुद्दा मान रहे।
– प्रतिबंध हटे, संपत्तियां छोड़ी जाएं: ईरान चाहता है कि अमेरिका उसकी फ्रीज की हुई संपत्तियां छोड़े और आर्थिक प्रतिबंध हटाए। अमेरिका बदले में परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को खत्म करने पर अड़ा।
– होर्मुज पर नियंत्रण: ईरान इस पर अपने अधिकार की मान्यता और जहाजों पर टोल लगाना चाहता है। अमेरिका की इस जलमार्ग में निर्बाध आवागमन की मांग।
– युद्ध की क्षतिपूर्ति: ईरान युद्ध में हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति की मांग कर रहा है। हालांकि, ट्रंप ने संकेत दिए हैं, लेकिन इस पर अभी स्पष्टता नहीं है।
– यूरेनियम संवर्धन: ईरान नागरिक हितों के लिए परमाणु कार्यक्रम में यूरेनियम संवर्धन जारी रखना चाहता है, जबकि अमेरिका इसके सख्त खिलाफ।
– मिसाइल कार्यक्रम: अमेरिका-इजरायल ईरान को मिसाइल क्षमता में कटौती को कह रहे, लेकिन तेहरान के लिए ये अस्वीकार्य।
– अमेरिकी सैन्य मौजूदगी: ईरान चाहता है सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्ति के साथ अमेरिकी सैनिकों की वापसी, जबकि ट्रंप शांति समझौते तक ऐसा करने से इन्कार कर रहे। US-Iran Peace Talks
















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