BNP NEWS DESK। Sharadiya Navratri 2025 आदिशक्ति मां दुर्गा की आराधना-उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र सोमवार से आरंभ होगा। शिव की नगरी में आदिशक्ति की आराधना के रंग निखरने लगे हैं। पंडालों व मूर्तियों का निर्माण कार्य और तेज हो गया है। सोमवार को प्रात:काल से ही घर-घर में कलश स्थापन किया जाएगा और नौ दिनों के लिए विविध धार्मििक-आध्यात्मिक अनुष्ठान आरंभ हो जाएंगे। इस बार नवरात्र में 10 दिनों का है। महानवमी एक अक्टूबर को होगी जिसमें सभी नौ दिवसीय अनुष्ठान पूर्ण होंगे।
दो अक्टूबर को विजयदशमी
Sharadiya Navratri 2025 दो अक्टूबर को विजयदशमी पर्व मनाया जाएगा। इस अवधि में तक मां के विविध स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि में सोमवार को प्रात: से लेकर पूरे दिन कभी भी कलश स्थापित किया जा सकता है क्योंकि इस बार चित्रा और वैधृति का योग नहीं है और प्रतिपदा रात्रिपर्यंत है। पूरे नवरात्र घरों में पूजन अनुष्ठान के साथ नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन-पूजन के लिए भी मंदिरों में भक्तों की कतार लगेगी।
21 सितंबर की अर्धरात्रि के बाद रात 1:23 बजे लग जाएगी और 22 सितंबर की रात 2:55 बजे तक रहेगी। ऐसे में आश्विन शुक्ल प्रतिपदा सोमवार को कलश स्थापना का याेग पूरे दिन मिल रहा है। हालांकि अनुष्ठान साधना के लिए प्रात:काल से लेकर दोपहर तक का योग अच्छा होता है। प्रात: छह बजे से आठ बजे तक और फिर 8:30 बजे से 10:30 बजे तक अत्यंत शुभ मुहूर्त है। अभिजीत मुहूर्त 11:37 बजे से 12:23 बजे तक है।
उन्होंने बताया कि इस बार चतुर्थी तिथि की वृद्धि के चलते नवरात्र 10 दिनों का होगा। प्रतिपदा और महाष्टमी का व्रत करने वाले श्रद्धालु एक अक्टूबर को दिन में 2:37 बजे के पूर्व पारण करेंगे। संपूर्ण नवरात्र का व्रत अनुष्ठान करने वाले साधकों के अनुष्ठान तो एक अक्टूबर को पूर्ण हो जाएंगे किंतु पारण दशमी में दो अक्टूबर को करेंगे।
महाषष्ठी को 28 सितंबर को सभी पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित होगी
महाषष्ठी की रात 28 सितंबर को शहर से गांव तक सभी पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित हो जाएंगी। महासप्तमी तिथि में 29 सितंबर को पंडालों में प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। महाष्टमी की रात्रि में होने वाली महानिशा पूजा 29-30 सितंबर की रात में सप्तमी युक्त अष्टमी में होगा।
संधि पूजन 30 सितंबर की मध्य रात्रि के बाद अष्टमी युक्त नवमी में किया जाएगा। एक अक्टूबर को महानवमी का व्रत होगा, दो अक्टूबर को दशहरा के दिन श्रीराम रावण का वध करेंगे और विशालकाय पुतलों का दहन कर असत्य पर सत्य की जीत का संदेश देंगे। मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।
















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