नेत्र संक्रमण की अनदेखी से बढ़ रहा आंख की टीबी का खतरा

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Ocular tuberculosis

BNP NEWS DESK।   Ocular tuberculosis  टीबी के मरीजों में आंख की टीबी (आक्यूलर टीबी) का खतरा बना रहता है। उप्र में आंख की टीबी के मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। इसकी चपेट में आए ज्यादातर मरीजों में आंख दर्द, लालपन, सूजन की समस्या मिली। ये वो मरीज थे, जो लंबे समय से कंजेक्टिवाइटिस और एलर्जिक समस्या मान घर पर ही इलाज कर रहे थे।
ये बातें होटल लिटिल शेफ सिविल लाइंस में कानपुर आप्थैल्मिक सोसाइटी के 17वें वार्षिक सम्मेलन चेन्नई के शंकरा नेत्रालय के विशेषज्ञ डा. ज्योतिर्मय बिस्वास ने कही। उन्होंने एक हजार फेफड़ों की टीबी के मरीजों पर हुए शोध का आंकड़ा प्रस्तुत किया। इसमें 1.39 प्रतिशत मरीजों की आंख की टीबी का खतरा मिला।
नोएडा की डा. मोहिता शर्मा ने चश्मा हटाने की अत्याधुनिक तकनीक ट्रांस एपिथिलियल पीआरके के 100 प्रतिशत सटीक परिणाम की जानकारी दी। बताया कि यह नो टच सर्जिकल प्रक्रिया है।
इससे विजन जाने का खतरा खत्म होता है, जो लेजर सर्जरी का सबसे अत्याधुनिक तरीका है। गूगल डाक्टर की सलाह पर खुद से खाई गई स्टेरायड आंखों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। जयपुर की डा. स्वाति तोमर ने कहा कि आंख की बीमारी की स्क्रीनिंग आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) डिवाइस से आसान हो रही है।
जयपुर के डा. सोनू गोयल ने बताया कि चश्मा हटाने की सर्जरी में नई-नई तकनीक आई है। अब बाल जितने आकार यानी दो मिलीमीटर के छेद से महज आठ से 10 सेकंड में सफलतापूर्वक सर्जरी की जा रही है। हैदराबाद के डा. जावेद अली ने कहा कि अगर रोते समय नाक से पानी नहीं आ रहा है तो यह आंख की नली की बीमारी है। बच्चों में इसकी अनदेखी से नासूर बनने लगता है। यह बिना लक्षण का नेत्र दोष है, जो बार-बार संक्रमण के कारण आंख की नली को ब्लाक करता है।

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Author: BNPNEWS

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