BNP NEWS DESK। Maithil Samaj मैथिल समाज उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक महाकुंभ महाकवि विद्यापति महोत्सव का विधिवत उद्घाटन शनिवार को नागरी प्रचारिणी सभा, में हुआ| वाराणसी के महापौर अशोक कुमार तिवारी,पूर्व मंत्री/शहर दक्षिणी के विधायक डा नीलकंठ तिवारी, पीएनबी के डीजीएम प्रभाष चन्द्र लाल,संस्था के प्रदेश अध्यक्ष निरसन कुमार झा एडवोकेट,डा अशोक कुमार ज्योति,प्रो शंकर कुमार मिश्र,डा विजय कपूर और प्रो शंकर मिश्र, सुभाष शर्मा ने कवि कोकिल विद्यापति के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का उद्घाटन किया|
मिथिला परंपरा अनुसार डा नरेंद्र ठाकुर वैदिक ने मंगलाचरण किया| दरभंगा से पधारी नन्दनी चौधरी ने विद्यापति रचित जय जय भैरवी पर मनोहारी नृत्य प्रस्तुत करके समारोह की शुरुआत की|
Maithil Samaj संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष निरसन कुमार झा, एडवोकेट ने समारोह के मुख्य अतिथि पंजाब नेशनल बैंक के डीजीएम प्रभाष चन्द्र लाल पूर्व मंत्री/शहर दक्षिणी के विधायक डा नीलकंठ तिवारी और उद्धघाटनकर्ता महापौर अशोक तिवारी को मिथिला संस्कृति के प्रतीक पाग, दुपट्टा, रूद्राक्ष की माला और महाकवि विद्यापति का चित्र भेंट कर सम्मानित किया।
मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए पंजाब नेशनल बैंक के डीजीएम प्रभाष चन्द्र लाल ने ने कहा कि महाकवि विद्यापति हिन्दी साहित्य के प्रथम कवि होने के साथ साथ मैथिली भाषा साहित्य के भी प्रथम कवि थे। मैथिली काव्य के माध्यम से विद्यापति ने मैथिल समाज को जोड़ने का काम किया।
विद्यापति का कव्य मिथिला के घर घर में गाया व सुनाया जाता है
विद्यापति का कव्य मिथिला के घर घर में गाया व सुनाया जाता है। मैथिल समाज को विद्यापति जी को आदर्श मानकर जीवन के हर क्षेत्र में संगठित होना चाहिये, जिससे कि मैथिल समाज का चहुमुखी विकास हो।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए कर्णाटक से पधारे शिक्षाविद डा सत्य नारायण मजूमदार ने कहा कि सुदूर मिथिला (बिहार) से आकर काशी में विद्यापति महोत्सव के माध्यम से अपनी कला, संस्कृति को बनाये रखना एक महान् कार्य है। Maithil Samaj
विद्यापति की रचनायें सभी जातियों, धर्मों के लोगों में समान रूप से प्रिय हैं, चाहे वो ब्राह्मण हो, ठाकुर हो, हरिजन हो, विद्यापति सभी में प्रिय थे। ऐसे महान् विभूति के काव्य से सीख लेते हुए मिथिलावासियों को एकता के सूत्र में बंधना होगा।
समारोह के मुख्य वक्ता नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ला ने कहा कि धन्य है मिथिला की भूमि जहाँ विद्यापति जैसे महाकवि पैदा हुए, विद्यापति ने अपनी रचनाओं के माध्यम से न केवल हिन्दी साहित्य बल्कि बांग्ला और मैथिली साहित्य को समृद्ध किया। मनुष्य के जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जिसको विद्यापति के काव्य ने न छुआ हो। ऐसे महाकवि के चरणों में शत् शत् नमन। Maithil Samaj
विशिष्ट अतिथि के रूप में स्नातक एमएलसी आशुतोष सिन्हा, प्रोफेसर शंकर मिश्र, दरभंगा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चन्द्र धर मलिक,दरभंगा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चक्रधर मलिक, दरभंगा से वरिष्ठ पत्रकार सुभाष शर्मा, सत्य नारायण मजूमदार उपस्थित थे|
सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ दिल्ली की प्रसिद्ध मैथिली और लोकगायिका डा सुष्मिता झा के गायन से हुआ। समारोह स्थल पर मिथिला की लोक संस्कृति से लबरेज मिथिला पेंटिंग, सिक्की पेंटिंग,पाग,मखान,पान और मिथिला साहित्य के स्टाल समारोह में चार चांद लगा रहे थे| समाज में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को मिथिला रत्न, मिथिला विभूति,यूथ आइकॉन सम्मान से सम्मानित किया गया। Maithil Samaj
झिझिया- डाला छठ संग नागरीप्रचारिणी में बिखरे मिथिला के लोक रंग
सिद्धि भट्ट,दरभंगा की लोकप्रिय नृत्यांगना पूजा मिश्रा, और मधुबनी की मृणाल मिश्र ने मिथिला का लोकनृत्य समा-चकेवा, जट-जटिन, झिझिया व लोक महापर्व छठ पर कलाकारों ने भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
समारोह का संचालन गौतम कुमार झा) ने किया, सह-संयोजक स्वागत डा अशोक कुमार ज्योति ने किया। धन्यवाद ज्ञापन संस्था के अध्यक्ष निरसन कुमार झा) ने किया। विषय स्थापना सचिव दास पुष्कर ने किया|समारोह में मुख्य रूप से सुधीर चौधरी, नटवर झा,नन्द कुमार सिंह,मनोज मिश्र, नीलकमल झा,डा आलोक चौधरी, नरेन्द्र ठाकुर वैदिक आदि लोग उपस्थित रहे। Maithil Samaj
















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