BNP NEWS DESK। Varanasi Municipal Corporation काशी के मठों, मंदिरों और संस्कृति के संरक्षण के लिए आदि काल से राजाओं, महाराजाओं ने पूरी शक्ति के साथ काम किया है। अरबों, तुर्कों एवं मंगोलों के दौर में मन्दिर तोड़े जाने लगे, हिन्दू धर्म स्थलों को निशाना बनाया जाने लगा। किसी तरह वो दौर खत्म हुआ, सनातन धर्म स्थल मजबूती से खड़े हुए।
अब अचानक नगर निगम वाराणसी को सारा कर मठों और मंदिरों से वसूलना है। वसूली अधिकारियों और वाराणसी नगर निगम को काशी की महान सांस्कृतिक विरासत का ध्यान नहीं रहा और न ही इनके सम्मान की चिंता।
Varanasi Municipal Corporation काशी के प्राचीन मठ पातालपुरी मठ को नोटिस पकड़ा दिया, वसूली का नहीं सीधे कुर्की का। सिर्फ पातालपुरी नहीं बल्कि जागेश्वर मठ के साथ अन्य कई मठों को। यही नहीं नोटिस पर बाकायदा महंत का नाम भी अंकित किया गया है ताकि सनातन धर्म और संस्कृति को अपमानित किया जा सके।
इस अत्याचार और नगर निगम द्वारा किये गए अपमान से क्षुब्ध मठों के मठाधीशों एवं प्रमुख संतों ने पातालपुरी मठ में जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज के नेतृत्व में बैठक कर नाराजगी व्यक्त की। संतों ने सर्वसम्मति से यह कह दिया कि इस तरह अपमानित करने वाला नगर निगम काशी का नया औरंगजेब है।
उसकी दृष्टि मंदिरों और मठों की जमीनों पर है। वह सोच रहा है कि मठों और मंदिरों पर इतना कर लाद दो कि महंत, पुजारी पलायन के लिए मजबूर हो जाएं। फिर उसकी जमीन बेचकर वहां से कमीशन वसूल किया जाए।
देश भर के मठों को पत्र लिखा जाएगा और जनता को रामपाती लिखकर बताया जाएगा
संतों ने यह फैसला किया कि देश भर के मठों को पत्र लिखा जाएगा और जनता को रामपाती लिखकर बताया जाएगा कि इस औरंगजेब ने संतों को किस तरह अपमानित किया है।
काशी के मंदिरों और मठों पर जजिया लगाने वाले नगर निगम को कभी क्षमा नहीं किया जाएगा, नगर निगम भंग कर सारे अधिकारियों, कर्मचारियों के आय की जांच की जाए।
इस अवसर पर जगदगुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि संतों का सम्मान तो छोड़िए, इसने खुलेआम अपमान किया है। नगर निगम का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। जिस कार्यक्रम में नगर निगम का कोई पदाधिकारी जाएगा, उसमें कोई संत भाग नहीं लेगा।
नए औरंगजेब के खिलाफ कल से आंदोलन शुरू
इस नए औरंगजेब के खिलाफ कल से आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। जजिया कर लगाकर मठों और मंदिरों को अपमानित करने वाले नगर निगम को कत्तई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस आशय की चिट्ठी प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री के संज्ञान में हो तो ठीक है अन्यथा वसूली और लुटेरों औरंगजेब के फरमान के खिलाफ हम सड़कों पर उतरेंगे।
संतों के आक्रोश को देखते हुए सामाजिक संगठनों, छात्र संगठनों ने भी संतों का साथ देने का फैसला किया है। नगर निगम की यह गलती कितना बड़ा रूप लेगी यह तो वक्त बताएगा लेकिन अधिकारियों की मनमानी और हिन्दू प्रतीकों, धर्म स्थलों के प्रति नफरत की नीति सामने आ गयी है।
बैठक में महंत डॉ० श्रणव दास, महंत अवध बिहारी दास, महंत शिवदास, महंत संत दास, महंत सियाबल्लभ शरण दास, महंत सियाराम दास, महंत शिवकुमार दास, महंत गोविन्द दास, महंत अवध किशोर दास, महंत राघव दास आदि प्रमुख संत उपस्थित रहे। Varanasi Municipal Corporation
















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