BNP NEWS DESK । Hussaini Bhai परमाणु प्रतिष्ठानों की जासूसी के आरोप में गिरफ्तार अख्तर कुतुबुद्दीन हुसैनी व आदिल हुसैनी भाइयों के पास बड़ी संख्या में देश व विदेश के फर्जी दस्तावेज मिले हैं। इससे भारतीय जांच एजेंसियां हैरान हैं।
Hussaini Bhai दोनों भाइयों पर भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र का फर्जी विज्ञानी बनकर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के लिए जासूसी करने का आरोप है। दोनों भाई 2019 से 2024 के बीच आठ बार पाकिस्तान जा चुके थे। जांच एजेंसियां दोनों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि वे पाकिस्तान क्यों गए थे। उन्होंने आइएसआइ के लिए भारतीय परमाणु प्रतिष्ठानों की क्या जासूसी की है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आदिल हुसैनी, जबकि मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अख्तर हुसैनी को गिरफ्तार किया था। अख्तर के पास से पाकिस्तान का एक सिमकार्ड भी मिला। अख्तर से पूछताछ करने के लिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की एक टीम मुंबई भी गई है।
खुद को लंदन का नागरिक बताकर किया गुमराह
सूत्रों के मुताबिक, अख्तर पहले जांच एजेंसियों को गुमराह करता रहा कि वह लंदन का नागरिक है। उसके पास से अलेक्जेंडर पाल्मर नाम से भारतीय विज्ञानी होने के नकली पासपोर्ट, पैन कार्ड, आधार कार्ड आदि कई दस्तावेज मिले हैं।
वह खुद को विदेशी पत्रकार भी बताता था और भारतीय विज्ञानी बनकर कई संस्थानों में आता-जाता था। दोनों भाइयों के ठिकानों से कई नकली पहचान पत्र, सिमकार्ड व विदेश की यात्रा करने के साक्ष्य मिले हैं। अख्तर से पूछताछ के आधार पर उसके करीबी मुजफ्फर अली को भी मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वह जमशेदपुर का रहने वाला है। उसके पास से विदेशी मुद्रा भी मिली है। Hussaini Bhai
कई कंपनियों व विदेशी खातों से संपर्क की मिली जानकारी
पुलिस का कहना है कि अख्तर लंबे समय से मुंबई में अंधेरी के जुहू सौर आइलैंड स्थित एक फ्लैट में पत्नी व बेटे के साथ रह रहा था। दोनों भाइयों के ठिकानों से बरामद दस्तावेजों को फोरेंसिक लैब भेजा गया है।
दस्तावेजों और तकनीकी जांच में अख्तर कई कंपनियों व विदेशी खातों से जुड़ा मिला है। दोनों भाइयों के पास कई देशों के सिमकार्ड मिले हैं। अख्तर से जो तीन पुराने मोबाइल फोन मिले हैं, उनमें कई देशों के सिमकार्ड और मेमोरी कार्ड मिले। मोबाइल में पाकिस्तान और यूएई के कई लोगों के फोन नंबर भी हैं।
जाली प्रमाणपत्र भी बरामद
अख्तर के पास पाल्मर के नाम से कोटक महिंद्रा बैंक का एनआरआइ खाता, एसबीआइ का क्रेडिट कार्ड व कई कंपनियों के मैनेजर के तौर पर फर्जी पहचान पत्र भी मिले हैं। इसके अलावा टाटा हार्ड वेयर और विदेशी विश्वविद्यालय के नाम से जाली प्रमाणपत्र भी बरामद किए गए हैं। जांच में सामने आया है कि पाल्मर नाम से उसने वर्ष 2000 में लंदन के एक विश्वविद्यालय से एमबीए का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया था। उसके नाम पर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का एक प्रमाणपत्र और जमशेदपुर के गांधी एक्सप्रेस एंड कंप्यूटर टाइपिंग इंस्टीट्यूट का प्रमाणपत्र भी मिला है। उसके कुछ दस्तावेज डा. कुतुबुद्दीन अहमद के नाम से हैं। Hussaini Bhai
















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