BNP NEWS DESK। Rajendranath Lahiri आजादी की लड़ाई में बनारस के राजेंद्र नाथ लाहिड़ी की भी अहम भूमिका थी। नौ अगस्त 1925 को पं. राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में जिन क्रांतिकारियों ने रेल से जा रहे सरकारी खजाने को लूट लिया था, उनमें राजेंद्र नाथ भी शामिल थे। काकोरी कांड केस में उन्हें न केवल जेल की हवा खानी पड़ी, बल्कि इसी कांड में उन्हें 17 दिसंबर 1927 को गोंडा जेल में फांसी भी हुई। राजेंद्र नाथ लाहिड़ी सच्चे अर्थों में वाराणसी के क्रांतिकारी जिलापति थे। राजेंद्र नाथ का जन्म 29 जून 1901 को बंगाल के पबना जिले में एक जमींदार परिवार में हुआ था। उनके पिता क्षितिमोहन लाहिड़ी एक बड़े जमींदार थे। वर्ष 1909 में राजेंद्रनाथ लाहिड़ी का परिवार बनारस आ गया।
आल इंडिया यूथ लीग, वाराणसी की ओर से काकोरी कांड के अमर शहीद राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी के 124 वें जन्मदिन पर रविवार को वाराणसी के देवनाथपुरा स्थित पण्डित नीलकण्ठ शास्त्री जी के जगधात्री बाड़ी में एक ‘स्मृति-सभा’ का आयोजन हुआ। सभी का स्वागत करते हुए कार्यक्रम संयोजक संजय भट्टाचार्य, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, आल इंडिया यूथ लीग ने कहा कि बनारस में दशाश्वमेध रोड पर राजेंद्रनाथ लाहिड़ी का मकान था। वहीं उनके बड़े भाई जितेंद्रनाथ लाहिड़ी की होम्योपैथी की दुकान भी थी। उनके इसी मकान पर क्रांतिकारियों की अक्सर बैठकें होती रहती थीं। बैठकों में चंद्रशेखर आजाद, कुंदनलाल गुप्त, शचींद्रनाथ बख्शी, मन्मथनाथ गुप्त सरीखे क्रांतिकारी एकत्र होते थे। उस समय राजेंद्र काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विद्यार्थी थे। बीए, एमए उन्होंने बीएचयू से किया था। उन्हें इतिहास व अर्थशास्त्र विषय से विशेष लगाव था।
क्रांतिकारियों की मौजूदगी में राजेंद्रनाथ लाहिड़ी के मकान में जीवंतता का माहौल व्याप्त रहता था। गंभीर बातचीत, राजनीतिक और समकालीन महत्व के ज्वलंत मुद्दों पर संवाद के साथ-साथ हंसी-मजाक का दौर भी घंटों चलता रहता था। इस दौरान क्रांतिकारी शचींद्रनाथ बख्शी ने बनारस में युवाओं के शारीरिक प्रशिक्षण और व्यायाम के लिए सेंट्रल हेल्थ यूनियन नामक संस्था बनाई। इसका उद्देश्य युवाओं में राजनीतिक चेतना पैदा करना व क्रांतिकारी विचारधारा के प्रति आकर्षण पैदा करना भी था। राजेंद्र नाथ, मन्मथनाथ गुप्त, चंद्रशेखर आजाद, कुंदनलाल गुप्त भी सेंट्रल हेल्थ यूनियन से जुड़ गए।
बनारस बार के पूर्व मुख्यमंत्री नित्यानंद राय, प्रोफेसर सुब्रता भट्टाचार्य, डॉक्टर टी. के. लाहिड़ी, सौरभ चक्रवर्ती, देबाहुती भट्टाचार्य, इलाहाबाद हाईकोर्ट के जोयेन्ट रजिस्ट्रार जयन्त चटर्जी, राजेन्द्र चौधरी, सोनिया घटक, संजय अधिकारी एडवोकेट, सोनिया कपूर, डा. एस. के. भट्टाचार्य, अनील बन्धु भट्टाचार्य, श्रीमती झुम्पा ने संबोधित किया। संचालन हनुमान प्रसाद एडवोकेट।
















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