BNP NEWS DESK। Kashi Tax Conclave काशी टैक्स कान्क्लेव-2026 में कर कानून में बदलाव के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल और जीएसटी पर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति श्री पीयूष अग्रवाल ने कहा कि तकनीक न्याय का विकल्प नहीं हो सकती। न्यायिक निर्णय में मानवीय विवेक, कारणयुक्त विचार और विधि के स्थापित सिद्धांत जरूरी हैं।
कर कानून में बदलाव के बीच पेशेवरों को सतर्क रहने की नसीहत
Kashi Tax Conclave आल इंडिया फेडरेशन आफ टैक्स प्रैक्टिशनर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष वेंकट रमणी ने एआई से तैयार नोटिस और जवाब को बिना जांच इस्तेमाल करने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ तथ्यों की समझ, विधिक विश्लेषण और पेशेवर विवेक जरूरी है। न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला ने कहा कि बदलते आर्थिक और विधिक परिवेश में अधिवक्ताओं तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को लगातार अपना ज्ञान अद्यतन करना होगा।
तकनीकी सत्र में डा. गिरीश आहूजा ने आयकर कानून, ट्रस्ट, पंजीकरण, विदेशी अंशदान और 80जी से जुड़े प्रावधानों पर चर्चा की। सीए बिमल जैन ने जीएसटी की धारा 16(2)(c) के तहत क्रेता की जिम्मेदारी का मुद्दा उठाया। Kashi Tax Conclave
जीएसटी मांग और अपील में प्री-डिपाजिट की मुश्किलें भी उठीं
उन्होंने कर मांग, पेनल्टी और अपील के लिए प्री-डिपाजिट से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतों पर भी चर्चा की। कार्यक्रम में इनकम टैक्स बार एसोसिएशन, वाराणसी के अध्यक्ष संजय कुमार वर्मा, महामंत्री वरुण कुमार सिंह, उपाध्यक्ष राजीव कुमार श्रीवास्तव, अरविंद शुक्ला, असीम जफर, हर्ष सिंह और कान्फ्रेंस ट्रेजरर निमेश बी. शाह मौजूद रहे। Kashi Tax Conclave







