BNP NEWS DESK। paper leak राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षाओं को हर छात्र के लिए समान बनाने, स्वच्छ रखने और गड़बडियों को रोकने के लिए जिस नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) का गठन किया गया है, आज वही गड़बड़ियों का गढ़ बन गई है। हाल में एक के बाद एक लगातार तीन परीक्षाओं यानी नीट-यूजी, यूजीसी-नेट और बीएड प्रवेश परीक्षा में सामने आईं गड़बड़ियां इसके उदाहरण हैं। जिसमें न सिर्फ लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर है।
paper leak बल्कि एनटीए की विश्वसनीयता एवं क्षमता भी सवालों के घेरे में है। पूरी जांच के बाद तो परतें खुलेंगी ही, लेकिन एनटीए पर उठ रहे सवालों के पीछे सबसे बड़ी वजह है निजी एजेंसियों को ठेका व्यवस्था, जिसमें परीक्षा से लेकर मानव संसाधन तक सब कुछ ठेके और आउटसोर्सिंग पर है।
एनटीए में ऐसी निजी एजेंसियों का प्रवेश हो गया जिनके पास अनुभव की कमी
वर्ष 2017 में बड़े उद्देश्य के साथ गठित एनटीए के शुरुआती कुछ वर्ष ठीक रहे। दरअसल तीन-चार वर्ष पहले तक एनटीए के जरिये सारी परीक्षाओं का जिम्मा एनआइसी, टीसीएस जैसी कुछ बेहद विश्वसनीय एजेंसियों के पास था। लेकिन परीक्षाओं के बढ़ते दबाव और किफायत जैसे कई कारणों से एनटीए में ऐसी निजी एजेंसियों का प्रवेश हो गया जिनके पास अनुभव की कमी थी। सूत्रों के अनुसार, इस एजेंसियों के साथ ऐसे लोग भी आए जिनका वेरिफिकेशन भी नहीं हुआ। आज के दिन परीक्षाओं का पूरा जिम्मा ऐसी दर्जनों एजेंसियों के पास है। paper leak
एनटीए के पास खुद का अपना कोई अमला नहीं है। उसके पास चेयरमैन, महानिदेशक सहित कुल 15 अधिकारियों की टीम है और वे भी प्रतिनियुक्ति पर आते हैं। यही टीम परीक्षाओं के आयोजन को देखती है और परीक्षाएं कराने के लिए एजेंसियों के चयन का फैसला करती है। इनके नीचे जो टीम रहती है, वह भी ठेके पर होती है। यानी उनकी तैनाती आउटसोर्सिंग कंपनी के जरिये की जाती है। एनटीए ने 21 अक्टूबर, 2023 को इसे लेकर एक टेंडर जारी किया था जिसमें टेक्नीकल स्टाफ से लेकर एडवाइजर तक की नियुक्ति के लिए एक निजी एजेंसी की निविदाएं आमंत्रित की गई थीं।
कम रेट पर बड़ी परीक्षाएं कराने का मिल जाता है जिम्मा
सूत्रों की मानें तो एजेंसियों के चयन में गुणवत्ता पर कम, बल्कि रेट पर ज्यादा फोकस होता है। एजेंसियां भी टेंडर लेने के दौरान मानकों को पूरा करने का भरोसा देती हैं, लेकिन परीक्षा के दौरान वे उसे पूरा नहीं कर पातीं। नीट-यूजी, जेईई मेन जैसी कई परीक्षाओं में यह देखने को मिला है जहां एजेंसियों ने बिना कैमरों के ही परीक्षा करा ली या फिर कुछ कैमरों से ही काम चला लिया।
कौन-कौन सी बड़ी परीक्षाएं कराता है एनटीए
नीट-यूजी- करीब 24 लाख
नीट-पीजी- करीब दो लाख
जेईई मेन- करीब 12 लाख (दो शिफ्टों में आयोजन- दोनों ही बार करीब 12 लाख छात्र)
सीयूईटी-यूजी- करीब 13.50 लाख
सीयूईटी-पीजी- करीब पांच लाख
यूजीसी-नेट- करीब 11 लाख
एनसीटीई एंट्रेंस टेस्ट- करीब 50 हजार
सीटेट- 15 लाख छात्र
The Review
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राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षाओं को हर छात्र के लिए समान बनाने, स्वच्छ रखने और गड़बडियों को रोकने के लिए जिस नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) का गठन किया गया है, आज वही गड़बड़ियों का गढ़ बन गई है।
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