BNP NEWS DESK । Glacier Avalanche गुनगुनी चमकती धूप, खुशनुमा मौसम और बेफिक्र जिंदगी, तभी अचानक एक तेज सैलाब आया और अपने साथ सब कुछ बहाकर ले गया। बहुमंजिला इमारतें, महत्वपूर्ण पुल और इंसान खिलौनों की तरह देखते-देखते बह गए। यह खौफनाक नजारा चीन-नेपाल सीमा पर देखने को मिला। चीन के तिब्बत का सैलाब नेपाल में तबाही मचाते हुए आगे बढ़ा और गांव-गांव, शहर-शहर बर्बादी का मंजर छोड़ता चला हिमस्खलन के कारण आए इस सैलाब से कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। इस तबाही ने 2013 में उत्तराखंड की केदारनाथ घाटी में आई जलप्रलय की याद दिला दी। नेपाल में बाढ़ के कउत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है और दोनों राज्य अलर्ट पर हैं। एनडीआरएफ की 20 टीमों को तैनात कर दिया गया है।
इस तबाही में अब तक चीन में तीन लोगों समेत लगभग 160 लोगों की मौत हुई है और 133 भारतीयों समेत लगभग 750 लोग लापता हैं। लापता भारतीयों में अधिकांश कैलास-मानसरोवर तीर्थयात्री हैं। चीन और नेपाल के अधिकारियों ने मरने वालों की संख्या बढ़ने और भारी तबाही की आशंका जताई है।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत इलाके में भूकंप आया और उसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली, जिससे पता चलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से हिमनद फटा होगा और उसी से बाढ़ आई होगी। जर्मन रिसर्च सेंटर फार जियोसाइंसेज (जीएफजे) ने कहा कि बाढ़ से लगभग सात मिनट पहले 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने प्लैनेट लैब्स की सेटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती अध्ययन के हवाले से कहा कि लेंडे नदी में बर्फ व चट्टानों के खिसकने से मलबे वाली बाढ़ आई। प्लैनेट लैब्स की पहले और बाद की तस्वीरों में नदी के सामान्य रास्ते के दोनों ओर बड़े पैमाने पर तबाही दिखाई दी।
प्रेट्र के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे तिब्बत की सीमा से लगे नेपाल के रसुवा व धादिंग जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए। नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण तिमुरे में भोटेकोशी के रास्ते भीषण बाढ़ का पानी और मलबा त्रिशूली नदी तक फैल गया। इसके बाद बाढ़ नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी जिलों तक फैल गई। राजधानी काठमांडू से लगभग 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक के बाद नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को प्रभावित इलाकों में बचाव एवं राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया है। नेपाली सेना ने राहत एवं बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकाप्टर तैनात किए हैं। सुरक्षा बलों ने विभिन्न स्थानों पर फंसे 100 से अधिक लोगों को बचाया है। रसुवा के प्रभावित इलाकों स्याप्रु बेसी और तिमुरे में बचाव हेलीकाप्टर नहीं उतर पाए। इस जिले की आबादी लगभग 50,000 है।
भोटेकोशी और त्रिशूली के क्षेत्रों में खतरा बरकरार
नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग ने ‘एक्स’ पर कहा, नदी के अवरुद्ध होने के स्थान पर बनी झील का पानी अभी पूरी तरह नहीं निकला है इसलिए भोटेकोशी और त्रिशूली के क्षेत्रों में खतरा अभी बना हुआ है।
प्रभाग ने लोगों से नदियों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। एनडीआरआरएमए ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा में नदी किनारे रहने वाले लोगों से अगली सूचना तक सतर्क रहने और सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है।
लापता लोगों में भारत के अलावा कई देशों के लोग
नेपाल के गृह मंत्रालय ने बताया कि लापता लगभग 750 लोगों में लगभग 265 लोग चीन की तरफ के हैं। नेपाल में लापता लोगों में लगभग 133 भारतीय और 37 अनिवासी भारतीय हैं। इनमें से 37 लोग तमिलनाडु के रहने वाले हैं। कम से कम 50 भारतीय कैलास मानसरोवर तीर्थयात्री थे। ईशा फाउंडेशन के अनुसार, उनके सेंटर के 77 लोग लापता है और ये लोग इमीग्रेशन सेंटर पर मौजूद थे, जबकि 495 लोग सुरक्षित लौट आए हैं। नेपाली सेना के 44 जवानों समेत 80 सुरक्षाकर्मी भी लापता हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड (एनटीबी) के मुताबिक, लापता लोगों में अमेरिका के तीन और ब्रिटेन के 12 पर्यटकों के अलावा मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया व नीदरलैंड समेत दो दर्जन देशों के लोग भी शामिल हैं।







