BNP NEWS DESK। Digital Banking बैंकिंग अब सिर्फ शाखा और काउंटर के चक्कर काटने तक सीमित नहीं रह गई है। मोबाइल के एक क्लिक पर पैसे भेजने, बिल भुगतान और निवेश जैसी सेवाएं पूरी हो रही हैं। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस व्यवस्था में क्रांति लाने की तैयारी में है।
Digital Banking एआई के जरिए बैंक ग्राहकों के लेनदेन के व्यवहार को समझकर व्यक्तिगत सेवाएं देने के साथ संदिग्ध लेनदेन की तुरंत पहचान कर सकेंगे। हालांकि, डिजिटल सहूलियत के साथ साइबर सुरक्षा और डाटा प्राइवेसी सबसे बड़ा सिरदर्द बनकर उभरी है।
बुधवार को गोमती नगर स्थित होटल ताज महल में डिजिटल बैंकिंग लीडरशिप समिट एंड अवार्ड्स 2026 के 11वें संस्करण में इसी बदलते स्वरूप पर विशेषज्ञों ने मंथन किया। इंडियन इन्वेस्टर्स फेडरेशन और इन्वेस्ट यूपी द्वारा आयोजित इस समिट में बैंकिंग, फिनटेक, आइटी और सरकारी क्षेत्र के दिग्गजों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उद्योग मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, नाबार्ड की महाप्रबंधक डा. नंदिनी घोष, यूको बैंक के अंचल प्रबंधक आशुतोष सिंह, बैंक आफ महाराष्ट्र के अंचल प्रबंधक अमित गोयल और आरके शरण समेत कई हस्तियां मौजूद रहीं। इस दौरान एसबीआइ और बैंक आफ बड़ौदा समेत कई बैंकों को डिजिटल नवाचार के लिए पुरस्कृत भी किया गया। Digital Banking
खाताधारक के लिए क्या बदलेगा
स्मार्ट और पर्सनलाइज्ड बैंकिंग
एआई आपकी वित्तीय जरूरतों और खर्च करने के पैटर्न को समझकर सीधे आपके काम के विकल्प और सुझाव देगा।
संदिग्ध लेनदेन पर तुरंत ब्रेक
खाते से सामान्य व्यवहार से हटकर कोई फ्राड ट्रांजेक्शन होते ही एआइ सिस्टम अलर्ट भेजकर उसे रोक देगा।
तत्काल शिकायत निवारण
एआइ आधारित वर्चुअल असिस्टेंट और चैटबाट्स से ग्राहकों के सवालों व शिकायतों का समाधान मिनटों में होगा।
बैंक जाने की झंझट खत्म
अधिकतर सेवाएं मोबाइल पर ही उपलब्ध होने से शाखा जाने की निर्भरता न के बराबर रह जाएगी।
साइबर ठगों के नए पैंतरों से रहें सावधान!
डिजिटल बैंकिंग का दायरा बढ़ने के साथ जालसाजों के ठगने के तरीके भी हाईटेक हो चुके हैं। फर्जी बैंक अधिकारी, केवाईसी अपडेट, खाता ब्लाक होने, गलत यूपीआइ भुगतान वापस करने या रिवार्ड प्वाइंट का लालच देकर ठगी की कोशिशें बढ़ रही हैं।
इन बातों की गांठ बांध लें
– ओटीपी /पिन कभी शेयर न करें : बैंक कर्मचारी हो या कोई वरिष्ठ अधिकारी-अपना यूपीआइ पिन, सीवीवी या ओटीपी किसी को न बताएं। बैंक कभी फोन पर ये नहीं मांगता।
– संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें : एसएमएस, वाट्सएप या ईमेल पर आए अनजान लिंक पर क्लिक करके नेट बैंकिंग लागिन करने की भूल न करें।
– रिमोट-एक्सेस ऐप से बचें : किसी अनजान के कहने पर एनीडेस्क, टीम वीवर या क्विक सपोर्ट जैसे स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड न करें।
– बैंकिंग अलर्ट पर पैनी नजर : हर ट्रांजेक्शन के एसएमएस और ईमेल अलर्ट को ध्यान से देखें। कोई भी अज्ञात लेनदेन दिखते ही तुरंत बैंक को सूचित करें।
– यूपीआई पिन केवल पैसे भेजने के लिए : याद रखें, खाते में पैसे प्राप्त करने (रिफंड या पेमेंट लेने) के लिए कभी भी पिन दर्ज नहीं करना पड़ता।
– साइबर हेल्प-लाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें: यदि ठगी का शिकार हो जाएं तो बिना समय गंवाए ‘गोल्डन आवर’ यानी एक घंटे के भीतर साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। Digital Banking







