BNP NEWS DESK। NCERT राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें अब ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और उसके संघर्षों की अनकही कहानियों से भी नई पीढ़ी का परिचय कराएंगी। एनसीईआरटी की कक्षा नौ की नई सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक अंडरस्टैंडिंग सोसायटी इंडिया एंड बियांड पार्ट-2 (अध्याय 3 : रेजिस्टेंस एंड रेजिलिएंस) में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास को प्रमुखता से जगह दी गई है। यह पुस्तक अगले शैक्षणिक सत्र से पाठ्यक्रम का हिस्सा बनने जा रही है
मथुरा के केशव देव, वृंदावन के गोविंद देवजी मंदिर और भारत की संसद को भी शामिल किया गया
NCERT पुस्तक में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के ध्वंस से पुनर्निर्माण तक का सफर होगा। मुगल बादशाह अकबर के शासनकाल में उनके राजस्व अधिकारी राजा टोडरमल और राजपूत कछवाहा परिवार के प्रमुख राजा मान सिंह द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया था। औरंगजेब के शासनकाल में मंदिर का ध्वंस कर दिया गया था। 1780 में महारानी अहिल्याबाई होलकर ने मूल स्थल के ठीक बगल में वर्तमान श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण कराया।
यह भी बताया गया है कि 16वीं शताब्दी के बाद आक्रांताओं के हमलों से मंदिरों की रक्षा के लिए समाज ने किस तरह अनुकूलन किया। दिल्ली, वाराणसी और राजस्थान में मंदिरों को कम दृश्य स्थानों व संकीर्ण गलियों में बनाया गया। इनका बाहरी रूप पारंपरिक मंदिरों जैसा न होकर आम घरों या हवेली जैसा होता था, ताकि आसानी से नजर न पड़े और वह सुरक्षित रहें। पुस्तक में मथुरा के केशव देव मंदिर (राजा वीर सिंह द्वारा संरक्षित), वृंदावन के गोविंद देवजी मंदिर, ऐतिहासिक सेंगोल (स्वर्ण-रचित राजदंड) और देश की संसद का इतिहास भी है।
यह खास है किताब में
-प्रारंभिक मध्यकाल में मंदिर समाज और अर्थव्यवस्था के मुख्य स्तंभ थे। यह बड़े पैमाने पर भूमि अनुदान का प्रबंधन करते, कारीगरों व पुजारियों को रोजगार देते और कृषि विकास व सिंचाई के लिए ऋण उपलब्ध कराते थे।
-शासक अपनी राजनीतिक सत्ता को मजबूत करने के लिए मंदिरों को संरक्षण देते थे।
-मध्यकालीन व्यापार व्यवस्था को समझाते हुए हुंडी का जिक्र किया गया है, जो आधुनिक बैंक चेक की तरह कार्य करती थी। NCERT







