BNP NEWS DESK। Murder in Azamgarh आजमगढ़ में घर में चल रही पूजा के दौरान मंगलवार शाम पत्नी और दो पुरोहितों की हत्या का आरोपित अरविंद सिंह देर रात पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। तीन लोगों की हत्या के बाद वह अपने तीन बच्चों 10 वर्षीय परी, आठ वर्षीय शौर्य और 11 माह की बेटी शांभवी को लेकर कमरे में बंद हो गया था।
इस दौरान आठ वर्षीय बेटे के गाल से सटाकर गोली मारी, जो सिर के पार निकल गई। अनाथ हुई दोनों बच्चियों को संभालने का जिम्मा पुलिस ने लिया है।
पांच हजार से अधिक पुलिसकर्मी एक-एक दिन का वेतन देंगे
Murder in Azamgarh एसएसपी डा. अनिल कुमार ने कहा कि वह अपना एक माह का वेतन और पांच हजार से अधिक पुलिसकर्मी एक-एक दिन का वेतन देंगे। यह पैसा बैंक में एफडी के रूप में सुरक्षित रहेगा और बेटियों के बालिग होने तक उन्हें ढाई-ढाई हजार रुपये महीना मिलेगा। वह स्वयं जहां भी रहेंगे, बेटियों की पढ़ाई लिखाई का जिम्मेदारी निभाएंगे।
आठ साल पहले 2018 में पूजा के लिए मंदिर जा रहे अरविंद के बड़े भाई सुनील सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अरविंद इसे कभी भूल नहीं पाया। हत्यारोपित चचेरे भाइयों मनीष और अवनीश सिंह को जेल हुई और दोनों जमानत पर बाहर भी आ गए, लेकिन अरविंद की दिमागी परेशानी बढ़ती गई। वह कहता कि भाई की आत्मा उससे बातें करती है। पत्नी बबीता और मां शमला देवी ने तंत्र-मंत्र से लेकर पूजा-पाठ तक कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
किसी के कहने पर उन्होंने पांच दिवसीय विशेष पूजा शुरू कराई गई। पूजा के दौरान अरविंद और परेशान रहने लगा। आखिरकार बीते मंगलवार को पूजा के चौथे दिन उसने लाइसेंसी पिस्टल से पत्नी बबीता और दो पुरोहितों महेंद्र पाठक व अखिलेश मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी।
बच्चों को ढाल बनाकर खुद को कमरे में बंद कर लिया
इसके बाद उसने बच्चों को ढाल बनाकर खुद को कमरे में बंद कर लिया। करीब सात घंटे तक पुलिस उसे बाहर आने के लिए समझाती रही, लेकिन वह नहीं माना। भतीजियों को भी बुलाया गया लेकिन उसने उनकी भी नहीं सुनी। वह पुलिस से कहता रहा कि विकास दुबे का हाल देखा है। मुझे बेवकूफ मत बनाओ। Murder in Azamgarh
चार-पांच राउंड फायरिंग की
रात 12:45 बजे कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आई तो पुलिस टीम दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंची। अरविंद ने चार-पांच राउंड फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ और जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, अरविंद ने बंधक बने बेटे शौर्य को गोली मार दी।
मुठभेड़ के दौरान बांह में गोली लगने से परी भी घायल हुई और जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है। अस्पताल से परी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह कह रही है कि पिता ने पहले मां बबीता, फिर दोनों पुरोहितों और बाद में भाई शौर्य को गोली मारी। हालांकि अरविंद की मां शमला देवी और बहन साधना ने शौर्य की मौत पुलिस मुठभेड़ के दौरान होने का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। Murder in Azamgarh







